पीडियाट्रिशियन डॉ. इमरान पटेल बताते हैं कि 4 महीने की बच्ची को उसका परिवार गांव से इलाज के लिए लेकर आया था। उसे पिछले पांच दिनों से लगातार उल्टियां हो रही थीं। जांच में पता चला कि उसे इंटससेप्शन (Intussusception) था, जिसके कारण इमरजेंसी सर्जरी करनी पड़ी। इसलिए डॉक्टर सभी माता-पिता से अपील करते हैं कि बच्चों की उल्टी को कभी भी नजरअंदाज न करें।
उल्टी होना बच्चों से लेकर बड़ों तक में एक आम समस्या मानी जाती है। अक्सर लोग इसे पेट खराब होने या सामान्य इंफेक्शन समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकती है। ऐसा ही एक मामला पीडियाट्रिशियन डॉ. इमरान पटेल के सामने आया। चार महीने की एक बच्ची को पांच दिनों से लगातार उल्टियां हो रही थीं और उसका पेट भी फूला हुआ था। जब परिवार उसे गांव से इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचा, तो जांच में सामने आया कि उसकी आंत में गंभीर समस्या थी, जिसके कारण तुरंत सर्जरी करनी पड़ी। इसके बाद केस को संभाल रहे डॉक्टर इमरान पटेल ने हर पेरेंट को उल्टी के रंग को लेकर सर्तक किया। उन्होंने क्या बताया, चलिए जानते हैं।
बच्ची का परिवार गांव से इलाज कराने आया
पीडियाट्रिशियन डॉ. इमरान पटेल एक 4 महीने की बच्ची का मामला साझा करते हुए बताते हैं कि यह बच्ची उनके रिश्तेदारी में है और गांव से आई है। वह कहते हैं कि बच्ची की फैमिली हिस्ट्री बेहद दर्दनाक है, लेकिन यह वीडियो क्लीनिकल अवेयरनेस के लिए है, इसलिए वे केवल उसकी मेडिकल स्थिति पर बात कर रहे हैं।
बच्ची का पेट फूला हुआ था
एक्सपर्ट आगे बताते हैं बच्ची का पेट काफी फूला हुआ था। परिवार ने बताया कि उसे पिछले पांच दिनों से लगातार उल्टियां हो रही थीं और उल्टी का रंग हरा था। डॉ. पटेल बताते हैं कि बार-बार उल्टी होना, खासकर हरे रंग की उल्टी आना, एक रेड फ्लैग यानी गंभीर चेतावनी का संकेत हो सकता है, जिसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
बच्ची में इंटससेप्शन की हुई पुष्टि
बच्ची की जांच और रिपोर्ट में इंटससेप्शन (Intussusception) की पुष्टि हुई। यह ऐसी स्थिति होती है, जिसमें आंत का एक हिस्सा दूसरी आंत के अंदर घुस जाता है। इससे ऑब्स्ट्रक्शन हो जाती है, जिसके कारण लगातार हरे रंग की उल्टियां जैसी गंभीर समस्या हो सकती है। बच्ची की हालत नाजुक
होने के कारण उसे तुरंत इमरजेंसी सर्जरी करनी पड़ी। परिवार पांच दिन की देरी से अस्पताल पहुंचा था, इसलिए मामला काफी जटिल हो चुका था।










































