भारत में कैंसर अब सिर्फ बुज़ुर्गों की बीमारी नहीं रह गया है बल्कि युवाओं में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार बदलती लाइफस्टाइल, जंक फूड, तनाव, नींद की कमी और बढ़ता प्रदूषण युवाओं में कैंसर के सबसे बड़े कारण बनते जा रहे हैं।
कैंसर को बुज़ुर्गों की बीमारी माना जाता रहा है लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। भारत के कई अस्पतालों में यह साफ दिख रहा है कि 20 से 30 साल की उम्र के युवा भी कैंसर की चपेट में आ रहे हैं। जो कैंसर पहले आमतौर पर 50 साल के बाद देखे जाते थे, वे अब कम उम्र में सामने आने लगे हैं।
डॉ. अभिनव नरवरिया-कंसल्टेंट एवं यूनिट हेड, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग के अनुसार, ब्रेस्ट कैंसर, कोलन कैंसर, मुंह का कैंसर, पेट का कैंसर और यहां तक कि पैनक्रियाज कैंसर का खतरा भी युवाओं में बढ़ रहा है।
डॉक्टर ने बताया कि पिछले 10 सालों में 40 साल से कम उम्र के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। चिंता की बात यह है कि कम उम्र में होने वाले कैंसर अक्सर ज्यादा आक्रामक होते हैं। कई मामलों में बीमारी देर से पकड़ में आती है क्योंकि युवा खुद को जोखिम में नहीं मानते और शुरुआती लक्षणों को आम समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
लाइफस्टाइल बना सबसे बड़ा कारण
डॉक्टर के अनुसार, पिछले कुछ दशकों में बदली हुई जीवनशैली कैंसर के बढ़ते मामलों की बड़ी वजह बन रही है। लंबे समय तक बैठकर काम करना, जंक और फास्ट फूड, ज्यादा चीनी, नींद की कमी, शराब और तनाव शरीर की सेहत को कमजोर करते हैं। वहीं पैकेज्ड और प्रोसेस्ड खाना, मैदा, कम फाइबर वाली डाइट और जरूरत से ज्यादा एंटीबायोटिक पेट के अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे इम्युनिटी घटती है और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
पर्यावरण और प्रदूषण का असर
भारत में बढ़ता वायु प्रदूषण भी युवाओं में कैंसर का एक बड़ा कारण बन रहा है। PM2.5 जैसे खतरनाक प्रदूषक शरीर में सूजन बढ़ाते हैं, इम्युनिटी को कमजोर करते हैं और DNA को नुकसान पहुंचाते हैं। यही वजह है कि आज कई ऐसे युवा, जिन्होंने कभी सिगरेट नहीं पी, उनमें भी फेफड़ों का कैंसर देखा जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में धुएं से खाना पकाना और शहरों में खराब हवा व वेंटिलेशन भी जोखिम को बढ़ाते हैं।
जेनेटिक्स से ज्यादा लाइफस्टाइल जिम्मेदार
कुछ लोगों में कैंसर का खतरा जेनेटिक कारणों से होता है जैसे BRCA जीन म्यूटेशन या परिवार में पहले कैंसर का इतिहास। लेकिन ऐसे मामले बहुत कम होते हैं। असली समस्या तब होती है जब खराब लाइफस्टाइल और प्रदूषण जैसे कारण इन जीनों को जल्दी सक्रिय कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि कैंसर कम उम्र में ही विकसित हो जाता है।
सबसे बड़ी चुनौती है देर से पहचान
डॉक्टर ने बताया कि युवा अक्सर कैंसर के शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से नहीं लेते। उन्हें लगता है कि वे अभी बहुत छोटे हैं, उन्हें ऐसी बीमारी नहीं हो सकती। इसी सोच के कारण इलाज में देरी हो जाती है।
आम लक्षण हैं जिन्हें बिल्कुल नजरअंदाज न करें
डॉक्टर ने बताया कि लंबे समय तक बना रहने वाला दर्द, अचानक वजन कम होना, मल में खून आना, लगातार खांसी, स्तन में गांठ, पेट या आंतों की आदतों में बदलाव और मुंह में न भरने वाले छाले या घाव जैसे लक्षणों को कतई नजरअंदाज न करें।
डर नहीं, जागरूकता जरूरी
डॉक्टर के अनुसार, युवाओं में बढ़ता कैंसर चिंता का विषय जरूर है, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे जरूरी है समय रहते सही कदम उठाना। संतुलित और पौष्टिक खानपान, तंबाकू और शराब से दूरी, नियमित व्यायाम और समय-समय पर हेल्थ चेकअप से कैंसर का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है। सही जानकारी, जागरूकता और समय पर जांच हजारों युवाओं की जान बचा सकती है।














































