ईएनटी स्पेशलिस्ट होने के चलते मेरे पास कान की समस्या से जुड़े अलग-अलग तरह के मामले आते रहते हैं। जिनमें ईयर डैमेज के केस सबसे आम हैं। कम ही लोग ये जानते हैं कि कान में पानी रह जाना, तनाव, नींद की कमी, सेकंड हैंड स्मोक, पोषण में कमी और फिजिकली एक्टिव न रहना जैसी रोजाना की जिंदगी से जुड़ी चीजें भी खामोशी से कान को नुकसान पहुंचा देती हैं। और कुछ तो पूरी तरह से बहरा तक बना सकती हैं।
आदतें जो बिगाड़ती हैं कान की सेहत, सुनने की क्षमता होती है प्रभावित
ज्यादातर नहीं जानते वो आदतें, जो अनजाने में कर जाती हैं कान को डैमेज
कान में पानी रह जाना
नहाने या स्विमिंग के बाद कान में पानी रह जाना आम है। वहीं, कुछ लोग मैल को निकालने के इरादे से भी जानबूझकर कान में पानी डालते हैं। चूंकि शरीर के इस अंग की बनावट अंदर से नालीनुमा होती है, ऐसे में अक्सर आउटर कैनाल एरिया में पानी फंसकर रह जाता है। सीडीसी का कहना है कि इसके कारण पर्दे को प्रोटेक्ट करने वाला मैल गल जाता है और स्किन भी प्रभावित हो जाती है। ऐसे में बैक्टीरिया और फंगस को पनपने व बढ़ने का मौका मिलता है, जो इंफेक्शन का रूप ले लेता है। इंफेक्शन बढ़ने पर कान को अंदर से नुकसान पहुंचता है।
तनाव
आपने तनाव के कारण सिर दर्द, कमजोरी, आंखों में दर्द ऐसी चीजों के बारे में तो सुना होगा, लेकिन इस बात से कम ही लोग परिचित हैं कि स्ट्रेस से कान की सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है। साल 2024 में प्रकाशित स्टडी में ये साबित हुआ था कि लंबे समय तक तनाव में रहने पर कॉक्लियर, ऑडिटरी सिग्नल्स, नर्व्स, इनर इन्फ्लेमेशन और हीलिंग प्रोसेस पर बुरा असर पड़ता है। इससे दर्द, इंफेक्शन, टिनिटस, कान के पर्दे को नुकसान और सुनने की क्षमता कम या खत्म होने की स्थितियां बनती है।
सेकंड हैंड स्मोकिंग
ज्यादातर लोगों को ये मालूम ही नहीं है कि स्मोकिंग ही नहीं, बल्कि सेकंड हैंड स्मोक भी उनके कान पर इतना बुरा असर डाल सकता है कि इससे सुनने की क्षमता भी गिर सकती है। NCBI की स्टडी के अनुसार, व्यक्ति भले ही खुद स्मोक न करता हो, लेकिन सेकंड हैंड स्मोक के जरिए उसके शरीर में अगर निकोटीन जाता है तो उससे कॉक्लियर इस्कीमिया की स्थिति बनती है। यह वह स्थिति है, जिसमें कान तक जाने वाला ब्लड फ्लो प्रभावित होता है और ईयर हेयर भी डैमेज होते हैं। जिससे सुनने की क्षमता पर बुरा असर पड़ने लगता है।
पर्याप्त और अच्छी नींद की कमी
इकोज ऑफ नाइट नाम की स्टडी में ये सामने आ चुका है पर्याप्त और अच्छी नींद नहीं मिलने पर कॉक्लियर के अंदर का ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है, जिससे ब्लड फ्लो कम हो जाता है और हेयर सेल डैमेज होने लगते हैं। साथ ही कान के अंदर के हिस्से में इलेक्ट्रोलाइट्स के बैलेंस और फ्लुइड फ्लो को भी बिगाड़ता है। ये सब कारण मिलकर सुनने की क्षमता को कमजोर करते हैं।
पोषण में कमी
इस बात से भी लोग कम ही अवगत हैं कि पोषण से भरी डाइट नहीं लेने और अनहेल्दी फूड का सेवन करते रहना भी हीयरिंग लॉस का कारण बन सकता है। एसोसिएशन ऑफ न्यूट्रिशनल फैक्टर्स विद हीयरिंग लॉस नाम की स्टडी में खुलासा किया गया था कि ज्यादा कार्बोहाइड्रेट्, फैट, कोलेस्ट्रॉल, लो प्रोटीन, लो विटामिन वाली डाइट का सुनने की क्षमता पर सीधा और नकारात्मक असर पड़ता है।
फिजिकली एक्टिव न रहना
हीयरिंग लॉस का सीधा कनेक्शन कम फिजिकल एक्टिविटी और आलस से भरी जिंदगी से जोड़ा गया है। एक स्टडी के अनुसार, शारीरिक रूप से सक्रिय न रहना ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस, क्रोनिक इन्फ्लेमेशन और कॉक्लियर में ब्लड फ्लो को बिगाड़ता है, जो सुनने की क्षमता कम होने की आशंका को बढ़ा देता है।
आदतें जो कान और सुनने की क्षमता को रखेंगी हेल्दी
कान को हेल्दी रखने के लिए रखें किन चीजों का ख्याल
अगर आप चाहते हैं कि आपके कान की सेहत अच्छी रहे और सुनने की क्षमता पर भी बुरा असर न पड़े, तो अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन और ईयर साइंस इंस्टिट्यूट ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा बताई गई कुछ अच्छी आदतों को अपनाया जा सकता है:
ज्यादा शोर और लाउड ऑडियो से बचें
ज्यादा लंबे समय तक ऐसे माहौल में न रहें, जहां पर बहुत ज्यादा शोर-शराबा हो। साथ ही अगर स्पीकर, टीवी, मोबाइल आदि की वॉल्यूम को कम रखें। कोशिश करें कि ऑडियो लेवल 70 डेसिबल्स के अंदर रहे।
डाइट हो ऐसी
ऐसा खाना खाएं, जिसमें विटामिन- ए, सी और ई के साथ ही कान की हेल्थ को बूस्ट करने वाले जिंक जैसे मिनरल्स शामिल हों। साथ ही डाइट में पत्तेदार सब्जी, ब्लूबेरी, ब्रोकली, ग्रीन-टी, जैसे एंटी-ऑक्सीडेंट्स और फ्लेवोनोइड्स रिच फूड्स भी शामिल करें।
कान का मैल जबरन न निकालें
कान की अपनी खुद की मैल को बाहर करने की प्रक्रिया है। इसे किसी भी तरह की बाहरी मदद की जरूरत नहीं होती है। इसीलिए जबरन क्यू-टिप, पानी या कोई दूसरी चीज डालकर इसे साफ करने की कोशिश न करें। अगर किसी वजह से मैल ज्यादा जम जाता है, तो बेस्ट है कि डॉक्टर को दिखाया जाए, ताकि वो कान को सही टूल्स और सुरक्षित तरीके से साफ कर सके।
फिजिकल एक्टिविटी
फिजिकल एक्टिविटी कान से जुड़े ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में मदद करती है। ये ईयर और हीयरिंग को हेल्दी रखने में मदद करता है।
इन चीजों के साथ ही स्मोकिंग – पैसिव स्मोकिंग से बचने और पर्याप्त नींद व तनाव को नियंत्रित करना भी कान और सुनने की क्षमता को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है। सभी को शरीर के बाकी टेस्ट की तरह ईयर से जुड़े चेकअप भी रेग्युलर करवाते रहना चाहिए। इससे कान और सुनने की क्षमता से जुड़ी किसी समस्या को शुरुआती दौर में ही समझकर उसका उपचार शुरू करने में मदद मिलती है।










































