बॉलीवुड फिल्म जिसे अकेले देखने पर था ₹10 हजार का इनाम, थ‍िएटर के बाहर तैनात एम्बुलेंस, हॉलीवुड ने की थी मदद

parmodkumar

0
5

डरावनी यानी भुतहा फिल्मों के चाहने वालों की एक बड़ी कैटिगरी है। काफी लोग इस तरह की फिल्में खूब पसंद करते हैं और ये सिनेमाघरों में अच्छा परफॉर्म भी करती थी। एक ऐसी ही कल्ट बॉलीवुड हॉरर फिल्म के बारे में यहां बताने जा रहे हैं जिसे देख पाने के लिए बड़ी हिम्मत चाहिए थी। इतना ही नहीं डिस्ट्रीब्यूटर्स ने इस फिल्म को लेकर यहां तक शर्त रखी थी कि जिसने थिएटर में ये फिल्म अकेले देख ली, उन्हें 10 हजार रुपये का इनाम मिलेगा। इसके साथ ही कहते हैं कि थिएटर के बाहर हमेशा एक एम्बुलेंस लगा रहता था।

रामसे ब्रदर्स की ‘पुराना मंदिर’ (1984) और ‘वीराना’ (1988) ऐसी हॉरर फिल्मों की लिस्ट में रही हैं जिसने लोगों को जितना ही डराया, उतनी ही इन फिल्मों ने कमाई भी की। ये फिल्में काफी कम बजट में बनी लेकिन इसके बावजूद बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफल रहीं। इन सभी फिल्मों में से जिस फिल्म ने लोगों का गला सबसे अधिक सुखाया वो थी ‘दरवाजा’ जो साल 1978 में रिलीज हुई थी।

करीब दो दशकों तक हॉरर फिल्मों पर अपना दबदबा
हॉरर फिल्मों के सच्चे शौकीन रामसे ब्रदर्स की कहानियों के फैन न हों ऐसा संभव नहीं। ‘महल’ (1949) जैसी क्लासिक फिल्मों और 1960 के दशक की कुछ हॉरर फिल्मों जैसे ‘बीस साल बाद’ (1962), ‘गुमनाम’ और ‘भूत बंगला’ (1965) जैसी तमाम फिल्मों के साथ रामसे ब्रदर्स ने करीब दो दशकों तक हॉरर फिल्मों पर अपना दबदबा बनाए रखा।

अकेले थिएटर में देखने की हिम्मत दिखाएं तो उसे 10,000 रुपये का नकद पुरस्कार
कम बजट में बनी उनकी कई फिल्में ‘पुराना मंदिर’ (1984) और ‘वीराना’ (1988) आदि बॉक्स ऑफिस पर खूब सफल रहीं। हालांकि, सबसे पहले फिल्म ‘दरवाजा’ को लेकर काफी चर्चा रही थी। इस फिल्म के लिए तुलसी रामसे और श्याम रामसे (रामसे ब्रदर्स) ने इंटरनैशनल मेकअप आर्टिस्ट क्रिस्टोफर टकर से सम्पर्क किया। कहते हैं कि ये फिल्म इतनी बड़ी हिट हुई कि डिस्ट्रीब्यूटर्स ने दर्शकों को खुलेआम चुनौती दी थी कि अगर वे इसे अकेले थिएटर में देखने की हिम्मत दिखाएं तो उसे 10,000 रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा।’

रामसे की कहानी में लोगों को डराने के लिए भयानक दिखना जरूरी
रामसे फैमिली की तीसरी पीढ़ी दीपक रामसे और अमित रामसे ने ‘दरवाजा’ की कहानी को याद किया। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ से बातचीत में दीपक ने बताया, ‘आजकल आपके पास मेकअप के कई ऑप्शन मौजूद हैं। उस समय, बहुत कम ऐसे मेकअप आर्टिस्ट थे जो वास्तव में डरावना मेकअप करना जानते थे। सितारे अपने चेहरे पर चोट लगने पर भी सुंदर दिखना पसंद करते थे, जबकि रामसे की कहानी में लोगों को डराने के लिए भयानक दिखना जरूरी था।’

कहा- हमने क्रिस्टोफर टकर से सम्पर्क किया
उन्होंने बताया कि कुछ भारतीय मेकअप आर्टिस्ट थे, लेकिन हमें लंदन से भी मेकअप आर्टिस्ट बुलाना पड़ता था। उन्होंने कहा, ‘हमने क्रिस्टोफर टकर से सम्पर्क किया था।’ उन्होंने आगे बताया, ‘कुमार जी और तुलसी जी उनसे लंदन में मिले और समझाया कि हमारा बजट बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन हमें उनकी स्पेशलिटी की ज़रूरत है। वे हमारी सीमाओं के भीतर काम करने के लिए सहमत हो गए और उन्होंने फिल्म दरवाजा के लिए मेकअप भेजा। हमने उन्हें पाउंड में भुगतान किया।’

‘किसी ने भी इसे अकेले देखने की हिम्मत नहीं की’
उन्होंने बताया कि हालांकि, इससे उनका बजट थोड़ा बढ़ गया था, लेकिन फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त कमाई हुई। फिल्म की सफलता को याद करते हुए दीपक ने कहा, ‘आप इसे प्रमोशन का तरीका कह सकते हैं, लेकिन एक डिस्ट्रीब्यूटर ने घोषणा की कि जो भी इस फिल्म को अकेले सिनेमाघर में देखेगा, उसे 10,000 रुपये नकद मिलेंगे। सिनेमाघर के बाहर एम्बुलेंस भी खड़ी कर दी गई थी। फिल्म इतनी सफल रही थी। लेकिन किसी ने भी इसे अकेले देखने की हिम्मत नहीं की।’