टेस्ला कार के एक मालिक डेविड मॉस ने हाल ही में एक ऐसी सड़क यात्रा पूरी की है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। उन्होंने अपनी टेस्ला कार के जरिए अमेरिका के पश्चिमी तट (West Coast) से पूर्वी तट (East Coast) तक का सफर तय किया, और दावा किया है कि इस दौरान उन्होंने एक बार भी गाड़ी के स्टीयरिंग या कंट्रोल को हाथ नहीं लगाया। यानी कि पूरी यात्रा के दौरान कार अपने आप ही चली, उन्होंने कार को ड्राइव या कंट्रोल नहीं किया। ऐसा कारनामा पहली बार हुआ है। डेविड मॉस ने अपनी इस यात्रा को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर के नाम से जाना जाता था) पर पोस्ट भी किया है। आप यहां क्लिक करके उनका पोस्ट पढ़ सकते हैं।
2,700 मील का सफर, जीरो इंटरवेंशन
डेविड की यह यात्रा लॉस एंजिल्स से दक्षिण कैरोलिना के मर्टल बीच तक लगभग 2,732 मील (करीब 4,400 किलोमीटर) लंबी थी। इस सफर को पूरा करने में 2 दिन और 20 घंटे का समय लगा। डेविड मॉस के मुताबिक टेस्ला के नए FSD (Full Self-Driving) V14.2 सॉफ्टवेयर की मदद से कार ने खुद ही नेविगेशन, लेन बदलना, ट्रैफिक सिग्नल संभालना और यहां तक कि सुपरचार्जर स्टेशनों पर पार्किंग भी खुद ही की।
चुनौतीपूर्ण रास्तों को खुद संभाला
आमतौर पर सेल्फ-ड्राइविंग तकनीक हाईवे पर तो अच्छा काम करती है, लेकिन इस यात्रा के दौरान कार ने शहर के भारी ट्रैफिक, कंस्ट्रक्शन जोन (सड़क मरम्मत वाले इलाके) और जटिल मोड़ों को भी बिना किसी इंसानी मदद के पार किया। खुद एलन मस्क ने भी सोशल मीडिया पर इस उपलब्धि की सराहना की है।
सुपरवाइज्ड कैटेगरी
भले ही यह उपलब्धि बड़ी दिखती है, लेकिन इसके साथ कुछ महत्वपूर्ण बातें जुड़ी हैं।
निगरानी की जरूरत – टेस्ला का सिस्टम अभी भी आधिकारिक तौर पर सुपरवाइज्ड कैटेगरी में आता है। इसका मतलब है कि ड्राइवर को हर समय सतर्क रहना होगा और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार का कंट्रोल भी संभालना होगा।
कानूनी स्थिति – अमेरिकी नियमों के मुताबिक इसे अभी भी लेवल 4 या लेवल 5 की ऑटोनॉमस सिस्टम नहीं माना जाता है, जहां कार बिना किसी इंसानी मदद के चल सकती है।
वेरिफिकेशन – यह दावा पूरी तरह से कार मालिक के बयानों और उनके द्वारा शेयर किए गए वीडियो पर आधारित है। किसी ऑर्गनाइजेशन या रेगुलेटर ने अभी इसकी स्वतंत्र जांच नहीं की है।
भविष्य के लिए इसके क्या मायने हैं?
यह यात्रा दिखाती है कि सॉफ्टवेयर के दम पर कारों की क्षमता कितनी बढ़ सकती है। इससे लंबी यात्राओं के दौरान ड्राइवर की थकान कम हो सकती है और सफर ज्यादा सुरक्षित बन सकता है। हालांकि, यह घटना ऑटोमैटिक ड्राइविंग से जुड़े कानूनों, जिम्मेदारी और सुरक्षा के बारे में एक नई बहस भी शुरू करती है। यह यात्रा ऑटोनॉमस ड्राइविंग की सुविधा और उपलब्धियों को दिखाती है लेकिन, अभी भी इस पर आंख मूंद कर भरोसा नहीं किया जा सकता। यह यात्रा दिखाती है कि तकनीक बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन बिना ड्राइवर वाली कारों के पूरी तरह कानूनी और सुरक्षित होने में थोड़ा और समय लगेगा।














































