गुलाफ्शा के पेट में 4 महीने का बच्चा था। चार मंजिला इमारत के मलबे में वो पूरे 2.30 घंटे तक जिंदा दबी रही। आखिरी कॉल उसने अपने पिता को किया। फोन पर वो बोली,’अब्बू, मैं यहां मरना नहीं चाहती, मुझे सांस नहीं आ रही है। प्लीज मुझे पानी दो।’ लेकिन फिर अचानक उसका फोन कट गया। साढ़े 5 घंटे बाद जब रेसक्यू टीम गुलाफ्शा तक पहुंची तो उसकी मौत हो चुकी थी। ये दर्दनाक मंजर दिल्ली में 7 अक्टूबर सामने आया।
दिल्ली के न्यू सीमापुरी में बुधवार (7 अक्टूबर) की शाम 4 बजे 25 साल पुरानी चार मंजिला बिल्डिंग ढह गई। मलबे के नीचे दबी 21 साल की गर्भवती गुलाफ्शा ने पहले कॉल अपने अब्बू को किया। गुलाफ्शा अपने पिता से बचा लेने की गुहार लगाती रही। शाम 6.30 बजे उसका आखिरी कॉल आया। लेकिन रेस्क्यू टीम को गुलाफ्शा तक पहुंचने में रात के 9.30 बज गए और वो मृत अवस्था में मिली।
स्थानीय लोगों ने कसी कमर
दरअसल, बुधवार दोपहर नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली की ईदगाह मछली मंडी के पास एक व्यस्त मार्केट रोड पर रिहायशी इमारत ढह गई। हादसे वाला इलाका घनी आबादी क्षेत्र है। इसलिए घटना के बाद हड़कंप मच गया। अधिकारियों के पहुंचने से पहले ही स्थानीय लोगों ने एक बच्चे समेत 4 लोगों को बाहर निकाल लिया। देर रात तक दो बच्चों सहित 3 लोगों की मौत हो गई।
जान बचाकर बाहर भागी
हादसे की पीड़ित महिला सकीना (60) ने उस डरावने पल को याद करते हुए बताया कि उसे लगा जैसे तेज भूकंप आया है। लेकिन उसने जब बाहर निकलकर देखा तो उसकी पूरी झुग्गी धूल-मिट्टी से भर गई थी। ये नजारा उसके लिए भूकंप से भी ज्यादा खतरनाक था। सकीना किसी तरह अपनी जान बचाकर तुरंत कमरे से बाहर भागी।
रहने वाले कबाड़ व्यापारी
दरअसल, न्यू सीमापुरी के इस इलाके में ज्यादातर कचरा उठाने वाले, कबाड़ बीनने वाले और कबाड़ के व्यापारी रहते हैं। आस-पास की ज्यादातर इमारतों पर प्लास्टर या पेंट नहीं है। वहां रहने वालों ने बताया कि ढहने वाली इमारत में कई बार तोड़फोड़ और निर्माण किया गया। पड़ोस में रहने वाले सलाम (42) ने बताया कि शुरू में यह दो मंजिला इमारत थी। लेकिन 2 साल पहले मकान मालिक ने दूसरी मंजिल तोड़कर दो और मंजिलें बनवा लीं। इस साल दो और मंजिलें और जोड़ी गईं।
बिल्डिंग में रहता था मालिक
स्थानीय लोगों ने पास की एक तीन मंजिला इमारत की ओर भी इशारा किया, जो पहले झुक गई थी। उसके मालिक ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद जांच हुई और अधिकारियों ने उसे गिराने का आदेश दिया। यह काम दो-तीन दिन पहले शुरू हुआ था। नजमा नाम की एक रिश्तेदार ने बताया कि ढहने वाली इमारत की पहली और दूसरी मंजिल पर मालिक, उनके दो शादीशुदा बेटे और उनके परिवार रहते थे, जबकि तीसरी मंजिल किराए पर दी गई थी। परिवार की कबाड़ की दुकान ग्राउंड फ्लोर पर थी।
बच गई इतने लोगों की जान
घटना के दौरान परिवार के अधिकांश सदस्य बाहर थे। पास में एक दुकान चलाने वाले किशोर ने बताया कि बड़ी बहू अपने माता-पिता के घर गई थी, जबकि छोटी बहू स्थानीय मस्जिद में नमाज पढ़ रही थी। पिता एक गोदाम में गए थे। एक बेटे और उसकी मां को अर्ध-बेहोशी की हालत में बचाया गया। इमारत बगल के ईदगाह की ओर गिरी, जहां बच्चे अक्सर खेलते हैं। स्थानीय लोगों ने कहा कि यदि समय अलग होता तो मरने वालों की संख्या अधिक हो सकती थी।











































