पत्नी से अप्राकृतिक संबंध बनाने और रेप का आरोप, हाईकोर्ट ने गुरुग्राम के बिजनेसमैन की अग्रिम जमानत की खारिज

parmodkumar

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अहमदाबाद: गुजरात हाई कोर्ट ने गुरुग्राम के एक बिजनेसमैन की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। बिजनेसमैन पर पत्नी ने गंभीर यौन उत्पीड़न और दहेज उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। ये मामला अहमदाबाद की डीसीबी क्राइम ब्रांच में दर्ज शिकायत से सामने आया। महिला ने अपने पति, सास और ससुर पर दहेज मांगने और शोषण के आरोप लगाए। महिला का आरोप है कि पति ने उसके साथ जबरन अप्राकृतिक यौन संबंध बनाए और शादी के दौरान कई बार उसकी इच्छा के खिलाफ शारीरिक संबंध बनाए। उसने यह भी कहा कि ससुर ने उसके साथ छेड़छाड़ की और पति ने उसे बचाने के बजाय चुप्पी साधे रखी। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि शादी का रिश्ता किसी भी व्यक्ति को दूसरे की शारीरिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करने का अधिकार नहीं देता।

2022 में हुई थी शादी
शिकायत के अनुसार, महिला की शादी वर्ष 2022 में हुई थी। यह उसकी पहली शादी थी, जबकि आरोपी की यह दूसरी शादी बताई गई है। महिला ने दावा किया कि आरोपी की पहली पत्नी ने भी इसी तरह के आरोप लगाए थे, जिससे उसके व्यवहार का एक पैटर्न सामने आता है। गिरफ्तारी की आशंका के चलते आरोपी ने हाई कोर्ट का रुख कर अग्रिम जमानत मांगी। उसने खुद को गुरुग्राम का एक प्रतिष्ठित व्यवसायी बताते हुए सभी आरोपों को निराधार और वैवाहिक विवाद से प्रेरित बताया। हालांकि, पत्नी की ओर से पेश वकील ने अदालत के सामने आरोपों की गंभीरता और कथित अत्याचारों का हवाला देते हुए जमानत का कड़ा विरोध किया।

कोर्ट ने सुनाया ये फैसला
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस डी. ए. जोशी ने अपने आदेश में कहा कि आधुनिक कानूनी व्यवस्था में शारीरिक स्वायत्तता को सर्वोच्च महत्व दिया जाता है, चाहे संबंध वैवाहिक ही क्यों न हो। अदालत ने कहा कि अंतरंग संबंध तभी स्वीकार्य हैं जब वे सहमति और सम्मान पर आधारित हों। किसी की इच्छा के विरुद्ध बनाए गए संबंध न केवल शारीरिक पीड़ा देते हैं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक क्षति भी पहुंचाते हैं। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि कोई महिला बिना ठोस कारण के ऐसे संवेदनशील आरोप सार्वजनिक मंच पर नहीं लाती। रिकॉर्ड में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी की पहली पत्नी ने भी इसी तरह के आरोप लगाए थे, जिससे यह मामला एक बार की चूक नहीं बल्कि बार-बार दोहराए गए व्यवहार की ओर इशारा करता है। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।