आचार्य प्रशांत ने खोली बच्चों की पोल, बोले-जब तक जरूरत है, तब तक ही दिखते हैं माता-पिता!

parmodkumar

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लेखक आचार्य प्रशांत अक्सर ही बच्चों में अच्छे संस्कार और सही व्यवहार से जुड़े मुद्दों पर अपनी अहम राय रखते हैं। हाल ही में भी उन्होंने इसी विषय पर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है, जो आज के माता-पिता और युवाओं दोनों के लिए सोचने पर मजबूर कर देने वाली है।

आमतौर पर जब तक बच्चे छोटे होते हैं, उनकी पूरी दुनिया माता-पिता के इर्द-गिर्द ही घूमती रहती है। लेकिन जैसे ही वे बड़े होते हैं, अपनी ही दुनिया में मग्न हो जाते हैं। कई बार वे इस कदर अपनी जिंदगी में खो जाते हैं कि माता-पिता के बारे में सोचने की फुर्सत भी नहीं निकाल पाते। बच्चों का यही व्यवहार कई बार माता-पिता को सोचने पर मजबूर कर देता है। इसी मुद्दे पर लेखक आचार्य प्रशांत ने अपनी अहम राय रखी है। उनका कहना है कि बच्चों को जब तक जरूरत होती है, तभी तक माता-पिता याद रहते हैं। उन्होंने इस पर और भी महत्वपूर्ण बातें कही हैं, आइए जानते हैं विस्तार से।

इंस्टाग्राम वीडियो में एक न्यूज एंकर, आचार्य प्रशांत से पूछती हैं कि वे बच्चे, जो अपने माता-पिता को फोन करने से पहले दस बार सोचते हैं, उनके लिए वह क्या कहना चाहेंगे? इस मुद्दे पर उनकी राय क्‍या है।

इस पर आचार्य प्रशांत जवाब देते हैं कि अगर माता-पिता आपको टिटनेस जैसी जरूरी वैक्सीन न लगवाते, आपकी देखभाल न करते, तो क्‍या आप चल जाते। माना क‍ि बच्चों के लिए कुछ करते समय माता-पिता का भी कोई स्वार्थ रहा हो, लेकिन जो कुछ उन्होंने किया, क्या उसका कर्ज आप कभी चुका पाए हैं?

बस जब तक स्‍वार्थ पूरा होता है तब घूमते हैं माता-प‍िता के पीछे

वे आगे कहते हैं कि जब तक माता -पिता से स्वार्थ पूरा होता था  तब तक बच्चे मां का आंचल पकड़कर कहते हैं- ‘आज मेरे खाने लिए ये बना दो, वो बना दो।’ पिता के पीछे-पीछे घूमते हैं 100 रुपये और दे दीजिए।

बड़े होने पर बाॅस-बीवी के पीछे घूमने लगते हैं

आचार्य आगे बततो हैं फ‍िरबच्चे जब बड़े होते हैं बॉस से 100 रुपये मिलते ही उनके आगे-पीछे घूमने लगते हैं। वहीं, पहले मां जीवन में केंद्र थी, आज प्रेमिका या पत्नी आ गई है, अब उसका आंचल पकड़कर घूमते हैं।

निस्वार्थता के बीज डालना जरूरी है

आचार्य प्रशांत कहते हैं इसीलिए बच्चों में निस्वार्थता के बीज डालना जरूरी है। यही असली संस्कार है। इसील‍िए बच्‍चों को इस द‍िशा में ध्‍यान देना चाह‍िए। पेरेंट्स भी इस बात पर ध्‍यान दें।

ड‍िस्‍केलमर: इस लेख में दी गई सूचना पूरी तरह इंस्‍टाग्राम रील पर आधार‍ित है। एनबीटी इसकी सत्‍यता और सटीकता की ज‍िम्‍मेदारी नहीं लेता है।