चिंता, तनाव, घबराहट बढ़ रही है? खाने की गलत आदत हो सकती है वजह, डॉक्टर से जानें दिमाग और पेट का कनेक्शन

parmodkumar

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अगर आपको भी पकौड़े, चिप्स, फ्रेंच फ्राइज जैसी तली-भुनी चीजें खाना पसंद है, तो ये शौक आपकी एंग्जायटी यानी चिंता, घबराहट और बेचैनी बढ़ा सकता है। ज्यादा मात्रा में तली-भुनी चीजें खाने से एंग्जायटी और मूड से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इस लेख में हम फ्राइड चीजें ज्यादा खाने से होने वाली समस्याएं और उनका समाधान बता रहे हैं।

तली-भुनी चीजें खाने से एंग्जायटी क्यों बढ़ती है? फ्राइड चीजों में ट्रांस फैट, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और ऑक्सीडाइज्ड ऑयल की मात्रा अधिक होती है। इनका नियमित सेवन शरीर में क्रॉनिक इंफ्लेमेशन (सूजन) को बढ़ाता है। यह सूजन दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर जैसे सेरोटोनिन और डोपामाइन के संतुलन को बिगाड़ सकती है, जो हमारे मूड और इमोशनल स्थिरता को नियंत्रित करते हैं।

तली-भुनी चीजें गट माइक्रोबायोम यानी आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को भी नुकसान पहुंचाते हैं। शरीर में लगभग 90% सेरोटोनिन का निर्माण आंतों में होता है, इसलिए गट हेल्थ खराब होने पर एंग्जायटी बढ़ने की संभावना भी बढ़ जाती है। इसे डॉक्टर ‘गट-ब्रेन एक्सिस इम्बैलेंस’ कहते हैं।

शुगर लेवल के उतार-चढ़ाव से भी एंग्जायटी हो सकती है। तला-भुना खाना खाने से शुगर लेवल तेजी से बढ़ता है और फिर अचानक गिरता है, जिससे चिड़चिड़ापन, बेचैनी और घबराहट जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।

कौन से फूड बढ़ाते हैं एंग्जायटी?
एंग्जायटी बढ़ाने वाली तली-भुनी चीजों में पोषक तत्व कम होते हैं। लंबे समय तक फ्राइड फूड खाने से दिमाग की काम करने की क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ता है। एंग्जायटी को ट्रिगर करने में निम्नलिखित फूड अहम भूमिका निभाते हैं-

समोसा, पकौड़े, फ्रेंच फ्राइज जैसे डीप-फ्राइड स्नैक्स
फास्ट फूड जैसे फ्राइड चिकन, बर्गर और चिप्स
प्रोसेस्ड फूड्स जिनमें प्रिजर्वेटिव और आर्टिफिशियल एडिटिव्स होते हैं
बार-बार इस्तेमाल किए गए तेल में बने स्ट्रीट फूड, जिनमें हानिकारक तत्व बढ़ जाते हैं

किस उम्र के लोग फ्राइड फूड से ज्यादा प्रभावित हैं?

डाइट से जुड़ी एंग्जायटी किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन 18 से 35 साल के युवा इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। इस उम्र में लोग बिजी लाइफस्टाइल के कारण फास्ट फूड पर ज्यादा निर्भर रहते हैं।

टीनएजर्स में भी जंक फूड खाने की आदत तेजी से बढ़ रही है। मध्यम आयु वर्ग के लोग, खासकर जिन्हें मोटापा, डायबिटीज या हार्मोनल समस्याएं हैं, उनमें भी खराब फूड हैबिट के कारण एंग्जायटी के लक्षण बढ़ सकते हैं।

आजकल हम देख रहे हैं कि अनहेल्दी डाइट, खासकर तले-भुने और प्रोसेस्ड फूड के ज्यादा सेवन से एंग्जायटी और मूड डिसऑर्डर की समस्याएं बढ़ रही हैं। ये फूड गट हेल्थ को बिगाड़ते हैं, शरीर में सूजन बढ़ाते हैं और दिमाग के केमिकल्स के संतुलन को प्रभावित करते हैं। एंग्जायटी से बचने के लिए डाइट में सुधार करना बेहद जरूरी है।

एंग्जायटी से कैसे बचें ?

डाइट में बदलाव करके काफी हद तक एंग्जायटी से बचा जा सकता है। इसके लिए-

तले-भुने और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करें
समय पर संतुलित भोजन करें
रेगुलर एक्सरसाइज करें
मेडिटेशन और डीप ब्रीदिंग टेकनीक से तनाव कम करें

एंग्जायटी से बचने के लिए क्या खाएं ?
हेल्दी और ब्रेन-फ्रेंडली डाइट से एंग्जायटी से राहत पाई जा सकती है। निम्नलिखित चीजें एंग्जायटी को कम करने में मदद कर सकती है-

एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर ताजे फल और सब्जियां
साबुत अनाज जैसे ओट्स और ब्राउन राइस
ओमेगा-3 फैटी एसिड के लिए अखरोट, अलसी, मछली खाएं
गट हेल्थ के लिए दही और फर्मेंटेड फूड खाएं
विटामिन और मिनरल्स के लिए नट्स और बीज खाएं
डिहाइड्रेशन से होने वाली एंग्जायटी से बचने के लिए पर्याप्त पानी पिएं

एंग्जायटी से बचने के लिए आदतें बदलें

तली-भुनी चीजें कभी-कभार खाने से कोई बड़ा नुकसान नहीं होता। लेकिन इसे अगर नियमित आदत बना लिया जाए, तो धीरे-धीरे इसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने लगता है। एंग्जायटी के कारण काम करने की इच्छा न होना, नींद न की कमी और तनाव बढ़ने जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

आप जो खाते हैं, उसका सीधा असर आपके दिमाग और भावनाओं पर पड़ता है। सही मात्रा में हेल्दी फूड खाने से शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहना आसान है।

एंग्जायटी एक मल्टीफैक्टोरियल समस्या है, जिसमें डाइट सिर्फ एक कारण है। अगर लगातार घबराहट, बेचैनी या पैनिक अटैक जैसे लक्षण बरकरार हैं, तो डाइट को सुधारने के साथ साथ मेडिकल जांच भी जरूरी है।