आयुर्वेदिक डॉक्टर ने बताया गुड़ से दवा बनाने का तरीका, मल में चिपचिपापन होगा बंद, खुलकर आएगा पेशाब

parmodkumar

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गुड़ को आयुर्वेद में स्वास्थ्यवर्धक का स्थान दिया गया है। क्योंकि यह कई सारी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है। इसमें आयरन, मैग्नीशियम आदि खनिज पाए जाते हैं। खासकर खून की कमी और फेफड़ों के ऊपरी प्रणाली से बचाने में यह काफी असरदार देखा जाता है। लेकिन क्या आप इसे दवा बनाने का तरीका जानते हैं।

आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉक्टर मिहिर खत्री ने बताया कि आप गुड़ को दवा बना सकते हैं। आयुर्वेद में ऐसी अलग अलग 4 अवस्थाएं बताई गई हैं, जिसमें गुड़ दवा की तरह काम करता है, लेकिन इसके लिए आपको अलग अलग 4 देसी औषधि मिलानी होती हैं। यह प्रयोग काफी फायदेमंद साबित हो सकते हैं।

आम अवस्था
टॉक्सिन को आयुर्वेद में आम कहा जाता है। डॉक्टर के मुताबिक आम की वजह से सुबह उठते ही शरीर में जकड़न, चेहरे पर सूजन, मल में चिपचिपा पदार्थ आने की समस्या हो सकती है। इस कंडीशन में मरीज को गुड़ के साथ सोंठ का प्रयोग करना चाहिए।

अजीर्ण अवस्था
अजीर्ण पेट की समस्याओं को कहा जाता है। जिसमें अपच, पेट में भारीपन, खाना अच्छी तरह से नहीं पचना जैसी दिक्कतें होती हैं। ऐसे लोगों को आयुर्वेद में गुड़ को पिपली चूर्ण के साथ लेने के लिए कहा गया है।

मूत्र कृच्छ
इसमें मरीज को पेशाब रुक रुककर आने की समस्या होती है। उसे खुलकर पेशाब करने में दिक्कत होती है, जिसे रिटेंशन ऑफ यूरीन भी कहा जाता है। ऐसे मरीजों को गुड़ को जीरे के साथ लेना चाहिए।

बवासीर या पाइल्स को आयुर्वेद में अर्श कहते हैं। इन मरीजों को अक्सर ऑपरेशन करवाने की सलाह दी जाती है। डॉक्टर ने गुड़ को अभ्या चूर्ण के साथ लेने की सलाह देते हैं। हरड़ पाउडर को ही अभ्या चूर्ण कहा जाता है।

डॉक्टर के मुताबिक थोड़ा मुलायम देसी गुड़ लें, इसमें अपनी अवस्था के मुताबिक दूसरी औषध लेकर सामान मात्रा में मिलाएं। इसे अच्छी तरह कूटकर छोटी छोटी गोली बना लें। इसकी 2-2 गोली सुबह शाम खाली पेट गुनगुने पानी के साथ लें। जरूरत पड़े तो दिन में दो-तीन बार भी ले सकते हैं।