क्या कोई देश दूसरे देश के राष्ट्रपति को गिरफ्तार कर सकता है? क्या कहते हैं अंतरराष्ट्रीय कानून

parmodkumar

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अमेरिका ने शनिवार को कुछ ऐसा किया, जिसने सभी को हैरान करके रख दिया। अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला में एक हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन चलाया और यहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया। मादुरो की पत्नी सीलिया फ्लोरस को भी हिरासत में लिया गया। इसके बाद उन्हें विशेष विमान से अमेरिका ले जाया गया। राष्ट्रपति मादुरो की गिरफ्तारी के दौरान वेनेजुएला की राजधानी काराकास में धमाके भी हुए। फिलहाल मादुरो को उनकी पत्नी के साथ न्यूयॉर्क में रखा गया है, जहां उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जा रहा है।

अमेरिका ने राष्ट्रपति मादुरो के खिलाफ ड्रग ट्रैफिकिंग के आरोप लगाए हैं। जहां अमेरिका के कई सारे सहयोगी देशों ने उसके इस कदम की तारीफ की है, वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार इस एक्शन के बाद विरोध का भी सामना कर रही है। इन सबके बीच एक सवाल हर कोई पूछ रहा है- क्या अमेरिका या किसी अन्य देश को किसी देश में दाखिल होने और उसके देश के मुखिया को गिरफ्तार करने की इजाजत है? अंतरराष्ट्रीय कानून या संयुक्त राष्ट्र इस संबंध में क्या कहता है?

अगर आप सरकारी परीक्षाओं या फिर यूपीएससी जैसे एग्जाम के इंटरव्यू के लिए तैयारी कर रहे हैं, तो फिर आपको इस सवाल का जवाब मालूम होना चाहिए। कई सारी प्रतियोगी परीक्षाओं में इस घटना से संबंधित सवाल पूछे जाएंगे। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि अमेरिका के कदम को लेकर अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहते हैं, इस संबंध में भी सवाल होगा। आइए अब इन सवालों के जवाब जान लेते हैं।

अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहता है?
अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अमेरिका को किसी भी देश के कार्यकारी राष्ट्रध्यक्ष को गिरफ्तार करने या बंदी बनाने का अधिकार नहीं है। खुद संयुक्त राष्ट्र ने भी शनिवार को कहा कि अमेरिका का कदम दुनिया के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम करता है। खासतौर पर ऐसे समय में है, जब हम पिछले कुछ सालों से चल रहे संघर्ष को भुलाकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका का वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को गिरफ्तार करना संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सीधा उल्लंघन है, जिसे अक्टूबर 1945 में साइन किया गया।

इस चार्टर में आर्टिकल 2(4) में साफ तौर पर कहा गया है कि सदस्य देशों को अन्य मुल्कों पर किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई करने से बचना चाहिए। UN चार्टर के आर्टिकल में कहा गया है, ‘सभी सदस्य देश अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बल प्रयोग या धमकी देने से, या संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों के उलट किसी भी अन्य तरीके से बल प्रयोग करने से परहेज करेंगे।’ कुल मिलाकर ट्रंप सरकार ने मादुरो को गिरफ्तार कर इसका उल्लंघन किया है।

हालांकि, इसी आर्टिकल में दो ऐसे अपवादों के बारे में भी बताया गया है, जिनके तहत किसी देश पर अन्य देश कार्रवाई कर सकता है। इसमें पहला अपवाद ये है कि अगर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद किसी देश पर कार्रवाई के लिए हरी झंडी दिखाता है, तो उस पर हमला किया जा सकता है। दूसरा अपवाद ये है कि आर्टिकल 51 के तहत हथियारबंद हमला होने पर आत्म-रक्षा के लिए हमला करने का अधिकार है। इसमें कहीं भी ये नहीं लिखा है कि किसी नेता को भ्रष्ट माने जाने पर उसे कोई देश गिरफ्तार कर सकता है। ना ही ये कहा गया है कि अगर कोई राष्ट्रध्यक्ष अपने देश में अपराध करता है, तो उसे दूसरा देश गिरफ्तार कर सकता है।

आमतौर पर निकोलस मादुरो को लेकर कहा जाता है कि उन्होंने चुनावों में धांधली की है, जिसके बाद ही वह राष्ट्रपति बन पाए हैं। फिर भी अंतरराष्ट्रीय कानून अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सैन्य बल प्रयोग को प्रतिबंधित करने की बात कहता है, जब तक कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तरफ से ऐसा करने को ना कहा जाए। मादुरो के मामले में संयुक्त राष्ट्र की तरफ से कोई आदेश नहीं आया था।

अमेरिका ने अपनी हरकत पर क्या कहा?
ट्रंप सरकार का कहना है कि मादुरो को गिरफ्तार करना एक सैन्य अभियान का हिस्सा है। डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति को गिरफ्तार करने के लिए सैन्य सहायता मांगी थी, जिसके बाद ये कदम उठाया गया। डिपार्टमेंट ने निकोलस मादुरो पर कई तरह के गंभीर आपराधिक आरोप लगाए हैं। सरकार का कहना है कि मादुरो ने पिछले 25 सालों में ‘कार्टेल ऑफ द सन’ के नेता के तौर पर काम किया। उन्होंने कोलंबियाई गुरिल्ला समूह FARC के साथ मिलकर अमेरिका में कोकीन पहुंचाया, जिसकी वजह से लोगों के स्वास्थ्य को खतरा पैदा हुआ।