मेरे पास कई लोग ये सवाल लेकर आते हैं कि क्या कोई ऐसा तरीका है कि सफेद बालों को फिर से काला किया जा सके? इसके जवाब में मैं यही कहता हूं कि हां, कुछ हद तक ये संभव है। अगर उम्र से पहले सफेद बालों की वजह किसी प्रकार के दोषों से जुड़ी है, तो उसे सही खान-पान, आंवला-ब्राह्मी जैसी जड़ी-बूटियों, नीलीभृंगादि-भृंगामलकादि जैसे औषधीय तेलों से सिर की मालिश आदि के जरिए काबू में किया जा सकता और कुछ हद तक नए उग रहे बालों के पिगमेंटेशन को काला रखने में भी ये मददगार साबित होते हैं। इतना ही नहीं इनसे बालों की गुणवत्ता और घनत्व को भी बेहतर बनाया जा सकता है।
सफेद बालों को लेकर क्या कहता है आयुर्वेद
बालों का सफेद होना आयुर्वेद में पालित्य कहलाता है। इसे सिर्फ एक बाहरी समस्या नहीं बल्कि शरीर के अंदरूनी असंतुलन के संकेत के रूप में देखा जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, समय से पहले बालों का सफेद होना मुख्य रूप से शरीर में ‘पित्त दोष’ के बढ़ने से जुड़ा है। ये शरीर में गर्मी, चयपचय (मेटाबॉलिज्म) और शारीरिक बदलावों की प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है।
तनाव, अस्वस्थ खान पान, एसिडिटी या खराब जीवनशैली के चलते जब शरीर में पित्त व गर्मी बढ़ जाती है, तो इसका नकारात्मक असर स्कैल्प और बालों की जड़ों पर पड़ता है और बालों की प्राकृतिक रंग बनाने की प्रक्रिया बाधित होने लगती है।
इसके अलावा शरीर के धातुओं (टिशू), विशेष तौर पर खून, अस्थि (हड्डियां) और मज्जा (नर्वस सिस्टम) से संबंधित धातु के कमजोर होने पर बालों तक सही तरीके से पोषण नहीं पहुंच पाता है। क्रोनिक स्ट्रेस, केमिकल बेस्ड प्रोडक्ट्स का ज्यादा इस्तेमाल, नींद की कमी और पाचन संबंधी समस्याएं इस प्रक्रिया को और भी तेज कर देती हैं।
क्या सफेद बालों को फिर से काला किया जा सकता है?
आयुर्वेद के अनुसार, शुरुआती चरणों, विशेष रूप से 35 से 40 वर्ष से कम आयु के लोगों में अगर सफेद बालों का कारण तनाव या पोषक तत्वों की कमी से जुड़ा हो तो उपयुक्त कदम उठाते हुए इनके बढ़ने की गति को धीमा किया जा सकता है। वहीं कुछ मामलों में नए उगने वाले बालों का रंग भी वापस लाया जा सकता है।
अंदरूनी पोषण पर दें ध्यान, आंवला-ब्राह्मी जैसी औषधियों का करें सेवन
आयुर्वेद इस बात पर जोर देता है कि बालों के रंग को स्वस्थ बनाए रखने के लिए शरीर को अंदर से पोषण व मजबूती देना आवश्यक है। इसके लिए कुछ औषधीय गुणों वाली जड़ी-बूटियों को लेना शुरू किया जा सकता है।
- आंवला- बालों के रंग से लेकर स्कैल्प को स्वस्थ रखने में आंवला बेहद असरदार माना जाता है। ऐसा इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट गुणों के कारण संभव होता है।
- भृंगराज- इसे बालों का राजा कहा जाता है। ये न सिर्फ जड़ों से मजबूती देता है, बल्कि पित्त दोष को संतुलित करते हुए बालों को समय से पहले सफेद होने से रोकने में भी मददगार साबित होता है।
- ब्राह्मी- ये मन को शांत रखने और तनाव को कम करने में अहम भूमिका निभाती है। इससे तनाव के कारण समय से पहले बालों के सफेद होने की समस्या को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
- भृंगराजासव, च्यवनप्राश और त्रिफला- शरीर के टिशूज को पूर्ण पोषण देने और उन्हें फिर से जीवंत (रिजूवनेट) करने के लिए इन पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधियों के सेवन की सलाह दी जाती है।
इन सभी का सेवन किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से परामर्श लेकर करने की सलाह दी जाती है, ताकि इनकी मात्रा व समय अवधि को व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति के अनुसार निर्धारित किया जा सके।
आहार में हों ये चीजें: औषधीय गुणों वाली जड़ी-बूटियों के अतिरिक्त ताजे फल विशेष तौर पर खट्टे फलों, हरी पत्तेदार सब्जियां, अंकुरित अनाज, काले तिल आदि को आहार में शामिल करने की सलाह दी जाती है। ये पित्त दोष को संतुलित करने में सहायक होते हैं। वहीं बालों को मजबूती देने के लिए प्रोटीन से भरे खाद्य पदार्थों को लेने का सुझाव दिया जाता है।
जीवनशैली में लाएं अंतर, आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों का लें सहारा
- समय से पहले बालों के सफेद होने में खराब जीवनशैली की अहम भूमिका होती है। लगातार तनाव की स्थिति में रहना, अनियमित या कम नींद होना और अत्यधिक गर्मी के संपर्क में आना पित्त को बढ़ा सकता है। इससे बालों की एजिंग और तेज हो जाती है।
- प्राणायाम (विशेष रूप से नाड़ी शोधन और भ्रामरी) व हल्के योगासन नर्वस सिस्टम को शांत और तनाव से जुड़ी जटिलताओं को कम करने में मददगार साबित होते हैं।
- सोने का एक नियमित समय बनाए रखना (आदर्श रूप से 11 बजे से पहले) भी शरीर को किसी भी प्रकार के डैमेज से बेहतर तरीके से रिकवर होने में सहायता देता है।
क्या न करें: स्कैल्प और बालों को अधिक नुकसान से बचाने के लिए हीटिंग स्टाइलिंग टूल्स, डाई, हार्श केमिकल बेस्ड प्रोडक्ट और बिना प्रोटेक्शन के धूप में लंबे समय तक रहने से बचना भी जरूरी है।
जीवनशैली में लाएं अंतर, आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों का लें सहारा
- समय से पहले बालों के सफेद होने में खराब जीवनशैली की अहम भूमिका होती है। लगातार तनाव की स्थिति में रहना, अनियमित या कम नींद होना और अत्यधिक गर्मी के संपर्क में आना पित्त को बढ़ा सकता है। इससे बालों की एजिंग और तेज हो जाती है।
- प्राणायाम (विशेष रूप से नाड़ी शोधन और भ्रामरी) व हल्के योगासन नर्वस सिस्टम को शांत और तनाव से जुड़ी जटिलताओं को कम करने में मददगार साबित होते हैं।
- सोने का एक नियमित समय बनाए रखना (आदर्श रूप से 11 बजे से पहले) भी शरीर को किसी भी प्रकार के डैमेज से बेहतर तरीके से रिकवर होने में सहायता देता है।
क्या न करें: स्कैल्प और बालों को अधिक नुकसान से बचाने के लिए हीटिंग स्टाइलिंग टूल्स, डाई, हार्श केमिकल बेस्ड प्रोडक्ट और बिना प्रोटेक्शन के धूप में लंबे समय तक रहने से बचना भी जरूरी है।













































