सरकार ने शहर की बसों को लेकर बड़ा फैसला किया है। अक्टूबर 2026 से बनने वाली सभी इंट्रा-सिटी बसें लो-फ्लोर होंगी। इनका फर्श जमीन से केवल 400 मिलीमीटर ऊंचा होगा। इससे बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों को बस में चढ़ने-उतरने में आसानी होगी। यह नियम 9 मीटर या उससे ज्यादा लंबी बसों पर लागू होगा।
सरकार ने शहर के अंदर चलने वाली सार्वजनिक बसों को लेकर एक बड़ा फैसला किया है। अक्टूबर 2026 के बाद बनने वाली सभी इंट्रा-सिटी यानी शहर के अंदर चलने वाली बसें लो-फ्लोर (Low-floor) होंगी। इनका फर्श जमीन से केवल 400 मिलीमीटर (mm) ऊंचा होगा, जिससे यात्रियों के लिए बस में चढ़ना और उतरना बहुत आसान हो जाएगा। इससे करोड़ों यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी, खासकर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को।
यह बदलाव विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगजनों के लिए किया गया है, जिन्हें वर्तमान बसों की ऊंची सीढ़ियां चढ़ने और संकरी जगहों में चलने में काफी परेशानी होती है। यह नियम उन सभी नई बसों पर लागू होगा जिनकी लंबाई 9 मीटर या उससे ज्यादा है। इससे लोगों को बसों की ऊंची सीढ़ियों से छुटकारा मिल जाएगा।
नियम कब से लागू होंगे?
सरकार ने इस बदलाव के लिए एक समय-सीमा तय की है। सरकार द्वारा जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के मुताबिक 1 अप्रैल 2026 से बसों के सभी नए मॉडलों के लिए यह नियम अनिवार्य होगा। यानी कि ये सारी बसें नए नियम के अनुसान बनेंगी। इसके अलावा 1 अक्टूबर 2026 से पहले से बन रहे मौजूदा मॉडल्स के लिए भी लो-फ्लोर डिजाइन अनिवार्य हो जाएगा। इसका मतलब है कि बसों के सभी पुराने (मौजूदा) मॉडलों को भी इसी डिजाइन में बनाना होगा। 9 मीटर से उससे ज्यादा लंबी बसें इसके दायरे में आएंगी।
क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
अभी देश के कई शहरों में हाई-फ्लोर या सेमी लो-फ्लोर बसें चलती हैं क्योंकि उन्हें बनाना सस्ता पड़ता है। लेकिन इससे यात्रियों को चढ़ने-उतरने में काफी असुविधा होती है। इनमें चढ़ना बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों (PWD) के लिए बहुत मुश्किल और थकाऊ होता है। लो-फ्लोर बसें आने से यह समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि बस बनाने वाली कंपनियां पहले से ही ऐसी बसें तैयार कर रही हैं, इसलिए इस नए नियम को लागू करने में कोई बड़ी समस्या नहीं आएगी। साथ ही इसके लिए जरूरी सुविधाएं भी मौजूद हैं।
सुरक्षा और सुविधा भी बढ़ेगी
इन बसों को AIS-216 मानकों के तहत बनाया जाएगा। यह एक तरह का सुरक्षा मानक है जो यह तय करता है कि बस की बॉडी कैसे डिजाइन और टेस्ट की जानी चाहिए। इन नियमों के पालन से शहर की बसें पहले से ज्यादा सुरक्षित होंगी और उनके चलने की क्षमता भी बेहतर होगी। वर्तमान बसों में अक्सर तंग रास्ते, खराब हैंडहोल्ड (पकड़ने वाली जगह) और बैठने की कम जगह जैसी समस्याएं होती हैं। नए AIS-216 मानकों के आने से बसों का डिजाइन एक जैसा और बेहतर होगा, बस के अंदर चलने-फिरने के लिए ज़्यादा जगह मिलेगी। साथ ही आपातकालीन स्थिति में बस से बाहर निकलना आसान और सुरक्षित होगा।












































