भिवानी के पांचों मुक्केबाजों ने शनिवार को ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों के फाइनल मुकाबलों में पांच स्वर्ण पदक जीतकर मिनी क्यूबा कहलाए जाने वाले भिवानी की धरती पर इतिहास रच दिया। साक्षी चौधरी, जैस्मिन लंबोरिया, प्रीति पंवार, प्रिया घनघस और सचिन सिवाच ने अपने-अपने प्रतिद्वंद्वियों को शिकस्त देकर सोने पर सुहागा कर दिया। यह पहला मौका है, जब जिले की चार बेटियों ने एक साथ राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता। पांचों खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक देशवासियों को निराश नहीं होने दिया।
साक्षी के जीतते ही खुशी से उछल पड़े परिजन धनाना की बेटी साक्षी का फाइनल मुकाबला देखने के लिए गांव में बड़ी स्क्रीन लगाई गई। पिता मनोज कुमार ने कहा कि बेटी ने एकतरफा मुकाबला जीतकर सबको खुश कर दिया।
मां ने कहा, इस तै तगड़ी खुशी का दिन कै होवैगा जी… बेटी देश के लिए गोल्ड लेकर आई है। बेटी के घर आने पर उसे चूरमा और खीर बनाकर खिलाऊंगी जो उसे बेहद पसंद है। कोच द्रोणाचार्य अवार्डी जगदीश सिंह और भिवानी बॉक्सिंग क्लब के प्रधान कमल सिंह ने कहा कि किसान परिवार से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक का सफर तय करना गर्व की बात है।
बड़ेसरा की बेटी प्रीति पंवार के फाइनल मैच जीतते ही परिजनों और मैच देख रहे खेल प्रेमियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। पिता सोमबीर ने कहा कि बेटी की सफलता के पीछे उसकी कड़ी मेहनत है। मुक्केबाजी में कई बार चोट भी लग जाती है। मां-बाप भी घबरा जाते हैं और चोट के डर से बच्चों को इस खेल में भेजने से बचते हैं। मैं कहूंगा कि ऐसा नहीं करना चाहिए। बेटी पिछली बार ओलंपिक में पदक से चूक गई थी। इसके बाद उसने शानदार वापसी करते हुए विश्व और एशियाई चैंपियनशिप में पदक जीते। कोच व चाचा विनोद पंवार ने कहा कि प्रीति को मुक्केबाजी के अलावा पेंटिंग का भी शौक है। मां शलीन ने बताया कि बेटी के आने का इंतजार है। उसे अपने हाथों का बना चूरमा और खीर खिलाऊंगी।
सचिन सिवाच के गोल्ड मेडल जीतते ही टीवी पर मुकाबला देख रहे परिजन खुशी से नाच उठे। सचिन की मां सुमन और पिता अनिल सिवाच ने कहा कि बेटे का बचपन से ही मुक्केबाजी की ओर रुझान था और उसने गांव से ही अभ्यास शुरू कर दिया था।














































