बायो गैस नीति का मसौदा तैयार: हरियाणा सरकार देगी वित्तीय सहायता, 30 साल के लीज पर मिलेगी जमीन

Parmod Kumar

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हरियाणा सरकार ने कंप्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा कंप्रेस्ड बायोगैस नीति-2026 का मसौदा तैयार किया है। प्रस्तावित नीति के तहत सीबीजी संयंत्र स्थापित करने वाली कंपनियों, उद्यमियों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), सहकारी समितियों, डेयरियों, गोशालाओं और अन्य पात्र निवेशकों को कई प्रकार की वित्तीय और प्रशासनिक सुविधाएं देने का प्रस्ताव है।

इनमें 30 वर्ष की लीज पर पंचायत भूमि, प्रति परियोजना अधिकतम 40 करोड़ रुपये तक की पूंजी सहायता (अनुदान), 20 वर्ष तक बिजली शुल्क की प्रतिपूर्ति, पहले पांच वर्षों तक दो रुपये प्रति यूनिट बिजली सहायता, कर व शुल्कों में छूट व भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) से राहत शामिल हैं। फिलहाल नीति अधिसूचना जारी होने के बाद लागू होगी।
इस नीति का उद्देश्य पराली, गोबर, नगर निकायों के जैविक कचरे, चीनी मिलों के प्रेसमड, गन्ने के अवशेष और नेपियर घास जैसी सामग्री से कंप्रेस्ड बायोगैस का उत्पादन बढ़ाना है। इससे निजी निवेश आकर्षित होगा, किसानों को अतिरिक्त आय मिलेगी, पराली जलाने की समस्या कम होगी और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा। इसका लाभ केवल नई सीबीजी परियोजनाओं को मिलेगा व केंद्र या राज्य सरकार से स्वीकृत तकनीक वाले संयंत्र ही पात्र होंगे।

यदि किसी कंपनी, एफपीओ, सहकारी समिति या अन्य पात्र संस्था के पास संयंत्र लगाने के लिए पर्याप्त भूमि नहीं है तो पंचायती विभाग के भूमि बैंक से उसे कम से कम 30 वर्ष की लीज पर पंचायती भूमि उपलब्ध कराई जा सकेगी। इससे निवेशकों को जमीन खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और परियोजना शुरू करना आसान होगा।

संयंत्र स्थापित करने में आने वाले खर्च को कम करने के लिए सरकार पूंजी सहायता (कैपिटल सब्सिडी) देगी। यह लोन नहीं होगा और न ही इसे वापस करना होगा। परियोजना की क्षमता के अनुसार प्रति टन प्रतिदिन उत्पादन पर सहायता तय होगी लेकिन एक परियोजना को अधिकतम 40 करोड़ रुपये तक का अनुदान मिलेगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी निवेशक के सीबीजी संयंत्र लगाने में 120 करोड़ रुपये खर्च होते हैं और वह अधिकतम सहायता का पात्र बनता है तो सरकार 40 करोड़ रुपये तक का अनुदान दे सकती है। शेष राशि निवेशक को खुद या बैंक ऋण के माध्यम से जुटानी होगी।

सीबीजी संयंत्र चलाने में बिजली की बड़ी खपत को देखते हुए सरकार संयंत्र संचालकों की ओर से जमा किए गए बिजली शुल्क की 20 वर्ष तक प्रतिपूर्ति करेगी। इसके अलावा संयंत्र के संचालन के शुरुआती पांच वर्षों तक प्रति यूनिट दो रुपये की बिजली सहायता भी दी जाएगी।