फरीदाबाद : हरियाणा सरकार ने फरीदाबाद के पुलिस उपायुक्त (एनआईटी) के पद पर कार्यरत भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी मकसूद अहमद का तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया। आधिकारिक आदेशों के अनुसार, उन्हें पंचकूला पुलिस मुख्यालय में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पद पर तैनात किया गया है। उनका तबादला फरीदाबाद के सूरजकुंड मेला मैदान में झूले के टूटकर गिरने की घटना के तुरंत बाद हुआ है। इस घटना में बचाव कार्य के दौरान ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस निरीक्षक की मौत हो गई और 12 अन्य घायल हो गए। इस घटना के संबंध में रविवार को दो लोगों को गिरफ्तार किया गया।
विपक्ष ने इस त्रासदी के लिए सरकार की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया। मकसूद अहमद 2016 बैच के IPS अधिकारी हैं। वह हरियाणा कैडर में सेवारत हैं। मकसूद अहमद फरीदाबाद के डीसीपी थे और सूरजकुंड कांड के बाद उनका ट्रांसफर कर दिया गया
मेव समुदाय के पहले आईपीएस
मक़सूद अहमद जब 2016 में आईपीएस बने थे तो उनकी हरियाणा में खूब चर्चा हुई। क्योंकि वह मेव समुदाय से आने वाले पहले आईपीएस अफसर हैं। मकसूद अहमद मेवात के किशनगढ़ बास क़स्बे के इस्माइलपुर गांव के रहनेवाले हैं।
आईपीएस के साथ कवि भी हैं मकसूद
मकसूद अहमद एक आईपीएस होने के साथ ही एक कवि भी हैं। उन्होंने कुछ समय पहले एक किताब गुजर भी लिखी है। उनकी छंद और गजल पर शानदार पकड़ है। मकसूद अहमद हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं में लिखते हैं। बचपन से ही मकसूद को लिखने का शौक था। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि बचपन में जब सारे बच्चे फ्री टाइम में खेलते थे तो वह शायरी,गजल या कविता लिखने बैठ जाते थे।
हिंदू और ऊर्दू में लिखते हैं मकसूद अहमद
आईपीएस मकसूद ने तू औरत है नाम की एक और कविता लिखी है। जिसमें उन्होंने एक औरत को लक्ष्मी, काली, सरस्वती, भवानी बताते हुए महिला की प्रशंसा में पंक्तियां लिखी हैं। वह कहते हैं कि मेहनत ही सफलता का मूलमंत्र है। सफलता पाने के लिए कोई शार्टकट काम नहीं करता। वह युवाओं को नशे से दूर रहने की सलाह देते हैं।
मकसूद अहमद मूल रूप से नूंह मेवात के रहने वाले हैं। वह एक शिक्षित मुस्लिम परिवार से हैं। उनके पिता शिफाद खान एक बैंक में मैनेजर की पोस्ट से रिटायर्ड हैं। मकसूद की पत्नी का नाम वाजिदा अहमद है।
केंद्रीय विद्यालय से पढ़ाई
मकसूद अहमद ने 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई अलवर केंद्रीय विद्यालय से की। इंटरमीडिएड के बाद उन्होंने 2005 में अलवर के आइईटी कॉलेज से इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग की। इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने आइआइएमटी गाजियाबाद से एमबीए किया। उसके बाद पांच वर्षों तक नौकरी की। नौकरी के दौरान मकसूद अहमद की शादी 2010 में वाहिदा से हो गई। वाहिदा को जब पता चला कि मकसूद का सपना आईपीएस बनने का था तो उन्होंने अपने पति को प्रेरित करना शुरू किया।
तीसरी बार में बने आईपीएस
आखिरकार मकसूद ने 2013 में नौकरी छोड़ दी और यूपीएससी की तैयारी करने लगे। पहली बार में उन्होंने प्री और मेन पास कर लिया लेकिन इंटरव्यू में फेल हो गए। उसके बाद 2014 में दूसरी बार परीक्षा दी और इस दौरान आइआरटीएस रेलवे में नौकरी मिल गई लेकिन उन्होंने सपने को हर हाल में पूरा करने की ठानी। 2015 में तीसरी बार फिर कोशिश की और उन्हें 611 रैंक मिला। ओबीसी कैटेगरी में उनका चयन आईपीएस में हो गया।
ऐसे शुरू हुआ आईपीएस का सफर
मकसूद अहमद को हरियाणा कैडर मिल गया। ट्रेनिंग के बाद उनकी पहली पोस्टिंग रोहतक सदर थाने में थाना प्रभारी के तौर पर हुई। कुछ महीने के बाद उन्हें एएसपी रोहतक बनाया गया। यहां से नारनौल का अतिरिक्त एसपी बनाया गया। 2020 में बल्लभगढ़ डीसीपी बने और फिर यहां से गुरुग्राम ईस्ट का डीसीपी पद पर पोस्टिंग दी गई। यहां से वह कैथल एसपी बने और आगे का सिलसिला यूंही चलने लगा।














































