इन कुलपतियों में गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय (जीजेयू) हिसार के कुलपति प्रो. नरसी राम, दीनबंधु छोटू राम विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीसीआरयूएसटी) मुरथल के प्रो. प्रकाश सिंह, श्री कृष्ण आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय (एसकेएयू) कुरुक्षेत्र के प्रो. करतार सिंह धीमान और महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) रोहतक पूर्व वीसी प्रो. राजबीर सिंह हैं।
इन चारों के खिलाफ सरकार को कई शिकायतें मिली थीं। इसके बाद मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने जांच के लिए एसएंडएसीबी के डीजपी डॉ. अर्शिंदर सिंह चावला को फाइल भेजी दी। उनको एक तय समयसीमा में जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए है। आरोप सही पाए जाने पर विजिलेंस तत्काल मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी भी कर सकती है। चावला ने बताया कि चारों विश्वविद्यालयों में भ्रष्टाचार संबंधित शिकायत आई है। अभी वरिष्ठ स्तर पर अधिकारियों की तरफ से जांच की जा रही है, जल्द ही आगे की जानकारी देंगे।
ये हैं आरोप
डीयूआरयूएसटी मुरथल : प्रोफेसर प्रकाश सिंह
विद्यार्थी कोष के लगभग 50 करोड़ रुपये में हेराफेर किए जाने का आरोप है। आरोप है कि इस राशि को सरकारी बैंक के बजाय निजी बैंक में कम ब्याज दर पर फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) के रूप में रखा गया, जिससे विश्वविद्यालय को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।
जीजेयू हिसार, प्रो. नरसी राम
नॉन-टीचिंग स्टाफ की भर्ती में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरतने का आरोप है। इन आरोपों को लेकर वीसी ने कहा कि उनके कार्यकाल में अब तक नॉन टीचिंग स्टाफ की भर्ती नहीं की गई है और न इस तरह का मामला उनके सामने आया है। कब और किस वीसी के कार्यकाल में ऐसा हुआ, इसकी जानकारी उनको नहीं है।
एसकेएयू, प्रो करतार सिंह धीमान
आरक्षण नियमों और भर्ती रोस्टर का उल्लंघन करने के आरोप हैं। उन्होंने कहा कि आरोप बेबुनियाद हैं और किसने लगाए, यह भी कोई पता नहीं है। उनके पास कोई शिकायत व सवाल भी नहीं आया है। किसी भी प्रकार की कोई अनियमितता आरक्षण रोस्टर में भर्ती के दौरान नहीं की गई। समाज कल्याण विभाग से संबंध कर रोस्टर बनवाया गया और सरकार के नियमानुसार ही भर्ती की गई। एक एसोसिएट प्रोफेसर व 36 सहायक प्रोफेसर पदों पर भर्ती निकाली गई थी जिनमें 23 योग्य अभ्यर्थी मिले थे और उन्हें पूरे नियमों के अनुसार ही प्रक्रिया कर मार्च में ज्वाइन भी करवा दिया गया। बाकी पदों के लिए फिर से भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
एमडीयू रोहतक, पूर्व कुलपति राजबीर सिंह
विश्वविद्यालय परिसर के लिए 20 हजार पौधों की खरीद में वित्तीय हेराफेरी और नियुक्तियों में अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल करने के आरोप हैं।










































