यहां कांग्रेस और भाजपा ने आठ-आठ बार लहराया जीत का परचम पढ़ें इस सीट का चुनावी इतिहास

Parmod Kumar

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वर्ष 1967 में यहां से एक बार फिर जनसंघ के प्रत्याशी बृज भूषण लाल ने जीत दर्ज की। वर्ष 1977 में भारतीय लोक दल के राम मूर्ति सांसद बने। वर्ष 1980 में जनता पार्टी के टिकट पर मिसर यार खान सांसद बने। बीते तीन दशक में सपा-बसपा ने भी उम्मीदवार उतारे पर जीत नसीब नहीं हुई।

बरेली लोकसभा सीट वर्ष 1952 में चार भागों में विभाजित थी। नैनीताल, अल्मोड़ा जिले को मिलाकर बरेली दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र से सीडी पांडे, बरेली दक्षिण से सतीश चंद्रा, पीलीभीत-बरेली पूर्व से मुकुंद लाल अग्रवाल, रामपुर-बरेली पश्चिम से अबुल कलाम आजाद विजेता बने थे। यह सभी उम्मीदवार कांग्रेस पार्टी के थे। उस दौरान कांग्रेस पार्टी का ही दबदबा था। वर्ष 1984 में भी कांग्रेस से आबिदा परवीन सांसद चुनी गई थीं।

वर्ष 1989 में भारतीय जनता पार्टी से पहली बार संतोष गंगवार विजेता बने। इसके बाद वर्ष 1991, 1996, 1998, 1999, 2004 तक संतोष काबिज रहे। वर्ष 2009 में कांग्रेस के प्रवीण सिंह ऐरन ने संतोष से यह सीट झटक ली थी। वर्ष 2014 और 2019 में भाजपा के टिकट पर संतोष ने फिर से जीत का परचम लहराया था।
अबकी बार लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और सपा गठबंधन की ओर से सपा ने प्रवीण सिंह ऐरन को प्रत्याशी घोषित किया है। काफी असमंजस के बाद भाजपा ने भी अपना रुख साफ करते हुए पूर्व मंत्री छत्रपाल गंगवार को उम्मीदवार बनाया है। बहुजन समाज पार्टी ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। आंवला संसदीय सीट से भाजपा ने धर्मेंद्र कश्यप, सपा ने नीरज मौर्य, बसपा ने आबिद अली को प्रत्याशी बनाया है।