मोटरसाइकल या स्कूटर चलाते समय सेफ्टी का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। बाइक में जो सेफ्टी फीचर्स होते हैं, उनसे तो मदद मिलती ही है, साथ ही राइडिंग गियर्स भी काफी हेल्पफुल होते हैं। इन सबके बीच एक बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है और वो है रियर व्यू मिरर को सही तरीके से सेट करना। राइडर को पीछे से आ रही गाड़ियों का सही व्यू मिले और ब्लाइंड स्पॉट का सही समय पर पता चले तो फिर हादसों को यथासंभव टाला जा सकता है। गलत तरीके से सेट किए गए मिरर से ब्लाइंड स्पॉट बढ़ जाता है। ऐसे में आज हम आपको मोटरसाइकिल में रियर व्यू मिरर सेट करने के सबसे सही और प्रभावी तरीके बताने जा रहे हैं।
ये बातें गांठ बांध लें
बाइक में रियर व्यू मिरर सेट करने का सबसे सही तरीका यह है कि आप बाइक पर उसी सीधी मुद्रा में बैठें, जिस मुद्रा में आप असल में बाइक चलाते हैं। सबसे पहले मिरर को थोड़ा अंदर की ओर घुमाएं। ऐसा तब तक करें, जब तक आपको शीशे के अंदरूनी किनारे में अपनी कोहनी या कंधे का थोड़ा सा हिस्सा दिखाई न देने लगे। इस पोजीशन का मकसद यह पक्का करना है कि आप अपने शरीर के आसपास के एरिया को कवर कर रहे हैं। इसके बाद मिरर को धीरे-धीरे बाहर की ओर घुमाना शुरू करें। आप मिरर को तब तक बाहर की ओर घुमाते रहें, जब तक कि आपकी कोहनी या कंधे का वह छोटा सा हिस्सा शीशे से पूरी तरह गायब न हो जाए। इससे होगा कि आपकी मोटरसाइकल के ठीक बगल में और पीछे की लेन मिरर में सही तरीके से दिखने लगेगी।
फायदे भी जान लें
मोटरसाइकल में रियर व्यू मिरर की सही सेटिंग के कई फायदे हैं। पहला तो इससे ब्लाइंड स्पॉट काफी कम हो जाता है। जब कोई वाहन आपको ओवरटेक करता है, तो वह आपके रियर व्यू मिरर से गायब होने से ठीक पहले आपके पेरिफेरल विजन में दिखना शुरू हो जाता है। दूसरा फायदा यह है कि आपको पीछे की दोनों लेन का एक वाइडर व्यू मिल जाता है और इससे लेन बदलते समय आपकी सुरक्षा काफी बढ़ जाती है।
कुछ बातों का रखें खास खयाल
आपको बता दें कि बाइक या स्कूटर के रियर व्यू मिरर सेट करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। कभी भी झुककर या उठकर मिरर सेट न करें। आप सीट पर बैठकर ही मिरर की पोजिशनिंग सेट करें। इसके अलावा समय-समय पर मिरर देखते रहें कि पीछे का सटीक व्यू मिल रहा है कि नहीं। मिरर को अक्सर देखते भी रहें कि ये ढीले तो नहीं हैं नहीं। इन सभी बातों के बीच ये भी ध्यान रखें कि आप बाइक को टर्न पर मोड़ते समय टर्न इंडिकेटर ऑन करें और जरूरत पड़ने पर स्पीड कम कर आपके आसपास के हालातों का मुआयना भी कर लें।














































