बाजार में सब्जियों के नहीं मिल रहें सही दाम तो सरकार देगी पैसा, जानें क्या है भावंतर भरपाई योजना

parmodkumar

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भावान्तर भरपाई योजना बागवानी उत्पादकों यानी सब्जी उगाने वाले किसानों को उनकी मेहनत का उचित दाम दिलाने के लिए शुरू की गई एक सरकारी योजना है। किसान अपनी फसल को बाजार में बेचते हैं, लेकिन वहां उन्हें उम्मीद से बहुत कम दाम मिलते हैं। ऐसे में उनकी मेहनत और लागत दोनों पर असर पड़ता है और वे घाटे में चले जाते हैं।

इस स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने यह भावान्तर भरपाई योजना शुरू की। ताकि जब बाजार में फसलों के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम हों, तो किसानों को उस अंतर की भरपाई की जा सके। इस तरह यह योजना किसानों को आर्थिक सुरक्षा देती है और उनकी आमदनी को स्थिर बनाए रखती है।

क्या है भावांतर भरपाई योजना
यह योजना हरियाणा सरकार की एक खास पहल है। जिसमें बागबानी उत्पादकों को अपनी उपज के लिए बाजार में कम कीमत मिलने पर मुआवजा दिया जाता है। यह सहायता बाजार से प्रभावित बागबानी उत्पादकों को आर्थिक स्थिरता देती है। जिससे किसान को फसल में विविधता के लिए बढ़ावा मिलता है। योजना के तहत 21 फसलों के लिए मुआवजा दिया जाएगा।

भावान्तर भरपाई योजना का उद्देश्य
भावान्तर भरपाई योजना हरियाणा सरकार के बागवानी विभाग द्वारा लागू की गई है। इस योजना का उद्देश्य बागवानी करने वाले किसानों को बाजार में फसल के दामों में उतार-चढ़ाव से बचाना है। अगर किसानों को अपनी उपज के लिए बाजार में कम दाम मिलते हैं, तो सरकार उन्हें नुकसान की भरपाई करती है।

किसानों को बाजार में सब्जियों और फलों के कम दाम मिलने पर आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए सुरक्षित मूल्य सुनिश्चित करना।
बागवानी करने वाले किसानों को समर्थन देकर कृषि में विविधता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना।
भावान्तर भरपाई योजना में शामिल फसलें
भरपाई योजना में 21 फसलें शामिल फसलें हैं।
भिंडी, मिर्च, लौकी, करेला, पत्ता गोभी, मूली, टमाटर, प्याज, आलू, फूलगोभी, गाजर, मटर, शिमला मिर्च, बैंगन, हल्दी, लहसुन, आम, किन्नू, अमरूद, लीची, आलूबुखारा

भावान्तर भरपाई योजना के लाभ
सब्जी उगाने वाले किसानों को आर्थिक जोखिम से मुक्त करना
योजना में शामिल फसलों के लिए सुरक्षित मूल्य तय करना
यदि किसानों ने फलों या सब्जियों को तय समय में बाजार में कम दाम पर बेचा, तब इस स्थिति में सुरक्षित मूल्य और बाजार मूल्य के बीच का अंतर सरकार द्वारा पंजीकृत किसानों को भरा जाएगा
नोट: भुगतान की राशि सीधे किसान के आधार कार्ड से जुड़े बैंक खाते में भेजी जाएगी।

भावान्तर भरपाई योजना की पात्रता
आवेदक हरियाणा में जमीन का मालिक, पट्टेदार या किरायेदार किसान होना चाहिए
आवेदक योजना में शामिल 21 फसलों में से किसी एक की खेती करता हो
नोट 1: बुआई के समय मेरी फसल, मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है।
नोट 2: जमीन और फसल की जानकारी बागवानी विभाग द्वारा प्रमाणित होनी चाहिए।

भावान्तर भरपाई योजना की आवेदन प्रक्रिया
Step 1: किसान को बुआई के समय मेरी फसल, मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा। योजना का लाभ लेने के लिए यह अनिवार्य है।
Step 2: होमपेज पर “किसान पंजीकरण” लिंक पर क्लिक करें।
Step 3: दिशानिर्देश पढ़ें और “पंजीकरण के लिए आगे बढ़ें” पर क्लिक करें।
Step 4: सभी आवश्यक विवरण सही-सही भरकर फॉर्म पूरा करें।
Step 5: विवरण सत्यापित करने के बाद “पंजीकरण के लिए सबमिट करें” पर क्लिक करें। सफल पंजीकरण के बाद किसान को पोर्टल में लॉगिन के लिए यूजरनेम और पासवर्ड मिलेगा।

नोट
उत्पादक के लिए पंजीकरण नि:शुल्क है।
पंजीकरण केवल निर्धारित अवधि में ही खुलेगा।
पंजीकरण सुविधा सर्व सेवा केंद्र, ई-दिशा केंद्र, मार्केटिंग बोर्ड, बागवानी विभाग, कृषि विभाग और इंटरनेट कियोस्क पर उपलब्ध होगी।

क्लेम करना और स्थिति जांचना
ई-खरीद पोर्टल में लॉगिन करें: ई-खरीद लॉगिन पेज पर जाएं, अपना यूजरनेम, पासवर्ड और कैप्चा कोड दर्ज करें।
डैशबोर्ड तक पहुंचें: लॉगिन करने के बाद किसान अपने दावे यानी क्लेम कर सकते हैं और आवेदन या शिकायत की स्थिति देख सकते हैं।

J-फॉर्म – बिक्री वाउचर
योजना के तहत प्रोत्साहन पाने के लिए
प्रोत्साहन पाने के लिए जे-फार्म पर बिक्री करना जरूरी होगा।
जे-फार्म पर बिक्री होने के बाद बिक्री का विवरण BBY ई-पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इसकी सुविधा हर संबंधित मार्केट कमेटी के कार्यालय में उपलब्ध होगी।
बिक्री के समय अगर फसल का थोक मूल्य संरक्षित मूल्य से कम होता है, तो किसान भाव के अंतर की भरपाई पाने के योग्य होगा।
जे-फार्म पर की गई बिक्री और प्रति एकड़ निर्धारित उत्पादन में से जो भी कम होगा, उसी के अनुसार प्रोत्साहन दिया जाएगा।
भाव के अंतर को गुणा करके प्रोत्साहन राशि तय की जाएगी।
औसत दैनिक थोक मूल्य मंडी बोर्ड द्वारा चुनी गई मंडियों के दैनिक भाव के आधार पर योजना के मानक और दिशा निर्देशों के अनुसार तय किया जाएगा।

भावान्तर भरपाई योजना की जरूरी कागज
पहचान प्रमाण पत्र जैसे आधार कार्ड
जमीन का मालिकाना प्रमाण या पट्टे का कागज (किरायेदार किसानों के लिए)
मेरी फसल, मेरा ब्यौरा पोर्टल का पंजीकरण प्रमाण
उपज की बिक्री के लिए जे-फार्म
आधार से जुड़ा बैंक खाता विवरण
यदि आवश्यक हो तो अन्य कोई कागज

भावान्तर भरपाई योजना से जुड़े अन्य सवाल (FAQs)
भावान्तर भरपाई योजना क्या है?
यह योजना किसानों को बाजार में फसल के कम दाम मिलने पर नुकसान की भरपाई देने के लिए हरियाणा सरकार द्वारा लागू की गई है।
भावान्तर भरपाई योजना के लिए कौन-कौन पात्र है?
हरियाणा में जमीन का मालिक, पट्टेदार या किरायेदार किसान, जो सूचीबद्ध 21 फसलों में से किसी एक की खेती करता हो और मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर रजिस्टर्ड हो।
भावान्तर भरपाई योजना में कौन-कौन सी फसलें शामिल हैं?
भिंडी, मिर्च, लौकी, करेला, पत्ता गोभी, मूली, टमाटर, प्याज, आलू, फूलगोभी, गाजर, मटर, शिमला मिर्च, बैंगन, हल्दी, लहसुन, आम, किन्नू, अमरूद, लीची और आलूबुखारा।
भावान्तर भरपाई योजना का लाभ कैसे मिलेगा?
किसान को जे-फार्म पर फसल बेचनी होगी और बिक्री विवरण BBY ई-पोर्टल पर अपलोड करना होगा। सरकार अंतर की राशि सीधे आधार लिंक्ड बैंक खाते में भेजती है।
प्रोत्साहन का पैसा कैसे तय होगा?
प्रोत्साहन राशि बाजार मूल्य और संरक्षित मूल्य के अंतर और प्रति एकड़ उत्पादन के आधार पर तय होती है।
भावान्तर भरपाई योजना के जरूरी कागज क्या हैं?
आधार कार्ड, जमीन का प्रमाण या पट्टा, पंजीकरण प्रमाण, जे-फार्म, बैंक खाता विवरण और यदि जरूरी हो तो अन्य कागज।