हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी:किसी आरोपी के पास स्थायी घर न होना जमानत से इनकार करने का आधार नहीं, ये अन्याय

parmodkumar

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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जमानत कानून को लेकर एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी आरोपी के पास स्थायी घर न होना जमानत से इनकार करने का आधार नहीं बन सकता। कोर्ट ने कहा कि आज के दौर में महंगाई और आसमान छूती प्रॉपर्टी दरों के चलते बहुत से लोग स्थायी मकान नहीं खरीद पाते और किराये का घर लेना भी आसान नहीं रह गया है। ऐसे में केवल स्थायी पते के अभाव में जमानत न देना न्याय के साथ अन्याय होगा।

कोर्ट ने कहा, जब किसी व्यक्ति पर आरोप लगते हैं तो सिर्फ इस आधार पर जमानत से इनकार करना कि उसके पास स्थायी निवास नहीं है, न्यायिक चूक होगी। जमानत का मकसद आरोपी की स्वतंत्रता की रक्षा करना और मुकदमे की सुनवाई के दौरान उसकी मौजूदगी सुनिश्चित करना है न कि उसकी आर्थिक स्थिति को दंडित करना। मामला गुरुग्राम में पिछले साल दर्ज एक धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात केस से जुड़ा था।

राज्य और शिकायतकर्ता ने आरोपी की जमानत का विरोध किया था और दलील दी थी कि उसके पास कोई स्थायी ठिकाना नहीं है जिससे उसके फरार होने का जोखिम है। कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि आज बड़ी आबादी मकान नहीं खरीद सकती और किराये पर रहना भी मुश्किल है। कोर्ट ने कहा कि स्थायी पता होने से भी गारंटी नहीं मिलती कि आरोपी फरार नहीं होगा।

बेंच ने स्पष्ट किया कि देश में साधु-संत या आश्रमों में रहने वाले लोग भी स्थायी मकान न होते हुए कानूनी कार्रवाई का सामना करते रहे हैं। ऐसे में निवास का न होना न्यायिक जवाबदेही से छूट का आधार नहीं हो सकता। जमानत मंजूर करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि जमानत का उद्देश्य केवल मुकदमे की सुनवाई में आरोपी की हाजिरी सुनिश्चित करना नहीं है, बल्कि एकतरफा और अभी अप्रमाणित आरोपों के आधार पर उसकी स्वतंत्रता छीनने से बचाना भी है। कोर्ट ने साफ कहा, क्या जमानत देने के लिए स्थायी घर या पता अनिवार्य शर्त है? यह अदालत जमानत के उद्देश्यों को इतना संकीर्ण रूप में नहीं देखती।