Indigestion Treatment: खाने के बाद उबकाई-डकार, अफारा होना नहीं है सही, कौन-सी 7 आयुर्वेदिक चीज देंगी आराम?

parmodkumar

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मैं मरीजों की अपच की समस्या के पीछे अक्सर भारी भोजन, अनियमित वक्त पर खाना, तनाव या डाइट में मौसमी बदलाव जैसे कारण देखती हूं। इसकी वजह से डकार-उबकाई आना, पेट दर्द, पेट में गैस बनना, अफारा आदि लक्षण दिखने आम हैं। मगर ध्यान रखें कि खाना खाने के बाद हमेशा इन तकलीफों का सामना करना ठीक नहीं है। पेट की इन तकलीफों से छुटकारा पाने के लिए आयुर्वेद में अजवाइन, हींग, त्रिफला चूर्ण, सौंफ जैसे 7 देसी उपायों को फायदेमंद बताया गया है।

आयुर्वेद में अपच के बारे में क्या बताया गया है?
आयुर्वेद में अपच को अजीर्ण कहा जाता है, जो अग्नि में गड़बड़ी से विकसित होती है। खाने को पोषण में बदलने वाली डायजेस्टिव और मेटाबॉलिक फायर को अग्नि कहा जाता है। जब यह अग्नि कमजोर या अनियमित हो जाती है तो आम नामक एक टॉक्सिक बाय-प्रोडक्ट बनता है और यह शरीर में जमा होने के बाद शारीरिक कार्यों में बाधा पैदा करता है।
आयुर्वेद के अनुसार अपच के लक्षण

पेट फूलना (ब्लोटिंग), पेट में तकलीफ होना, जी मिचलाना, उबकाई-खट्टी डकार आना, खाने के बाद भारीपन होना अपच के आम लक्षण हैं। लेकिन आयुर्वेद में अपच के इसके अलावा भी कई सारे लक्षण बताए गए हैं, जो शरीर के प्रमुख दोष पर आधारित होते हैं। अगर इन लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए तो क्रॉनिक कब्ज, एसिड रिफ्लक्स या फंक्शनल बॉवल डिसऑर्डर विकसित हो सकते हैं।

प्रधान दोष लक्षण
वात प्रधान अपच पेट दर्द, पेट में गैस, थकान
पित्त प्रधान अपच जलन का एहसास, एसिडिटी, प्यास लगना, चक्कर आना
कफ प्रधान अपच जी मिचलाना, ज्यादा राल बनना, शरीर में भारीपन का एहसास होना

अपच से छुटकारा देने वाले आयुर्वेदिक उपाय
अपच से छुटकारा पाने के लिए आयुर्वेद उन प्राकृतिक उपायों को आजमाने की सलाह देता है, जो अग्नि बढ़ाने, आम घटाने और पाचन तंत्र का कार्य सुधारने में मदद करते हैं।

1. अदरक

आयुर्वेद में अदरक को डायजेस्टिव सिस्टम के लिए काफी बढ़िया माना जाता है। सूखे अदरक (सोंठ) से कमजोर पाचन को बढ़ावा मिलता है और डायजेस्टिव एंजाइम का उत्पादन भी बढ़ता है। यह गैस्ट्रिक मोटिलिटी को सुधारकर ब्लोटिंग और भारीपन को कम करता है और वात व कफ को संतुलित करने में मदद करता है। खाने के बाद अदरक का गुनगुना काढ़ा पीने से खाने का ब्रेकडाउन और डायजेशन तेज होता है। इसके अलावा, खाने से पहले सादे नमक के साथ आधा इंच ताजा अदरक खाने से डायजेस्टिव फायर तेज होती है।

2. अजवाइन

पेट की गैस घटाकर तकलीफ कम करने के लिए अजवाइन काफी बढ़िया मानी जाती है। इसमें गैस्ट्रिक सीक्रेशन बढ़ाने वाले नेचुरल कंपाउंड होते हैं और यह गट मोटिलिटी भी रेगुलेट करती है। खासतौर से, अपच के कारण होने वाली गैस और पेट की तकलीफ में अजवाइन काफी असरदार मानी जाती है। पेट की इन समस्याओं को कम करने के लिए थोड़ी सी अजवाइन को चबाने या गुनगुने पानी के साथ सेवन करने पर राहत मिलती है।

3. हींग

डायजेस्टिव ट्रैक्ट में वात संतुलित करने के लिए हींग का उपयोग काफी फायदेमंद है। इसमें इंफ्लामेशन, अफारा और पेट दर्द कम करने वाले नेचुरल कंपाउंड होते हैं। यह भारी खाने के बाद आम बनने से भी रोकता है। आप गुनगुने पानी में हल्की सी चुटकी हींग डालकर सेवन कर सकते हैं या फिर खाना बनाने के दौरान इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा, अपच होने पर नाभि के आसपास पानी और हींग का पेस्ट लगाने से भी फायदा मिलता है।

4. त्रिफला चूर्ण
त्रिफला एक आयुर्वेदिक चूर्ण है, जिसे सूखा आंवला, हरीतकी (हरड़) और बिभितकी (बहेड़ा) को बराबर मात्रा में मिलाकर बनाया जाता है। त्रिफला से तीनों दोषों को संतुलित करके बॉवल मूवमेंट को रेगुलर करने और पेट की सफाई को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। यह पोषण के इस्तेमाल को भी बेहतर बनाता है और पेट के हेल्दी बैक्टीरिया को सपोर्ट करता है। रात में त्रिफला चूर्ण की थोड़ी सी मात्रा का सेवन करके डायजेस्टिव सिस्टम को हेल्दी रख सकते हैं।

5. सौंफ

भोजन के बाद सौंफ चबाने से डायजेस्टिव मसल्स को रिलैक्स करने और ब्लोटिंग घटाने में मदद मिलती है। अगर आपको अपच के साथ जलन या एसिडिटी हो रही है तो ऐसी स्थिति में सौंफ काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। चबाने के अलावा आप इसकी हर्बल टी बनाकर भी पी सकते हैं। यह पाचन को सुधारने और डायजेस्टिव ट्रैक्ट को शांत करने में मदद करती है। क्रॉनिक एसिडिटी या ब्लोटिंग में आप रातभर भीगी सौंफ को सुबह खाली पेट खाकर राहत पा सकते हैं।

6. जीरा

पाचन तंत्र के लिए जीरा भी काफी स्वास्थ्यवर्धक है। यह पाचक अग्नि को बढ़ावा देता है, आम को तोड़ने में मदद करता है और गट मोटिलिटी सुधारता है। जीरे को पानी में उबालकर गुनगुना ही पीने से डायजेशन तेज होता है और भोजन लेने के बाद पेट में होने वाला भारीपन भी कम होता है।

7. आंवला

आंवला के अंदर ठंडक देने और रिजुवेनेट करने वाले गुण होते हैं। यह पाचन को बेहतर बनाकर अतिरिक्त पित्त को संतुलित करता है और एसिडिटी घटाता है। इसके अंदर एंटीऑक्सीडेंट्स की भरमार होती है और इसका नियमित सेवन करने पर डायजेस्टिव हेल्थ को मजबूती मिलती है।

इन आयुर्वेदिक उपायों से पेट की हल्की तकलीफों से राहत मिलती है। लेकिन अगर आपको गंभीर लक्षण परेशान कर रहे हैं या तकलीफ काफी लंबे समय से बनी हुई है तो डॉक्टर को दिखाकर सही परामर्श लेना जरूरी है। हेल्दी लाइफस्टाइल की छोटी-छोटी आदतों को अपनाकर डायजेशन को सही रख सकते हैं। पाचक अग्नि को बेहतर बनाने और अपच का खतरा कम करने के लिए खाने का रेगुलर टाइम, बैलेंस्ड डाइट, माइंडफुल ईटिंग, पर्याप्त नींद और रेगुलर फिजीकल एक्टिविटी जैसी आदतों पर ध्यान देना चाहिए।