विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर शहर के एक युवक को म्यांमार बुलाने और कई दिनों तक बंधक बनाकर साइबर ठगी कराने का मामला सामने आया है। ठगों के चंगुल से बचकर किसी तरह वह स्वदेश लौटा और पुलिस से शिकायत की। साइबर थाना सेंट्रल पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित युवक ने नौकरी के लिए अपना बायोडॉटा अलग अलग साइटों पर डाला था। वहीं से ठगों ने युवक से संपर्क किया और थाईलैंड की एक कंपनी में 80 हजार रुपए महीने की सैलरी देने का झांसा देकर बुलाया था। ठग ने यूएसए के नंबर से वाट्सएप कॉल करके युवक से संपर्क किया था। म्यांमार पहुंचने पर एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही एक कार चालक ने उसे पिक किया। जब उससे पूछताछ करनी चाही तो उसने पिस्टल के बल पर युवक को शांत करा दिया। युवक कई दिनों तक थाईलैंड आर्मी के कब्जे में भी रहा। काफी प्रयास के बाद उसे इंडियन अंबेसी को सौंपा गया। उसके बाद पीड़ित युवक अपने घर लौट पाया।
बीकॉम पास है पीड़ित युवक
ग्रेटर फरीदाबाद के सेक्टर 78 निवासी युवक ने पुलिस काे दी शिकायत में बताया कि उसने बीकॉम की पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी के लिए कई अलग अलग साइटों पर अपना बायोडॉटा डाला हुआ था। जुलाई 2025 में एक यूएसए के नम्बर से वाट्सएप नंबर पर पर मैसेज आया। मैसेज करने वाले ने बेसिक जानकारी ली और पूछा कि आपके पास पासपोर्ट है या नहीं। उन्होंने थाईलैंड में किसी प्राईवेट कम्पनी में अकाउंटेंट की नौकरी के लिए 80,000 रूपए प्रति महीने वेतन दिलाने का झांसा दिया। उसने कहा कि आपको अराइवल वीजा पर यहां आना होगा। यह वीजा 02 महीने के लिए वैध होगा। आपके आने के बाद कंपनी इसे अराइवल वीजा को वर्क वीजा में बदलवा देगी।
एयर टिकट बनाकर भेजा
पीड़ित ने पुलिस को बताया कि उसने फोन करने वाले को पैसे न होने की बात कही तो फोन करने वाले ने कहा कि आपकी एयर टिकट बनवा देता हूं। 9 अगस्त 2025 को उसी नम्बर से दिल्ली से बैंकाक की टिकट भेज दी। युवक 12 अगस्त को बॉय एयर बैंकाक पहुंच गया। उसके बाद मैसेज करने वाले को जानकारी दी। फिर उसने कॉल करके कहा कि एयरपोर्ट के बाहर गेट न. 4 पर एक गाड़ी खड़ी है। उस में बैठ जाओ। युवक एयरपोर्ट से बाहर निकला और बताई हुई गाड़ी में बैठ गया। कुछ दूर चलने के बाद ड्राइवर ने बोला कि हम 2 घन्टे बाद होटल पहुंच जायेंगे। 2 घन्टे बाद गाड़ी खाने के लिए एक होटल में रूकी।]
आर्मी की रेड पड़ने पर पकड़े गए
युवक ने बताया कि गैंग के लोग उनसे डेटिंग एप से अमेरिका के लोगों की बेसिक डिटेल नोट पैड पर लिखकर चाईनीज लोगों को दे देते थे। उसके बाद उस डिटेल का इस्तेमाल करके वो लोग उन लोगों को निवेश का झांसा देकर साइबर फ्राड करते थे। उसने बताया कि अक्टूबर महीने में म्यांमार आर्मी की रेड पड़ी तो चाईनीज लोग वहां से भाग गये। मैं करीब 20 दिन म्यांमार आर्मी कैम्प में रहा। उसके बाद थाईलैण्ड इमीग्रेशन विभाग हमें वापस थाईलैंड लेकर गए। उसके बाद भारत सरकार ने हमें रेस्कयू किया। 18 नवंबर 2025 को हमें वापस स्वदेश लाया गया। साइबर सेंट्रल प्रभारी विमल कुमार का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है कि लोकल स्तर पर कौन पीड़ित को लेकर गया था। जरूरत पड़ने पर एनआईए व अन्य एजेंसी से मदद ली जाएगी।














































