Mandatory Aadhaar App: संचार साथी के बाद आधार ऐप पर विवाद, क्‍या नए फोन्‍स में पहले से होगा इंस्‍टॉल?

parmodkumar

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भारत सरकार ने स्मार्टफोन बनाने वाली ऐपल, सैमसंग और गूगल जैसी कंपनियों को जनवरी में निजी तौर पर अपने स्मार्टफोन्स में आधार ऐप प्री-इंस्टॉल्ड देने का सुझाव दिया था। हालांकि टेक कंपनियों ने इन सरकारी सलाह का पुरजोर विरोध किया है। ऐसे में सरकार और टेक कंपनियों के बीच सरकारी ऐप्स को पहले से अपने फोन में इंस्टॉल करके देने के मुद्दे पर फिर विवाद गहरा गया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने कंपनियों के पास कुल 6 अनुरोध भेजे थे, जिसमें से आधार वाले अनुरोध को कंपनियों ने अस्वीकार कर दिया। गौर करने वाली बात है कि इससे पहले संचार साथी ऐप को लेकर भी इसी तरह का विवाद हो चुका है।

कंपनियां क्यों नहीं देना चाहती प्री-इंस्टॉल्ड आधार ऐप?
रिपोर्ट के अनुसार, (REF.) जनवरी के महीने में UIDAI ने आईटी मंत्रालय से गूगल, ऐपल और बाकी स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों से नए आधार ऐप को फोन में पहले से इंस्टॉल करके देने के सुझाव पर चर्चा करने के लिए कहा था। यह कोई सीधा आदेश नहीं था, बावजूद इसके कंपनियों ने इसे स्वीकार नहीं किया।

इसे लेकर कंपनियों का कहना है कि फोन में पहले से ऐप डालने से न सिर्फ प्रोडक्शन की लागत बढ़ेगी बल्कि इससे यूजर्स के लिए टेक्निकल समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। इस प्रस्ताव पर खासतौर पर ऐपल और सैमसंग ने सुरक्षा और डेटा सेफ्टी से जुड़े सवालों के चलते गंभीर चिंता जताई है।

UIDAI क्यों फोन में देना चाहता है आधार ऐप?
UIDAI का मानना है कि फोन में पहले से आधार ऐप मिलने से लोगों को आधार की जरूरी सेवाओं तक पहुंचने के लिए अलग से ऐप को डाउनलोड नहीं करना पड़ेगा। वहीं स्मार्टफोन कंपनियों की संस्था MAIT का मानना है कि इससे कोई बड़ा जनहित नहीं होगा। उनका यह भी कहना है कि इसकी वजह से उन्हें भारत से अलग मार्केट्स के लिए अलग प्रोडक्शन लाइनें बनानी पड़ेंगी, जो कि मुश्किल काम है। गौर करने वाली बात है कि फिलहाल रूस के अलावा कोई भी देश फोन में सरकारी ऐप्स के प्री-इंस्टॉलेशन को जरूरी नहीं बनाता।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
जनवरी में लॉन्च हुआ UIDAI का नया आधार ऐप यूजर्स को अपनी प्रोफाइल मैनेज करने और बायोमेट्रिक्स को लॉक करने जैसे फीचर्स देता है। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक एक्सपर्ट्स इस सुझाव के पक्ष में नहीं हैं। इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन के संस्थापक अपार गुप्ता का कहना है कि यह प्रस्ताव स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर शुरुआत से ही सरकारी नियंत्रण की इच्छा को दर्शाता है। हालांकि फिलहाल साफ नहीं है कि फिलहाल सरकार इस प्रस्ताव पर आगे काम करने का सोच रही है या नहीं।