माइग्रेन और मानसिक स्वास्थ्य का कनेक्शन माइग्रेन और डिप्रेशन, दोनों ही ऐसी बीमारी हैं, जिनमें व्यक्ति मानसिक रूप से प्रभावित रहता है। परिवार में माइग्रेन या मानसिक रोग का इतिहास, आसपास का माहौल, सेरोटोनिन की गड़बड़ी और हार्मोनल उतार-चढ़ाव (खासकर एस्ट्रोजन) के कारण माइग्रेन और मानसिक स्वास्थ्य आपस में जुड़ते हैं।
माइग्रेन के कारण लगातार सिरदर्द, नींद न आना, फोकस की कमी और सोशल इवेंट में जाने की इच्छा न होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इसका व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है।
माइग्रेन और मानसिक स्वास्थ्य का कनेक्शन इस तरह समझा जा सकता है। बार-बार सिरदर्द होने से तनाव बढ़ता है। तनाव बढ़ने से एंग्जाइटी और डिप्रेशन बढ़ता है। डिप्रेशन के कारण निराशा बढ़ जाती है, काम में मन नहीं लगता, कॉन्फिडेंस कम हो जाता है। इस स्थिति में माइग्रेन की समस्या और बढ़ जाती है।
माइग्रेन का मानसिक स्वास्थ्य पर असर
माइग्रेन सिर्फ सिरदर्द नहीं, बल्कि एक व्यापक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है जो व्यक्ति की कार्य क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। माइग्रेन का प्रभाव सिर्फ सिरदर्द तक सीमित नहीं रहता, इसका असर इससे कहीं ज्यादा होता है। माइग्रेन के कारण रोगी का मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। माइग्रेन के कारण आत्मविश्वास कम होता है, काम में मन नहीं लगता, अकेलापन महसूस होता है, किसी से मिलने की इच्छा नहीं होती। ये सभी लक्षण मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं।
माइग्रेन और मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने के लक्षण
लगातार तेज सिरदर्द
मतली या उल्टी
कमजोरी या चक्कर आना
रोशनी या आवाज से दिक्कत
हर समय उदास रहना
नकारात्मक सोच का बढ़ना
काम पर फोकस न कर पाना
फैसले लेने में परेशानी
क्रोनिक माइग्रेन क्या है?
माइग्रेन के नॉर्मल केस की तुलना में क्रोनिक माइग्रेन से पीड़ित व्यक्ति की स्थिति जटिल होती है। इसमें व्यक्ति को महीने में 15 या उससे ज्यादा दिनों तक सिरदर्द रहता है। इस दौरान ज्यादातर समय माइग्रेन रहता है। क्रोनिक माइग्रेन बार-बार और लंबे समय तक होने वाला माइग्रेन है। इसका संबंध पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) से भी है। पीटीएसडी एक ऐसी मानसिक समस्या है जो व्यक्ति को किसी डरावनी या दर्दनाक घटना के बाद होती है। क्रोनिक माइग्रेन से पीड़ित व्यक्ति को मानसिक तनाव और डर ज्यादा महसूस हो सकता है।
माइग्रेन और मानसिक स्वास्थ्य सुधारने के तरीके
तनाव से बचें, ये माइग्रेन और मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने का प्रमुख कारण है। हमेशा खुश रहने की कोशिश करें। इसके लिए दोस्तों से मिलें, घूमने जाएं, अपने शौक के लिए समय निकालें और खुद को बिजी रखने की कोशिश करें। इसके साथ ही लाइफस्टाइल बदलकर माइग्रेन और मानसिक स्वास्थ्य को सुधारा जा सकता है। इसके लिए-
हेल्दी डाइट लें
रेगुलर एक्सरसाइज करें
सोने-जागने की आदतें बदलें
योग, मेडिटेशन, ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें
जरूरत हो तो एक्सपर्ट की मदद लें
माइग्रेन और मानसिक स्वास्थ्य का कनेक्शन समझें
हमारे मन की स्थिति का शरीर पर भी असर होता है। मानसिक तनाव बढ़ने से सिरदर्द बढ़ता है और सिरदर्द बढ़ने से मानसिक तनाव बढ़ता है। दोनों ही स्थितियों में तनाव को कम करना जरूरी है। इसके लिए सबसे जरूरी है लाइफस्टाइल में बदलाव करना। हेल्दी डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज, रात में जल्दी सोने और सुबह जल्दी उठने की आदत, योग, मेडिटेशन और ब्रीदिंग एक्सरसाइज से माइग्रेन और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है।









































