‘शुगर डैडी’ पर मां ने बेटी से पूछा सवाल, जवाब ने बदल दिया नजरिया; हर माता-पिता के काम की बात!

parmodkumar

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एक मां ने अपनी बेटी से अचानक पूछ लिया, ‘शुगर डैडी क्या होता है?’ मां का यह सवाल सुनकर बेटी ने उन्हें इस शब्द का मतलब समझाया। मां-बेटी के बीच हुई यह पूरी बातचीत ऐसी है, जिससे कई पेरेंट्स खुद को रिलेट कर पाएंगे। साथ ही, इस बातचीत में पेरेंटिंग से जुड़ी एक अहम सीख भी छिपी है। आइए, जानते हैं क्या है पूरा मामला।

अक्सर पेरेंट्स और बच्चे कुछ विषयों पर खुलकर बात नहीं करते हैं, जिसकी वजह से बच्चे अपने मन में उठने वाले सवाल पेरेंट्स से पूछने में भी झिझकते हैं। वहीं, पेरेंट्स भी कई बार बच्चों को सही-गलत का फर्क समझाने की पहल नहीं कर पाते। लेकिन हाल ही में एक मां-बेटी के बीच हुई बातचीत ने इसकी एक अलग ही तस्वीर सामने रखी। एक मां ने अपनी बेटी से ऐसे शब्द का मतलब पूछा, जिसे लेकर आमतौर पर पेरेंट्स बच्चों से बात करने में हिचक सकते हैं। उन्होंने बेटी से पूछा कि ‘शुगर डैडी’ क्या होता है। मां का सवाल सुनकर बेटी ने इसका मतलब समझाया और उसके बाद दोनों के बीच जो बातचीत हुई, उससे कई पेरेंट्स खुद को रिलेट कर पाएंगे। साथ ही, उन्हें बच्चों की परवरिश से जुड़ी एक अहम बात भी समझ आएगी। आइए जानते हैं, क्या हुआ।

‘शुगर डैडी’ के बारे में बात करके हंस रही थीं लड़कियां

डिजिटल क्रिएटर पावनी अवस्थी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में उनकी मां उनसे पूछती हैं कि ये ‘शुगर डैडी’ क्या होता है? पावनी उनसे पूछती हैं कि आपने कहां सुना है? इस पर उनकी मां बताती हैं कि मेट्रो में दो लड़कियां आपस में यह बात करके आपस में हंस रही थीं। जब उन्होंने मुझे देखा तो थोड़ा झेंप गईं।

बेटी बोली- मतलब समझाऊंगी, लेकिन मारोगी तो नहीं?

इसके बाद पावनी कहती हैं कि आप बताइए, आपको क्या लगता है, इसका क्या मतलब होगा? उनकी मां जवाब देती हैं, ‘मीठा बाप।’ फिर पावनी कहती हैं कि मैं आपको खुलकर बताऊंगी, लेकिन आप चांटा नहीं मारोगी?इसके बाद पावनी उन्हें ‘शुगर डैडी’ का मतलब समझाती हैं।

मां ‘शुगर डैडी’ का मतलब जान हुईं नाराज

पूरी बात सुनने के बाद पावनी की मां कहती हैं कि हर तरह के शब्दों को चाहे जहां मोड़ दो। बाप शब्द भी बदनाम और शुगर शब्द भी बदनाम है। यह सुनकर पावनी हंसने लगती हैं। मां पूछती हैं कि क्यों हंस रही हो? इस पर पावनी समझाती हैं कि मम्मी, उनकी लाइफ है, उन्हें जैसे जीना है, वे जिएं। आप मत कुछ कहो।

पेरेंटिंग से जुड़ी अहम बात आई सामने

पावनी और उनकी मां के बीच होने वाली इस बातचीतयह है कि केवल बच्चों का ही पेरेंट्स से खुलकर बातचीत करना जरूरी नहीं है, बल्कि पेरेंट्स को भी बच्चों से बातचीत की पहल करनी चाहिए। पेरेंट्स और बच्चों के बीच उम्र का अंतर होने की वजह से कई बार दोनों के अनुभव और समझ अलग होती है। पेरेंट्स के लिए भी कई ऐसे विषय होते हैं, जिनके बारे में वे खुद ज्यादा नहीं जानते। ऐसे में वे बच्चों से इन विषयों पर बात कर सकते हैं और उनकी राय या समझ जान सकते हैं।

पेरेंट्स और बच्चों के बीच बेहतर बॉन्ड बनता है

इसकी वजह से बच्चों के लिए अपनी जिज्ञासा, परेशानी या किसी भी विषय से जुड़ी उलझन खुलकर शेयर करना आसान हो जाता है। वहीं, पेरेंट्स को भी यह समझने का मौका मिलता है कि बच्चा किन चीजों के बारे में सोच रहा है और उसे किस तरह की जानकारी या समझ की जरूरत है।