हांसी-बुटाना नहर की सफाई में जुटी हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार

parmodkumar

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चंडीगढ़: हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार ने हांसी-बुटाना नहर की लंबे समय से अटकी सफाई का काम शुरू कर दिया। इस कदम ने एक विवादित अंतर-राज्यीय मुद्दे पर फिर से सबका ध्यान खींच लिया है, जो सालों से पंजाब के पटियाला और संगरूर जिलों के कई गांवों को प्रभावित कर रहा है। हालांकि पंजाब के किसानों ने 2006-07 में जब इस नहर का निर्माण शुरू हुआ था, तब इसका विरोध किया था। मॉनसून से पहले शुरू किया गया यह गाद हटाने का काम सीमावर्ती इलाकों में बार-बार आने वाली बाढ़ और फसलों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के पंजाब में बढ़ते जनसंपर्क के बीच इस कदम के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।

क्या है हांसी-बुटाना नहर?

दरअसल हांसी-बुटाना नहर को भाखड़ा मेन लाइन (BML)-हांसी-बुटाना बहुउद्देशीय लिंक नहर के नाम से भी जाना जाता है। हरियाणा सरकार की ओर से बनाया गया एक बड़ा सिंचाई प्रोजेक्ट है। इसे हरियाणा के पानी की कमी वाले दक्षिणी जिलों को पानी पहुंचाने के लिए बनाया गया है। 2007 से 2010 के बीच बनी और 2014 के आस-पास चालू हुई इस नहर को इस तरह से डिजाइन किया गया था कि यह भाखड़ा नहर प्रणाली से हरियाणा के हिस्से का पानी हिसार और भिवानी जैसे सूखे इलाकों तक पहुंचा सके।

कहां पर है यह नहर?

यह नहर लगभग 109-110 किलोमीटर लंबी है और पंजाब-हरियाणा सीमा पर बीएमएल(भाखड़ा मुख्य लाइन) के पास से शुरू होती है। यह पंजाब के पटियाला जिले में समाना के करीब स्थित है। वहां से यह अंतर-राज्यीय सीमा के साथ-साथ चलती है और फिर हरियाणा के अंदरूनी हिस्सों में प्रवेश करती है। जहां यह उन इलाकों को पानी पहुंचाती है जहां सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं हैं। इसका मुख्य मकसद पानी के बंटवारे को बेहतर बनाना, भूजल पर निर्भरता कम करना और हरियाणा के सूखे इलाकों में खेती-बाड़ी को बढ़ावा देना है।

पंजाब के लिए क्यों है चिंता का विषय?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, हरियाणा का प्रोजेक्ट होने के बावजूद यह नहर लंबे समय से पंजाब के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। अधिकारियों और किसानों ने बार-बार यह मुद्दा उठाया है कि यह नहर घग्गर नदी और उसकी सहायक नदियों के प्राकृतिक बहाव में रुकावट डालती है। इससे सीमावर्ती इलाकों के निचले गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। उत्तरी भारत में 2023 की बाढ़ के दौरान हांसी-बुटाना साइफन में रुकावट ने समाना और आस-पास के इलाकों में हालात और खराब कर दिए। इससे फसलों, संपत्ति और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ।

पंजाब के कौन से इलाके प्रभावित

2025 में भी ऐसी ही समस्याएं फिर से सामने आईं, जब कई गांवों में जलभराव और डूबने की खबरें आईं। पंजाब सिंचाई विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, सासी ब्राह्मण, सासी गुर्जरान, धर्महेड़ी, हाशिमपुर, भगवानपुर और सासी तेह जैसे गांवों को अक्सर इन हालात का खामियाजा भुगतना पड़ा है। पटियाला जिला प्रशासन के अधिकारियों ने पहले ही यह बात कही थी कि यह नहर पानी के प्राकृतिक बहाव में रुकावट डालती है और पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में डूबने का बड़ा खतरा पैदा करती है। क्योंकि इसे राज्यों की सीमा के साथ-साथ बिना जरूरी मंजूरी के बनाया गया था।

नहर की सफाई जरूरी क्यों?

नहर की सफाई बहुत जरूरी है। क्योंकि गाद जमा होने से इसके साइफनों की क्षमता काफी कम हो गई है। जो ज्यादातर घग्गर नदी के पानी की वजह से होती है। इसमें करीब 48 साइफन सेक्शन हैं। हर सेक्शन को असल में करीब 1.6 लाख क्यूसेक पानी संभालने के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि गाद जमा होने की वजह से इनकी क्षमता लगभग आधी रह गई है।

क्या होता है नुकसान?

जब नहर की नियमित रूप से सफाई नहीं होती, तो पानी का बहाव रुक जाता है। इससे पानी ओवरफ़्लो होकर पंजाब के आस-पास के इलाकों में रिसने लगता है। इससे खेती की जमीन में जलभराव हो जाता है। फसलें खराब हो जाती हैं और मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है। किसानों का कहना है कि इस समस्या की वजह से हर साल मॉनसून के दौरान सैकड़ों एकड़ जमीन प्रभावित होती है। पानी के ज्यादा रिसने से जमीन के नीचे के पानी का स्तर भी बढ़ जाता है। इससे मिट्टी में खारापन आ जाता है और खेती को लंबे समय तक नुकसान होता है। किसानों ने चेतावनी दी है कि जब तक साइफनों की सफाई करके उनकी क्षमता वापस नहीं लाई जाती, तब तक हर मॉनसून में 150 से ज्यादा गांवों पर बाढ़ का खतरा बना रहेगा।

हरियाणा सरकार के लिए क्या बोले पंजाब के किसान?

पंजाब के पटियाला जिले में इस मुद्दे को लेकर समाना और सनौर विधानसभा क्षेत्रों में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। सितंबर 2025 में कई गांवों के किसानों ने धर्महेड़ी गांव में कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन किया और इस मामले में तुरंत कार्रवाई करने की मांग की। किसान नेता जतिंदर सिंह ने कहा था कि वह नहर उसके कई साइफन गाद से भर गए हैं। जो कि अभी घग्गर नदी के ऊपर से बहती है। जब तक इन्हें साफ करके पानी का बहाव नहीं बढ़ाया जाता, तब तक हर मॉनसून में 150 से ज्यादा गांवों पर खतरा बना रहेगा। हम हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के आभारी हैं कि उन्होंने मॉनसून से पहले ही सफाई का काम शुरू करवा दिया।

किसान संगठनों की क्या है मांग?

किसान संगठनों ने यह भी मांग की है कि या तो साइफन की क्षमता बढ़ाई जाए, या फिर प्राकृतिक जल निकासी को बहाल करने के लिए नहर का रास्ता बदलकर उसे घग्गर नदी के नीचे से गुजारा जाए। पिछले कुछ सालों में इस आंदोलन ने कई राजनीतिक नेताओं का ध्यान खींचा है। किसानों के प्रतिनिधिमंडल पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों के अधिकारियों से मिलकर इस समस्या के समाधान के लिए दबाव बनाते रहे हैं।

हरियाणा सरकार के कदम का राजनीतिक पहलू क्या?

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने X पर एक पोस्ट में सफाई के काम की शुरुआत की घोषणा कीद। उन्होंने लिखा कि आस-पास के गांवों के किसानों को बार-बार बाढ़ और फसलों के नुकसान का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन मॉनसून से पहले सफाई का काम शुरू करके हरियाणा सरकार ने यह साफ कर दिया है कि किसानों का कल्याण सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक पक्का वादा है। पटियाला की पूर्व सांसद और बीजेपी नेता परनीत कौर ने भी इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि केंद्र और हरियाणा सरकार के साथ लगातार बातचीत के बाद किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांग आखिरकार पूरी हो गई है।

पंजाब विधानसभा चुनाव पर असर डालेगा ये कदम?

उधर, सरकार के इस कदम से राजनीतिक चर्चाएं भी छेड़ गई हैं। क्योंकि सैनी पंजाब के कई दौरे कर रहे हैं और सार्वजनिक कार्यक्रमों व जनसंपर्क अभियानों में हिस्सा ले रहे हैं। चूंकि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव होने हैं। इसको देखते हुए पंजाब के किसानों पर सीधा असर डालने वाले इस मुद्दे को उठाने के फैसले को राजनीतिक विशेषज्ञ राज्य की सीमाओं से बाहर भी अपनी साख बनाने की एक कोशिश के तौर पर देख रहे हैं।