न मैदान बचा, न कोच: 26 गांवों के खिलाड़ियों का सहारा बना स्टेडियम खस्ताहाल!

parmodkumar

0
1

जाखल। खेल विभाग की अनदेखी के चलते गांव नत्थूवाल में करीब 18 वर्ष पहले बना खंड स्तरीय खेल स्टेडियम बदहाली का शिकार हो चुका है। आसपास के 26 गांवों की खेल प्रतिभाओं के लिए बना यह स्टेडियम आज सुविधाओं के अभाव में उपयोगहीन बना हुआ है।

वर्ष 2008 में सरकार ने खिलाड़ियों के लिए 6 एकड़ भूमि में यह स्टेडियम विकसित किया था लेकिन आज तक यहां कोई बड़ी खेल प्रतियोगिता आयोजित नहीं की गई। स्टेडियम में न तो कोच की तैनाती है और न ही बुनियादी खेल सुविधाएं उपलब्ध हैं।

स्थिति यह है कि खेल मैदान से लेकर दर्शक दीर्घा तक जगह-जगह खरपतवार उगी हुई है। शौचालय और अन्य कमरे भी जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं। लंबे समय से खिलाड़ी सुविधाओं और सुधार की मांग कर रहे हैं लेकिन स्टेडियम की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सुविधाओं के अभाव में खंड स्तरीय स्टेडियम केवल नाम का रह गया है जिससे आसपास के गांवों के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। संवाद

मवेशियों की चारागाह बना स्टेडियम

जाखल। गांव नत्थूवाल स्थित खंड स्तरीय खेल स्टेडियम बदहाली के चलते मवेशियों की चारागाह बन चुका है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह स्थिति खेल विभाग और सरकार की उदासीनता को उजागर करती है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों की खेल प्रतिभाएं प्रभावित हो रही हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार सुविधाओं के अभाव में खिलाड़ियों के सपने प्रभावित हो रहे हैं। यहां न पेयजल की उचित व्यवस्था है न ही शौचालय की हालत दुरुस्त है। कोच की तैनाती न होने से प्रशिक्षण भी प्रभावित हो रहा है।

खिलाड़ियों का मनोबल टूट रहा

क्षेत्र के कई खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं लेकिन मौजूदा हालात में उन्हें अभ्यास के लिए दूसरे जिलों का रुख करना पड़ रहा है। सेना और पुलिस भर्ती की तैयारी करने वाले युवाओं को भी ट्रैक की खराब स्थिति के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों की चिंता, नशे की ओर न बढ़ें युवा

नत्थूवाल गांव में स्थित खेल स्टेडियम खेलने योग्य नहीं है। रखरखाव के अभाव में यहां झाड़ियां उग चुकी हैं। स्टेडियम में पेयजल, शौचालय, पर्याप्त रोशनी व कोच की भी कमी है। समाजसेवी डॉ. राजेश शर्मा, जगसीर सिंह, हरप्रीत सिंह, आशु सिंगला, राज कुमार ने बताया कि इस मामले को लेकर सरकार किसी भी तरह से गंभीर नहीं दिख रही है। उनका कहना है कि अगर खिलाड़ियों को खेल से दूर रखा जाएगा तो वह नशे की ओर बढ़ सकता है।

——–
कई बार उच्चाधिकारियों को खेल स्टेडियम की दशा के बारे में अवगत कराया जा चुका है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पंचायत की तरफ से कई बार सूचना दी जा चुकी है। अगर स्टेडियम की हालत सुधरे तो खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन कर सकेंगे। – गुरमेल सिंह, सरपंच नत्थूवाल