नहीं मिली एम्बुलेंस, पत्नी के शव को ठेले पर घर लेकर गए पति और 8 साल का बेटा, रूह कंपा देगी हरियाणा की यह खबर

parmodkumar

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फरीदाबाद: मध्य प्रदेश की घटना अभी आप भूले नहीं होंगे, जहां एक पति अपनी बीमार पत्नी को ठेले से अस्पताल लेकर जा रहा था। पत्नी की रास्ते में ही मौत हो गई। अब हरियाणा के फरीदाबाद जिले में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की एक और संवेदनशील तस्वीर सामने आई है। जहां बीके अस्पताल में टीबी का इलाज करा रही महिला की मौत के बाद उसके पति और बेटे को शव ले जाने के लिए कोई सरकारी वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया। मजबूर होकर पति और बेटा को महिला का शव ठेले पर रखकर ही ले जाना पड़ा।

टीबी से पीड़ित थी पत्नी
मृतका के पति गुनगुन ने बताया कि उनकी पत्नी पिछले तीन महीनों से पीड़ित थी। इलाक बीके अस्पताल में चल रहा था। तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर दिल्ली के सफदरगंज और एम्स रेफर किया गया, फिर बीके बीके में लाए। यहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। शव को ले जाने के लिए कोई एंबुलेंस नहीं मिली। काफी देर तक अस्पताल परिसर में भटकने के बाद जब कोई मदद नहीं मिली तो मजबूरी में अपने ठेने पर पत्नी का शव रखकर घर जाने का फैसला किया। इस दौरान उसका 8 साल का बेटे भी मां के शव के साथ रहा।
रेडक्रॉस की ओर से ‘हर्ष वैन’ की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है, जो मॉर्चरी के पास रहती है। इसके लिए अस्पताल परिसर में बने कंट्रोल रूम से संपर्क करना होता है। निजी एंबुलेंस द्वारा वसूली की जानकारी उन्हें नहीं हैं।

अंतिम संस्कार के लिए लेना पड़ेगा कर्ज
पूरे रस्ते पतिन लोगों से मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन कोई आगे नहीं आया। सवाल उठता है कि अस्पताल से महज 7 किमी दूर सारण गांव तक शव पहुंचाने के लिए भी सरकारी शव वाहन नहीं मिल सका। गुनगुन मूल रूप से बिहार का रहने वाला है और वर्तमान में सारण गांव में किराए पर रहता है। उसने बताया कि अब अंतिम संस्कार के लिए भी उसको कर्ज लेना पड़ेगा। वहीं इस मामले पर डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि रेडक्रॉस की ओर से ‘हर्ष वैन’ की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है, जो मॉर्चरी के पास रहती है। इसके लिए अस्पताल परिसर में बने कंट्रोल रूम से संपर्क करना होता है। निजी एंबुलेंस द्वारा वसूली की जानकारी उन्हें नहीं हैं।