बल्लेबाज-गेंदबाज नहीं, इनके कारण हारी टीम इंडिया, 10,000 टेस्ट रन बनाने वाले बल्लेबाज ने बताए असली विलेन!

parmodkumar

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विराट कोहली के 108 गेंद में 124 रन के जबरदस्त प्रयास के बावजूद टीम इंडिया रविवार को न्यूजीलैंड से तीसरा वनडे 41 रन से हार गई। इसके साथ ही न्यूजीलैंड ने भारत को उसके घर में पहली बार वनडे सीरीज में हराया है।
इंदौर में न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज के तीसरे वनडे मैच में 41 रन की हार सालों तक भारतीय क्रिकेट फैंस को कचोटती रहेगी। यह हार विराट कोहली के रिकॉर्ड 54वें वनडे शतक के बावजूद मिली है, जिन्होंने 108 गेंद में 124 रन की जबरदस्त पारी खेलकर टीम को जीत दिलाने की पूरी कोशिश की। न्यूजीलैंड ने इस जीत के साथ ही भारतीय धरती पर पहली बार वनडे सीरीज जीतने का भी रिकॉर्ड बनाया है। इस हार के बाद हर कोई बल्लेबाजों और गेंदबाजों के प्रदर्शन को विलेन के तौर पर गिना रहा है। लेकिन टेस्ट क्रिकेट में सबसे पहली बार 10,000 रन का आंकड़ा छूने वाले महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने हार के असली विलेन बताए हैं।

पूर्व भारतीय कप्तान गावस्कर ने एकतरफ विराट कोहली की तारीफ की है, वहीं टीम के युवा क्रिकेटरों को उनके आलस और मैदान पर धीमी गति के लिए जमकर कोसा है। गावस्कर ने न्यूजीलैंड के पूर्व क्रिकेटर साइमन डुल के साथ मैच के बाद बातचीत में साफ कहा है कि शुभमन गिल की टीम की हार का सबसे बड़ा कारण मैदान पर अटैकिंग अप्रोच की कमी है।
‘फील्डरों के कारण बॉलर प्रयोग नहीं कर पाए’
गावस्कर ने कहा है कि मैच में हार ना बल्लेबाजों के कारण मिली है और ना ही गेंदबाज जिम्मेदार हैं। इसके लिए न्यूजीलैंड की पारी के दौरान मिडिल ओवरों में ढीली और लापरवाह फील्डिंग असली विलेन रही है। गावस्कर ने भारतीय फील्डरों के ढीलेपन को गेंदबाजों की असफलता के लिए जिम्मेदार बताया है। उन्होंने कहा कि गेंदबाज मिडिल ओवरों में न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों को सेट होने से रोकने के लिए गेंद में कोई प्रयोग नहीं कर पाए, क्योंकि फील्डर उन्हें 1-1 रन लेकर स्ट्राइक बदलने से नहीं रोक पा रहे थे।

‘गेंदबाज प्रेशर बना रहे थे, फील्डर उसे हटा रहे थे’
गावस्कर ने बताया कि किस तरह टीम इंडिया अपनी शुरुआती ओवरों की पोजीशन का लाभ उठाने में नाकाम रही, जब जल्दी-जल्दी विकेट गिए गए थे। टीम इंडिया ने डेरिल मिचेल और ग्लेन फिलिप्स जैसे बल्लेबाजों को बिना कोई खतरा उठाए पिच पर सेटल होने का मौका दिया और इसके लिए जिम्मेदार फील्डर ही थे। उन्होंने कहा,’जिस फॉर्मेट में गेम का मोमेंटम यानी तेजी ही सबकुछ होती है, वहां भारतीय फील्डरों ने आसान सिंगल्स देकर गेंदबाजों की तरफ से बनाए जा रहे दबाव को पूरी तरह खत्म कर दिया।’

युवाओं की फिटनेस और प्रतिबद्धता पर उठाया सवाल
गावस्कर ने एकतरफ रोहित शर्मा और विराट कोहली की फिटनेस के लिए तारीफ की, वहीं टीम के युवा खिलाड़ियों की इस मामले में प्रतिबद्धता को लेकर सवाल उठाया है। गावस्कर की तरफ से फील्डिंग पर उठाया गया सवाल इस कारण बेहद अहम है, क्योंकि टीम इंडिया के गेंदबाजों ने न्यूजीलैंड को इंदौर वनडे में शुरुआत में जल्दी झटके दिए थे। न्यूजीलैंड ने महज 5 रन पर 2 विकेट और 58 रन पर 3 विकेट खो दिए थे। उस समय 12 ओवर हो चुके थे यानी दबाव पूरी तरह न्यूजीलैंड पर बन चुका था, लेकिन उसके बाद मिचेल और फिलिप्स को महज 176 गेंद में 200 रन की पार्टनरशिप करने का मौका दिया गया। यहीं पर मैच टीम इंडिया के हाथों से निकल गया था।