टैक्सी, ऑटो और बाइक के लिए ऐप बेस्ड सर्विस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। हालांकि, इस सेक्टर में कई ऐसी चुनौतियां देखने को मिल रही हैं, जो कि निश्चित तौर पर अच्छी खबर नहीं हैं। एक तरफ राइडर्स की शिकायतें बढ़ रही हैं, दूसरी तरफ ड्राइवर भी संतुष्ट नहीं दिखते। ऐसे में कैब एग्रिगेटर ग्राहकों और ड्राइवरों को खुश रखने के लिए रैपिडो के को-फाउंडर पवन गुंटुपल्ली क्या कुछ कर रहे हैं, इस पर हमने उसने विस्तार से बातें की हैं और सवाल-जवाब के माध्यम से आप भी जानें।
सवाल: ड्राइवर को जोड़े रखना एक बड़ा मुद्दा बन चुका है, क्योंकि हाल ही में ड्राइवरों ने हड़ताल की थी और उनका कहना था कि कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं, जबकि उन्हें गरीबी में धकेला जा रहा है। इस धारणा के मुकाबले के लिए आपकी क्या अलग रणनीति होगी?
जवाब: Rapido पर काम करने वाले बहुत सारे लोग हड़ताल में शामिल ही नहीं हुए। हमारे ऑपरेशन्स पर किसी तरह का असर नहीं पड़ा। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि रैपिडो ने दो साल पहले एक नया मॉडल शुरू किया था, जिसे हम SaaS मॉडल कहते हैं। इस मॉडल की मुख्य बात यह है कि इसमें कमीशन बिल्कुल जीरो है। ड्राइवरों की सबसे बड़ी शिकायत यही थी। हम अपने ड्राइवरों को ‘कैप्टन’ कहते हैं। पहले क्या होता था कि ग्राहक जो भी किराया देता था, उसका लगभग 20–25% प्लेटफॉर्म अपने पास रख लेता था और बाकी कैप्टन को मिलता था। इससे दो दिक्कतें होती थीं । पहली, पारदर्शिता और भरोसे की कमी। दूसरी, 12–14 घंटे काम करने वाले कैप्टन की कमाई कम से कम 25–30 फीसदी तक घट जाती थी, जिससे उनका गुजारा मुश्किल हो जाता था। इसलिए रैपिडो ने मॉडल पूरा बदल दिया।
हम SaaS मॉडल ले आए, जिसमें रैपिडो सिर्फ ग्राहक की लीड ड्राइवर तक पहुंचाता है और पेमेंट सीधे कैप्टन के पास जाता है। प्लेटफॉर्म एक रुपये का भी हिस्सा नहीं रखता। इसी वजह से ऐसे कई ड्राइवर जो पहले दूसरे प्लेटफॉर्म के चलते ऑनलाइन नहीं आ पा रहे थे, वे आज रैपिडो के साथ हैं। अभी अगर आप देखें तो सिर्फ दिल्ली शहर में ही हम रोज लगभग 8 लाख राइड कर रहे हैं। तुलना करें तो दिल्ली मेट्रो रोज लगभग 65 से 70 लाख लोगों को ले जाती है। इस तरह दिल्ली की कुल यात्रा का 10 फीसदी से ज्यादा रैपिडो कवर करता है।
सवाल: ड्राइवरों द्वारा बार‑बार राइड कैंसिल करना लगातार सबसे बड़ी शिकायत है। कई ड्राइवर खुद यात्री को कैंसिल करने पर मजबूर करते हैं और दंड यात्री पर लगता है। क्या कोई न्यायसंगत व्यवस्था हो सकती है?
जवाब: जो चुनौती है, वह है पिकअप‑ड्रॉप लोकेशन को ठीक से समझना। कई कैप्टन अंग्रेजी में लिखा पता ठीक से पढ़ नहीं पाते या एड्रेस समझ नहीं पाते। इसके लिए हमने दो नई चीजें शुरू की हैं—एक, वॉइस‑आधारित ऑर्डर जानकारी, यानी ऐप खुद आवाज में बताएगा कि ‘पिकअप यहा’, ‘ड्रॉप वहां’। हम इसे हिंदी में भी ला रहे हैं, जिससे उनकी समझ आसान हो जाएगी। हम अपने ऐप को पूरी तरह लोकल बना रहे हैं ताकि कैप्टन को परेशान न होना पड़े।
सवाल:
लेकिन जब रूट ड्राइवर बदलता है तो पेनल्टी यात्री पर क्यों लगती है?
जवाब: सिर्फ एक स्थिति में ऐसा होता है—जब रास्ता बदलने पर टोल लग जाता है। कई बार ग्राहक भी ऐसा रास्ता चुनना चाहता है, जो तेज हो, लेकिन टोल लगता है। ड्राइवर को नुकसान न हो, इसलिए किराये में बदलाव किया जाता है।
सवाल: मंजिल पर पहुंचकर किराया बढ़ा हुआ दिखे तो ड्राइवर की गलती का भुगतान क्यों किया जाए?
जवाब: यह बहुत वास्तविक समस्या है। देखिए, ऑटो‑कैप्टन पहली बार ऑनलाइन आए हैं और यह रैपिडो के मॉडल की वजह से संभव हुआ है। उनसे पूछिए कि वे कब ऑनलाइन आए, क्यों आए—ज्यादातर कहेंगे कि Rapido की वजह से। अब इन ऑटो ड्राइवरों की डिजिटल लिटरेसी कम होती है। उन्हें शहर के रास्ते आते हैं, लेकिन गूगल मैप्स की आदत नहीं होती। इसलिए वे अपने हिसाब से रास्ता लेते हैं। हम उन्हें लगातार सिखा रहे हैं कि ऐप का दिया हुआ रूट फॉलो करें। लेकिन इसमें समय लगता है, यह एक सीखने की प्रक्रिया है। एक तरह से हम डिजिटल लर्निंग में भी योगदान दे रहे हैं, जो सरकार के उद्देश्यों के अनुरूप है।
सवाल: हाल में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कई खबरें आईं। आपने क्या नई पहलें की हैं?
जवाब: हम महिलाओं के लिए दो‑तीन बड़ी पहल कर रहे हैं। पहली, हम एक अलग कैटेगरी ला रहे हैं—Scooty। महिलाओं ने कहा है कि स्कूटी में ड्राइवर और यात्री के बीच थोड़ा ज्यादा गैप होता है और वे उसमें ज्यादा सुरक्षित महसूस करती हैं। यह सेवा हमने हैदराबाद, बेंगलुरु जैसे शहरों में शुरू कर दी है और दिल्ली में भी जल्द आएगी। दूसरी और ज्यादा महत्वपूर्ण चीज, हम महिला यात्रियों की सुरक्षा के साथ‑साथ महिला ड्राइवरों की भागीदारी भी बढ़ाना चाहते हैं। हम रैपिडो पिंक नाम से सेवा ला रहे हैं, यह कुछ शहरों में लाइव है और दिल्ली में भी जल्द होगी। इसमें ड्राइवर भी महिला होंगी और यात्री भी महिला। इससे एक तो महिला यात्री की सुरक्षा बढ़ेगी और दूसरा महिला ड्राइवरों की रोजगार भागीदारी भी।
कई महिलाओं के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होता, ऐसे में हम RTO और ट्रेनिंग संस्थानों के साथ मिलकर उन्हें ट्रेनिंग और लाइसेंस दिलवा रहे हैं। कई के पास अपना वाहन नहीं होता, ऐसे में हम पार्टनर कंपनियों के साथ मिलकर वाहन उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था कर रहे हैं। यह सब इसलिए कि महिलाएं ड्राइविंग कर सकें और अपनी आजीविका कमा सकें। इसके अलावा देर रात की राइड पर हम खुद पहल कर कॉल करते हैं, अगर राइड 10 मिनट से ज्यादा कहीं रुक जाए तो पहले नोटिफिकेशन जाता है, फिर कॉल आती है। रात में राइड खत्म होने पर फिर कॉल करके पूछा जाता है, ‘सब ठीक है?’ हमारा इमरजेंसी सपोर्ट 24×7 उपलब्ध है। हम लगातार निगरानी रखकर यात्री की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
सवाल: एक बहुत महत्वपूर्ण बात कि ज्यादातर बाइक ड्राइवर प्लास्टिक जैसे बेहद घटिया हेलमेट देते हैं। क्या कोई टेक्नॉलजी समाधान हो सकता है?
जवाब: दो तरीके हैं। एक—लॉग‑इन करने से पहले ऐप हेलमेट और चेहरे की स्कैनिंग करता है, ताकि सही हेलमेट हो। लेकिन जैसा कि हम जानते हैं, भारत में लोग बहुत जुगाड़ू हैं, स्कैन के बाद हेलमेट बदल देते हैं। इसलिए दूसरा तरीका है कि हम फीडबैक लेते हैं, यानी राइड के दौरान हम ग्राहक से पूछते हैं—क्या अच्छा हेलमेट दिया गया? अगर कोई ‘नहीं’ कह देता है, तो वह कैप्टन तब तक राइड नहीं कर सकता, जब तक वह सही हेलमेट की तस्वीर दोबारा स्कैन नहीं करवाता। यह बहुत प्रभावी है। इसके अलावा हम दिल्ली और गुड़गांव की ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर हेलमेट वितरण और रोड‑सेफ्टी के अभियान भी चला रहे हैं। यह लंबी प्रक्रिया है, लेकिन हम लगातार कर रहे हैं।
सवाल: क्या हेलमेट में चिप लगाकर समाधान नहीं हो सकता?
जवाब: हम अगर खुद वाहन देते होते, तब चिप संभव था। लेकिन रैपिडो का मॉडल बिल्कुल अलग है। हम दिल्ली जैसी जगह पर, जहां ट्रैफिक और प्रदूषण पहले से ही बहुत ज्यादा है, नए वाहन नहीं जोड़ना चाहते। हम उन लोगों को मंच देते हैं, जिनके पास पहले से वाहन हैं। हमारे प्लेटफॉर्म पर पिछले 10 साल में 20 लाख से ज्यादा कैप्टन जुड़े हैं। सिर्फ दिल्ली में हर महीने लगभग 3–4 लाख एक्टिव कैप्टन होते हैं। ऐसे में हर हेलमेट के लिए चिप लगवाना संभव नहीं है। ऐसे में हम टेक + फीडबैक का तरीका अपनाते हैं और सुधार करते हैं। एक बात तय है कि हमारे प्लेटफॉर्म पर कैप्टन सामान्य बाइक ड्राइवरों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित होते हैं, क्योंकि जैसे ही वह तेज चलता है, ऐप में स्पीड अलर्ट आता है। अगर वह ऐसा करता रहता है तो हम उसे सस्पेंड कर देते हैं, ट्रेनिंग करवाते हैं। यह लगातार सुधार की प्रक्रिया है।
सवाल: केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने नोटिस जारी किया था कि कुछ ऐप फोन मॉडल देखकर अलग किराया लेते हैं। ‘टिप जोड़ें, जल्दी राइड मिलेगी’ जैसे फीचर्स एक तरह का बोली सिस्टम लगते हैं। इस पर आपकी क्या राय है?
जवाब: रैपिडो हमेशा से एक निष्पक्ष और पारदर्शी प्लेटफॉर्म रहा है। हमने कभी फोन मॉडल, बैटरी लेवल, या किसी भी ऐसी चीज के आधार पर अलग किराया नहीं लिया। हम इस तरह की चालें नहीं चलते। हमारे लिए ग्राहक और कैप्टन दोनों की सुरक्षा प्राथमिकता है। उदाहरण के लिए, कई प्लेटफॉर्म पर इंश्योरेंस वैकल्पिक है, लेकिन रैपिडो में हम दोनों, ग्राहक और कैप्टन का इंश्योरेंस अनिवार्य करते हैं और खुद भुगतान करते हैं। हम हर कदम पर न्यायपूर्ण मॉडल अपनाते हैं।
सवाल: SaaS मॉडल में क्या आपने अनिवार्य किया है कि यात्री को ड्राइवर से खुद किराया तय करना होगा और ऐप पर दिखाए गए किराये पर भरोसा नहीं करना चाहिए?
जवाब: बातचीत का विकल्प हमेशा रहता है, लेकिन हमारा मकसद है कि बातचीत की जरूरत कम पड़े। हम लाखों राइड के डेटा और मशीन लर्निंग की मदद से ऐसा किराया सुझाते हैं, जो कैप्टन और कस्टमर, दोनों के लिए सुविधाजनक हो।
सवाल: रिफंड वॉलेट में जाता है, मूल भुगतान तरीके में क्यों नहीं जाता?
जवाब: SaaS मॉडल के अनुसार, हम सीधे मूल भुगतान माध्यम में रिफंड नहीं भेज सकते। लेकिन हम ग्राहक को नुकसान न हो, इसलिए वॉलेट में पैसा देते हैं, जो वह रैपिडो की अन्य सेवाओं में इस्तेमाल कर सके।
सवाल: सर्ज प्राइसिंग इस बिजनेस का मुख्य हिस्सा है, लेकिन अब को-ऑपरेटिव मॉडल और लोकल ऐप उभर रहे हैं, जिनमें सर्जिंग की सीमाएं हैं। आप इससे कैसे निपटेंगे?
जवाब: हमारे लिए सबसे जरूरी बात है—अगर कोई नई चीज कैप्टन और ग्राहक के लिए बेहतर है, तो हम उसे अपनाते हैं। हम बदलाव से नहीं डरते। हम लगातार सीखते रहते हैं। यही हमारी ताकत है।
सवाल: कई यात्री शिकायत नहीं करते, क्योंकि चैटबॉट जटिल लगता है। लोग कहते हैं कि आप ड्राइवरों पर कड़ी कार्रवाई नहीं करते, क्योंकि वे दूसरे प्लेटफॉर्म पर चले जाएंगे। आप इसे कैसे संभालते हैं?
जवाब: हम ड्राइवर‑फर्स्ट हैं, लेकिन गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं करते। कोई भी शिकायत, जैसे कि हेलमेट ना लगाना, बदतमीजी, लापरवाही और तेज चलाने पर तुरंत कार्रवाई होती है। और हम सिर्फ ग्राहक द्वारा लिखी शिकायत नहीं देखते, बल्कि प्रेडिक्टिव मॉडलिंग करते हैं। उदाहरण के लिए, अगर किसी ने कुछ नहीं लिखा, लेकिन दो‑तीन बार 2‑स्टार दे दिया, तो हम उस डेटा को भी शामिल करते हैं। हम 200 से ज्यादा डेटा पॉइंट लेकर विश्लेषण करते हैं और तय करते हैं कि कैप्टन प्लेटफॉर्म के लिए सही है या नहीं।
सवाल: दिल्ली में जल्द कौन‑सी नई पहलें आने वाली हैं?
जवाब: जैसे मैंने कहा—हम Scooty और Rapido Pink शुरू करने जा रहे हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या लगातार बढ़ा रहे हैं। और चूंकि दिल्ली में मेट्रो सबसे बड़ा ट्रांसपोर्ट है, हम मेट्रो को पूरा सपोर्ट करने के लिए नई सेवाएं ला रहे हैं। अभी Rapido Metro सेवा चल रही है, जो कि मेट्रो स्टेशन तक जाने के लिए अलग सेवा है। अब हम मेट्रो टिकट भी रैपिडो ऐप में ही उपलब्ध करा रहे हैं। आगे हमारा लक्ष्य है कि घर से निकलकर मेट्रो तक की यात्रा, मेट्रो टिकट, और मेट्रो से उतरने के बाद आगे की यात्रा, सबकुछ एक ही बुकिंग में हो सके।
















































