हरियाणा के शहरी निकाय चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित कर दी। भाजपा का विजय रथ पहले की तरह ही आगे बढ़ा जबकि 19 जून को जब मतदान हुआ था, उस समय प्रदेश में अग्निपथ के विरोध की आग प्रबल थी। भाजपा ने 2014 में सत्ता संभालने के बाद से शहरी निकाय चुनावों में बड़ी जीत हासिल की है। इस बार भी शहरी मतदाताओं ने सत्तारूढ़ दल में ही अधिक विश्वास जताया, जिससे सियासी मिजाज भी पता चल गया। बुधवार को आए चुनाव नतीजों का आगामी पंचायत चुनाव और 2024 के विधानसभा चुनाव की दिशा और दशा पर काफी असर पड़ने वाला है। भाजपा ने 21 जिलों के 46 निकायों में से 22 चेयरमैन के पद अपने बूते जीते, जबकि 3 पर गठबंधन सहयोगी जजपा ने जीत दर्ज की। भाजपा-जजपा के लिए चुनाव से पहले एक बार फिर साथ आना फायदेमंद साबित हुआ। हालांकि कुछ सीटों पर दोनों दलों के नेता बागी होकर भी लड़े, लेकिन अधिक नुकसान नहीं हुआ। भाजपा इस जीत को पूरी तरह भुनाने की कोशिश करेगी। निर्दलीय चेयरमैन जीते 7 भाजपा और एक जजपा के ही बागी हैं। इनके देर-सवेर भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार के साथ आने के संकेत मिल रहे हैं। कांग्रेस सिंबल पर न लड़कर पहले ही मुकाबले से बाहर हो चुकी थी, वह कुछ निर्दलीयों की जीत का श्रेय भले लेने की कोशिश करे, लेकिन उससे कार्यकर्ताओं में नए रक्त का संचार होने के कम ही आसार हैं। चूंकि, पार्टी में गुटबंदी खत्म होने के बजाय बढ़ती जा रही है।










































