नशा मुक्त भारत अभियान के तहत तस्करों की कमर तोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस ने तीन साल में 84 नारको अपराधियों के खिलाफ फ्रीजिंग ऑर्डर हासिल किए। इनकी कुल 31 करोड़ 81 लाख 92 हजार 682 रुपये का लागत की प्रॉपर्टी, जूलरी और कैश को जब्त किया है। पुलिस अफसरों ने बताया कि 64 के खिलाफ फ्रीजिंग या जब्ती का एक्शन पूरा हो चुका है, जबकि 20 के खिलाफ अभी जारी है। इसलिए इस आंकड़े में आने वाले वक्त में और बढ़ोतरी होगी। पुलिस यह कार्रवाई नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रोपिक सबस्टेंस (NDPS) की धारा 68 के तहत करती है।
नशे का धंधा सिर्फ पैसा कमाना
पुलिस अफसरों ने बताया कि नशे का धंधा सिर्फ पैसा कमाने के मकसद से किया जाता है। नशे के खिलाफ लड़ाई में इसी पर चोट करना जरूरी है। एनडीपीएस एक्ट के चैप्टर 5-ए में ऐसी गैरकानूनी तरीके से जुटाई गई चल-अचल प्रॉपर्टी को जब्त करने का प्रावधान है। यह एक्शन उसके खिलाफ लिया जा सकता है, जिसे एनडीपीएस एक्ट में दस या उससे ज्यादा साल की सजा हो या प्रिवेंशन ऑफ इल्लिसिट ट्रैफिक इन नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (PITNDPS) एक्ट के तहत हिरासत में लिया गया हो या जिसे दस साल की सजा वाले जुर्म में गिरफ्तार किया गया हो।
गैरकानूनी तरीके से जुटाई गई प्रॉपर्टी
फ्रीजिंग की प्रक्रिया सेक्शन 53 के तहत की जाती है, जिसमें सक्षम अधिकारी गैरकानूनी तरीके से जुटाई गई प्रॉपर्टी का पता लगाता है और उसकी पहचान करता है। प्रॉपर्टी जब्त होगी और अगर ऐसा संभव नहीं हुआ तो फ्रीज करने का प्रावधान है। प्रॉपर्टी गैरकानूनी तरीके से हासिल नहीं की गई है, इसे साबित करने की जिम्मेदारी भी आरोपी की होती है। वह जन्त या फ्रीज करने के आदेश के खिलाफ अपीलेट ट्रिब्यूनल में अपील कर सकता है। नशे के कारोबारी की कमाई के जरिए गैरकानूनी रूप से बनाई गई प्रॉपर्टी को सीज या फ्रीज करने के बाद नीलाम करने का प्रावधान है।
2025 में 26.65 करोड़ से ज्यादा जब्त
दिल्ली पुलिस ने 31 अक्टूबर 2025 तक 53 नशा तस्करों के खिलाफ फ्रीजिंग ऑर्डर हासिल किए। इनमें से 33 के खिलाफ कार्रवाई पूरी हो चुकी है, जिनसे 21 करोड़ 80 लाख 14 हजार 703 रुपये वैल्यू की प्रॉपर्टी को फ्रीज किया है। यह एक्शन 20 और आरोपियों के खिलाफ चल रहा है, जिनसे 4 करोड़ 85 लाख 39 हजार 497 रुपये की वैल्यू की चल-अचल संपत्ति जब्त की गई है। इस तरह से इस साल कुल 26 करोड़ 65 लाख 54 हजार 200 रुपये की रिकॉर्डतोड़ फ्रीजिंग हो चुकी है। अभी 22 तस्करों की प्रॉपर्टी का पता लगाने का काम जारी है, इसलिए यह आंकड़ा काफी ऊपर जाएगा। यह तस्कर दिल्ली के अलावा अन्य राज्यों से भी हैं।













































