पंजाब सरकार (Punjab Government) ने राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (Dearness Allowance) में 11 फीसदी की बढ़ोतरी की घोषणा की है. सरकार ने सोमवार को अपने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते को मौजूदा 17 प्रतिशत से बढ़ाकर मूल वेतन का 28 प्रतिशत कर दिया, जिससे सरकारी खजाने पर हर महीने 440 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा.
पंजाब विधानसभा चुनाव (Punjab Assembly Election) से कुछ महीने पहले मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया. मुख्यमंत्री चन्नी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि महंगाई भत्ता (DA) 17 से बढ़ाकर 28 प्रतिशत करने पर हर महीने 440 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा.
‘कर्मचारी राज्य प्रशासन की रीढ़’
चन्नी ने कहा कि डीए जुलाई से बढ़ा दिया गया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मचारी राज्य प्रशासन की रीढ़ हैं. चन्नी ने कर्मचारियों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए अपनी सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराया. उन्होंने यह भी घोषणा की है कि एक जनवरी 2016 के बाद भर्ती किए गए कर्मचारियों को भी अन्य कर्मचारियों के समान संशोधित वेतन में न्यूनतम 15 प्रतिशत की वृद्धि का लाभ दिया जाएगा. हालांकि किसी जूनियर कर्मचारी का वेतन सीनियर के वेतन से अधिक निर्धारित नहीं किया जाएगा.
मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न कर्मचारी संघों के प्रतिनिधियों ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वे आंदोलन के रास्ते पर नहीं चलेंगे बल्कि आपसी चर्चा के माध्यम से अपने मुद्दों को सुलझाएंगे. चन्नी ने कहा, ‘दिवाली के मौके पर मैं राज्य सरकार के कर्मचारियों को एक तोहफा देना चाहता था. उन्हें आज तक ऐसा तोहफा नहीं मिला होगा. मेरे मुख्यमंत्री बनने से पहले से ही कर्मचारी हड़ताल कर रहे थे. मैंने कर्मचारियों से बात की. कर्मचारियों ने मुझसे वादा किया है कि जब तक यह सरकार सत्ता में है, वे हड़ताल पर नहीं जाएंगे, चाहे कुछ भी हो. किसी भी मुद्दे पर वे बैठकर सरकार के साथ बातचीत करेंगे.’
चुनाव से पहले जरूरी कामों को निपटाने की योजना
अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब सरकार ने महत्वपूर्ण कार्यों को निपटाने की योजना बनाई है. क्योंकि पंजाब में पिछले विधानसभा चुनाव में 4 जनवरी 2017 से और 2012 के चुनाव में 24 दिसंबर 2011 से आचार संहिता लागू हो गई थी. इसलिए इस साल अब 2 महीनों के बाद कभी भी आचार संहिता लागू हो सकती है. ऐसे में नए मंत्रिमंडल के पास कल्याणकारी फैसलों के लिए सिर्फ 2 महीनों का समय है.







































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