सतलोक आश्रम प्रकरण में उम्रकैद की सजा काट रहा रामपाल शुक्रवार को जेल से बाहर आ गया। रामपाल 11 साल और 4 महीने 24 दिन बाद हिसार की सेंट्रल जेल-2 से 5 बजकर 4 मिनट पर बाहर आया। परिवार के लोग 7 गाड़ियों में उसे लेने के लिए जेल में पहुंचे। रामपाल सफेद पर्दे लगी फॉर्च्यूनर में बैठकर निकला। गाड़ी में बैठते हुए वह मुस्कुराता हुआ नजर आया। इसके बाद रामपाल हिसार से सीधा सोनीपत जिले के गोहाना में स्थित धनाना आश्रम के लिए रवाना हुआ है। 8 अप्रैल को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा काट रहे रामपाल को जमानत मंजूर की थी। शुक्रवार सुबह ही कोर्ट के आदेश पर रामपाल के वकीलों ने हत्या के दो मामलों में 5-5 लाख के बेल बांड जमा करवाए।
सुरक्षा के किए गए पुख्ता इंतजाम
पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जेल परिसर के बाहर व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे। रामपाल के कई अनुयायी उसकी एक झलक पाने के लिए वहां एकत्र हो गए थे। रामपाल ने हिसार की एक अदालत की ओर से 25 सितंबर 2025 को पारित किए गए आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी। जिसके तहत उसकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि 2014 में रामपाल ने 900 से अधिक समर्थकों के साथ मिलकर हिसार जिले के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम
में अपनी गिरफ्तारी का विरोध किया था।
जानें पूरा मामला
- नवंबर 2014 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रामपाल को कोर्ट की अवमानना के एक मामले में पेश होने का आदेश दिया था, लेकिन वह पेश नहीं हुआ।
- 19 नवंबर 2014 में पुलिस रामपाल को गिरफ्तार करने हिसार के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम में पहुंची।
- यहां पुलिस और रामपाल समर्थकों के बीच टकराव हुआ। इस दौरान 5 महिलाओं एक बच्चे समेत 6 लोगों की मौत हो गई।
- इसके बाद रामपाल को गिरफ्तार कर लिया गया।
- 2018 में हिसार कोर्ट ने रामपाल को दोषी ठहराया और हत्या सहित अन्य धाराओं में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। इस मामले में रामपाल पर देशद्रोह का केस भी दर्ज किया गया था।















































