नई दिल्ली: दिल्ली में गर्मी अपने चरम पर नहीं पहुंची है, लेकिन इसका खयाल आते ही माथे पर पसीना आ जाता है। अगर आप मई-जून की तपती दोपहर में चाणक्यपुरी, सरदार पटेल मार्ग, सरिता विहार, लोधी गार्डन आदि इलाकों से गुजरें, तो लगेगा सड़कों पर पेंटिंग देख रहे हैं। अमलतास के पेड़ों की कतारों पर झूलते पीले फूल ऐसे लगते हैं, मानो धूप का टुकड़ा जमीन पर आ गया हो।
सदियों पुरानी कहानी: दिल्ली के पेड़ों की खूबसूरती के पीछे सदियों पुरानी कहानी है। आज जब सरकार पेड़ों की गिनती करने जा रही है, तब समझना जरूरी है कि ये पेड़ हमारे लिए क्या मायने रखते हैं। इस प्रॉजेक्ट के तहत अगले चार बरसों में दिल्ली के हर गैर-वन पेड़ को गिना जाएगा और टैगिंग कर उनकी हालत जानी जाएगी। भले ही यह सरकारी प्रक्रिया लगे, पर दिल्ली की हरियाली बचाने की अहम कोशिश है।














































