जींद: हरियाणा का जींद जिला इतिहास रचने जा रहा है। देश में पहली बार संचालित होने वाली हाइड्रोजन ट्रेन जींद जंक्शन पहुंच चुकी है। यह क्षण रेलवे के लिए ही नहीं बल्कि हरियाणा के लिए भी गौरवपूर्ण है, क्योंकि यह ट्रेन आने वाले समय में भारतीय रेल के स्वरूप और तकनीक को नई दिशा देगी। सोनीपत ट्रैक पर दौड़ने वाली देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के कोच चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्टरी में तैयार हुए हैं। इसका परीक्षण भी सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन के बाद भारत इस तकनीक को अपनाने वाला देश बन गया है। आठ कोच की इस आधुनिक ट्रेन में दोनों छोर पर पावर कारें लगाई गई हैं, जिससे संचालन और सुरक्षा को और मजबूत बनाया गया है।
ट्रेन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यात्रियों को सुविधा, सुरक्षा और बेहतर सफर का नया अनुभव मिल सके। ट्रेन के कोच पूरी तरह अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस हैं। रेलवे ने यह भी सुनिश्चित किया है कि यात्री सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। इसी के तहत ट्रेन तभी प्लेटफार्म से रवाना होगी, जब सभी दरवाजे पूरी तरह बंद होंगे। इससे दुर्घटनाओं की संभावनाएं काफी हद तक कम होंगी। हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन से जींद का नाम राष्ट्रीय स्तर पर नई तकनीक अपनाने वाले शहरों में शुमार हो गया है। जींद-गोहाना-सोनीपत ट्रैक पर जल्द ही पर्यावरण हितैषी और अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित हाइड्रोजन ट्रेन रफ्तार पकड़ेगी।
अन्य रूटों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनें चलाई जाएंगी
इस तकनीक को अपनाने वाले चुनिंदा देशों में भारत का नाम भी जुड़ जाएगा। इससे यहां विकास की नई संभावनाओं के द्वार भी खुलेंगे। यदि इस प्रोजेक्ट को सफलता मिलती है तो देश के कई अन्य रूटों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनें चलाई जाएंगी। हाइड्रोजन गैस से ट्रेन चलने के बाद रेलवे के लिए भी यह गर्व का पल होगा, क्योंकि जींद में पहली हाइड्रोजन ट्रेन का पहुंचना केवल एक ट्रेन का आगमन नहीं, बल्कि तकनीकी क्रांति की शुरुआत है। यह कदम आने वाले वर्षों में देश की रेल व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और यात्री सुविधाओं को नया आयाम देगा। जींद इस ऐतिहासिक उपलब्धि का गवाह बन चुका है। अब सभी की निगाहें इस अत्याधुनिक ट्रेन के आगे के सफर पर टिकी हैं।
ट्रेन की यह है खास सुविधाएं
-इलेक्ट्रिक की तुलना में दस गुना अधिक दूरी तय कसेगी।
-360 किग्रा. हाइड्रोजन से 180 किमी. सफर तय करेगी।
-बिना आवाज के चलेगी, यात्री आरामदायक सफर कर सकेंगे।
-हाइड्रोजन ट्रेन के दोनों छोर पर पॉवर इंजन लगे हैं।
-यात्रियों के बैठने के लिए आठ डिब्बे लगाए गए हैं।
-यात्रियों को सफर के दौरान पंखे, लाइट और एसी की सुविधा मिलेगी।
-मेट्रो की तरह कोच के दोनों तरफ प्रवेश और निकासी के लिए 2-2 दरवाजे हैं।
-हर कोच में डिसप्ले होगी, जिससे स्टेशन आने के बारे में सूचना प्रसारित होगी।














































