गर्मी हो या सर्दी, कार का इंजन कई कारणों से ओवरहीट हो सकता है और इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। इंजन ज्यादा गर्म होने पर गाड़ी अचानक बंद हो सकती है, माइलेज घट सकता है और महंगा नुकसान भी झेलना पड़ सकता है। ऐसे में वाहन चालकों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर किन वजहों से इंजन ओवरहीटिंग का शिकार होता है। आज हम आपको 10 ऐसे बड़े कारणों के बारे में बता रहे हैं, जिन पर समय रहते ध्यान देकर आप बड़ी परेशानी से बच सकते हैं।
कार चालकों के लिए बड़ी परेशानी बन सकता है। ड्राइविंग के दौरान अगर इंजन जरूरत से ज्यादा गर्म होने लगे तो इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। कई बार लोग समझ ही नहीं पाते कि आखिर इंजन ओवरहीट क्यों हो रहा है, जबकि इसके पीछे कूलेंट लीक, वॉटर पंप में खराबी, थर्मोस्टेट जाम होना, इंजन ऑयल की खराब क्वालिटी या कूलेंट लेवल कम होना जैसी कई अहम वजहें होती हैं। लगातार ओवरहीटिंग की समस्या रहने पर इंजन को स्थायी नुकसान भी पहुंच सकता है, जिससे भारी खर्च उठाना पड़ सकता है। ऐसे में हर कार मालिक के लिए जरूरी है कि वह इंजन ओवरहीटिंग के कारणों को समय रहते समझे और सही देखभाल करे। आइए जानते हैं इंजन ओवरहीटिंग की 10 बड़ी वजहें, जो आपकी कार के लिए खतरा बन सकती हैं।
कूलेंट लीक
कूलेंट इंजन की गर्मी को सोखकर उसे ठंडा रखने का काम करता है। ऐसे में अगर किसी पाइप, रेडिएटर या किसी कनेक्शन में लीक होता है, तो कूलेंट बाहर निकल जाता है। कूलेंट कम होने से इंजन का तापमान तेजी से बढ़ने लगता है और ऐसी स्थिति निश्चित रूप से कार के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
वॉटर पंप में खराबी
वॉटर पंप इंजन के सबसे अहम हिस्सों में से है, जो पूरे सिस्टम में कूलेंट को घुमाता है। इसके पंख अगर घिस जाते हैं तो यह काम करना बंद कर देता है और कूलेंट का फ्लो रुक जाता है और ऐसी स्थिति में इंजन ओवरहीट हो जाता है।
कूलेंट लेवल कम होना
आपकी कार के इंजन के पास लगे कूलेंट का लेवल अगर कम हो जाता है तो यह सिस्टम की गर्मी सही से नहीं सोख पाता। दरअसल, कूलेंट में छोटी-मोटी लीकेज या लंबे समय तक मेंटेनेंस न करने के कारण कूलेंट लेवल कम हो होता है।
थर्मोस्टेट जाम होना
आपको बता दें कि थर्मोस्टेट इंजन के लिए गेटकीपर की तरह काम करता है, जो कूलेंट के फ्लो को कंट्रोल करता है। यह अगर जाम हो जाता है तो कूलेंट इंजन से रेडिएटर तक नहीं पहुंच पाता और ऐसी स्थिति में गर्मी अंदर ही जमा होने लगती है।
खराब इंजन ऑयल
आपके लिए जानना जरूरी है कि कार का इंजन ऑयल केवल पार्ट-पुर्जों को चिकना ही नहीं रखता, बल्कि हीट भी अब्जॉर्ब करता है। पुराना या कम ऑयल पुर्जों के बीच घर्षण बढ़ाता है और इससे अतिरिक्त गर्मी पैदा होती है।
रेडिएटर कैप में दिक्कत
रेडिएटर कैप कूलिंग सिस्टम में प्रेशर बनाए रखता है, ताकि कूलेंट उबलने न पाए। कैप का स्प्रिंग या सील अगर खराब है तो दबाव कम हो जाएगा और कूलेंट उबलकर बाहर निकल जाएगा।
ऑयल कैप ढीला होना
ऑयल कैप अगर ठीक से नहीं लगा है तो ऑयल बाहर निकल सकता है या सिस्टम का प्रेशर कम हो सकता है। इससे लुब्रिकेशन खराब होता है और इंजन गर्म होने लगता है।
खराब टेंपरेचर सेंसर
इंजन में कई तरह के सेंसर लगे होते हैं और इनमें टेंपरेचर सेंसर ड्राइवर को बताता है कि इंजन कितना गर्म है। यह अगर खराब हो जाता है तो इंजन गर्म होने लगता है। कई बार आपको डैशबोर्ड पर कोई अलर्ट नहीं मिलता और ऐसी स्थिति में हम इस खराबी को ठीक नहीं करा पाते।
कूलिंग फैन खराब होना
आपकी कार जब ट्रैफिक में खड़ी होती है तो कूलिंग फैन रेडिएटर को ठंडा रखने के लिए हवा खींचता है। फैन का मोटर या फ्यूज अगर खराब हो जाता है तो स्लो स्पीड में इंजन तुरंत ओवरहीट होने लगता है।
रेडिएटर में खराबी आना
रेडिएटर कूलेंट से गर्मी को हवा में छोड़ता है। इसके बारीक छेद अगर धूल या कचरे से बंद हो जाएं तो गर्मी बाहर नहीं निकल पाती और ऐसी स्थिति में इंजन का तापमान बढ़ जाता है।
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि आपकी कार का इंजन अगर ओवरहीट लोने लगे और आपको इसमें आने वाली दिक्कतों का आसानी से पता ना चले तो तत्काल मैकेनिक या सर्विस सेंटर में संपर्क करे और समय रहते इसमें आने वाली समस्याओं को ठीक करें, नहीं तो आगे चलकर आपको काफी परेशानी आ सकती है।











































