यमुनानगर: हरियाणा का यमुनानगर जिला प्रदेश का सबसे हरा-भरा इलाका माना जाता है। यहां बहने वाली दो बरसाती नदियां सोम और पथराला सोना भी उगलती हैं। मॉनसून में पहाड़ों पर भारी बारिश होती है लिहाजा दोनों बरसाती नदियां भी पूरे उफान पर होती है। जनवरी माह आते आते दोनों बरसाती नदियों की धारा बेहद शांत हो जाती है। इसी मौसम में नदी की धारा में छिपे हुए सोने के बारीक कण छानकर निकालते है। सदियों से गांवों के लोग इन नदियों से सोना छानते आए हैं। आज भी यह सिलसिला उतनी ही रहस्यमयी तरह से जारी है।
सरकार देती है सोना निकालने का ठेका
हर वर्ष इन नदियों से सोना निकालने का अधिकार हरियाणा सरकार टेंडर के जरिए देती है। इससे सरकार को राजस्व मिलता है तो ग्रामीणों को आजीविका भी। यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी कई गांवों का जीवन इसी पर आधारित है। मानकपुर गांव के जरनैल सिंह जैसे लोग लकड़ी की जाली और एक खास औजार की मदद से नदी की मिट्टी को कई बार छानकर सोने की तलाश करते हैं। दिनभर की मेहनत से कभी 500 तो कभी 1000 रुपये तक कीमत का सोना हाथ लगता है। कई बार पूरी मेहनत के बाद भी कुछ नहीं मिलता, लेकिन कोशिश जारी रहती है।
सोना पहचानना आसान नहीं
ग्रामीण बताते हैं कि सोना काले या लाल रंग के बेहद छोटे कणों की तरह दिखाई देता है। इसे पहचानने के लिए खास अनुभव और पारखी नजर की जरूरत पड़ती है। मौसम, नदी की धारा और मिट्टी तीनों मिलकर यह काम बेहद चुनौतीपूर्ण बना देते हैं। सोना छानना सिर्फ काम नहीं, बल्कि यहां की परंपरा है। बरसों से गांव के लोग नदियों से सोना निकालते आए हैं और यह अनूठा काम उन्हें बाकी दुनिया से अलग पहचान देता है।












































