‘अंकल, बर्गर खा लो…’ जंतर-मंतर पर इंसानियत की मिसाल, बारिश में भी मदद का सिलसिला जारी!

PARMODKUMAR

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नई दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान मदद का अनोखा माहौल दिखा। लोग चाय, फल, बर्गर और अन्य सामान लेकर प्रदर्शनकारियों की सेवा करते नजर आ रहे हैं। कई छात्र और नौकरीपेशा लोग भी स्वेच्छा से लगातार सहयोग कर रहे हैं।

रौशन झा, नई दिल्ली: सुबह के करीब आठ बज रहे होंगे। हल्की बारिश हो रही थी। जनपथ मेट्रो स्टेशन से जंतर मंतर धरना स्थल जैसे-जैसे करीब आ रहा था, शोर बढ़ता जा रहा था। इस शोर में सरकार के खिलाफ नाराजगी की आवाज थी तो प्रदर्शन में शामिल लोगों की मदद करने वालों की पुकार भी थी। धरना स्थल पर पहुंचते ही सबसे पहले ‘चाय, चाय, चाय ले लो चाय’ की आवाज साफ सुनाई दी। अभी यहाँ आकर रुका ही था कि 10-12 साल के दो बच्चे आए और कहा, ‘अंकल बर्गर खाओगे, घर से लेकर आया हूं।’

यहां आने वाले हर हाथ में था खाने-पीने का सामान

  • मैं इससे पहले भी जंतर मंतर पर कई आंदोलन कवर कर चुका हूं।
  • लेकिन, ऐसा माहौल पहले कभी नहीं देखा। यहां आने वाले हर व्यक्ति के हाथ में खाने-पीने का कुछ ना कुछ सामान जरूर था।
  • स्विगी, जोमैटो वालों की तो मानो लाइन लगी थी। ना तो डिलीवरी बॉय को पता है कि सामान किसने ऑर्डर किया है और ना ही वहां सामान रिसीव करने वाले पूछते हैं कि किसने भेजा है।
  • खड़ा था तो एक बच्चा चाय लेकर आ गया। उसने अपना नाम अनिकेत बताया।
  • 12वीं में पढ़ता है और गोरखपुर से अकेले आया है। कुछ देर बाद एक बच्चा कोल्डड्रिंक्स लेकर आ गया। उसने अपना नाम राज बताया।
  • कहा कि 10वीं का छात्र हूं और प्रयागराज से चार दिन पहले घर से भागकर आया हूं।
  • उसने आगे कहा कि अगर बैग लेकर आता तो घर वाले पकड़ लेते, इसलिए एक ही कपड़े में आया हूं और चार दिन से यही पहने हुआ हूं।

लोगों को फल बांट रही राधिका

धरना स्थल के अंदर पहुंचा तो यहां पहुंचते ही राधिका मिली। राधिका खूब सारे केले, सेब, नाशपाती, बिस्किट और नींबू पानी वगैरह जमीन पर रखकर बांटती दिखी। पूछा तो बताया कि मैं वर्किंग हूं और 20 जुलाई से यहां आ रही हूं। आज पहली बार लोगों के लिए कुछ खाने-पीने के लिए लेकर आई हूं। वह ऑफिस जाने से पहले और ऑफिस के बाद यहां आकर प्रदर्शनकारियों की सेवा करती है।