पंक्चर में इस्तेमाल होने वाले सोल्यूशन का नशा कर रहे किशोर

Parmod Kumar

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10 से 12 साल के बच्चे व महिलाएं भी नशे की चपेट में, नशे की दलदल में धंसे हरियाणा में एक आधुनिक नशा मुक्ति केंद्र की दरकार

स्मैक, हेरोइन के बाद हशिश, इंजैक्शन, चरस कर रहा नौजवानी का नाश
सिरसा
कालांवाली के नशा मुक्ति केंद्र में अभी कुछ समय पहले 10 से 12 साल के कुछ बच्चों को उनके परिजनों ने इलाज के लिए भर्ती करवाया। ये बच्चे वाहनों के टॉयरों के पंक्चर लगाने में इस्तेमाल होने वाले सोल्यूशन फ्लूड का नशा करते थे। नशे के इतने आदी हो चुके थे कि जवानी देखने से पहले इनका शरीर ढलने लगा था। दरअसल पंजाब के साथ सटे सिरसा जिले में युवा चूरापोस्त, अफीम, स्मैक, हेरोइन, नशीली दवाइयों व इंजैक्शन के बाद अब आयोडैक्स, सोल्यूशन, चरस, हशीश जैसा नशा भी करने लगे हैं। पर कोढ़ में खाज यह है कि नशे की दलदल में धंसे नौजवानों को इससे बाहर निकालने के लिए सिरसा में कोई बड़ा सरकारी नशा मुक्ति केंद्र नहीं है। यहां के सिविल अस्पताल में एक नशा मुक्ति केंद्र है, तो पंजाब के साथ सटी कालांवाली मंडी में एक नशा मुक्ति केंद्र है।

कालांवाली के केंद्र में तो कोई विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है, वहीं सिविल अस्पताल के केंद्र में भी स्टाफ की कमी है। ऐसे में अपने बच्चों को नशे से मुक्ति दिलाने के लिए यहां के अभिभावकों को जयपुर, गंगानगर, भङ्क्षटडा, दिल्ली, रोहतक सरीखे शहरों की सडक़ें नापनी पड़ती हैं।
दरअसल खेती में अव्वल और अच्छी अर्थव्यवस्था वाला जिला सिरसा नौकरशाहों व राजनेताओं के कथित संरक्षण के चलते नशीले पदार्थों की तस्करी का बड़ा हब बन गया है। पुलिस की एक रिपोर्ट के अनुसार जिला के तमाम इलाके नशे के गर्त में चले गए हैं। हजारों लोग नशे की जकडऩ में है। नशा छोडऩा चाहते हैं, पर इलाज के लिए उचित मंच नहीं है। मसलन जनवरी 2017 से जून 2018 तक ही सिरसा के सिविल अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र में 14086 मरीजों की ओ.पी.डी. हुई जबकि इनमें से महज 568 मरीज ही दाखिल हुए। यही आलम कालांवाली के सरकारी नशा मुक्ति केंद्र का है। इलाज कराने वाले नशेडिय़ों की संख्या अधिक है। चिकित्सक, संसाधन-सुविधाएं है नहीं। कालांवाली का नशा मुक्ति केंद्र में महज 15 बिस्तर ही है। एक परियोजना अधिकारी, 1 काऊंसलर, 1 योगा थैरेपिस्ट, 1 स्टाफ नर्स, 2 वार्ड ब्वॉय, 1 टियर एजुकेटर, 1 कुक, 1 स्विपर 1 चौकीदार व एक अटैंडेंट के सहारे काम चलाया जा रहा है। नशा छोडऩे को लेकर हजारों कतार में हैं। पर नशे का हब बन गए इस इलाके में सरकारी स्तर पर उच्च स्तर का कोई नशा मुक्ति केंद्र न होना इस सकारात्मक पहल में बड़ी बाधा बन रहा है। स्वयं सिरसा के प्रवर पुलिस अधीक्षक हामिद अख्तर कहते हैं कि उनके पास पिछले कुछ समय से कई नौजवान नशा छोडऩे की गुहार लगाने आए हैं। पर नशा मुक्ति केंद्रों में जगह न होने के चलते मुश्किल आती है।
नशामुक्ति केंद्र कालांवाली में दाखिल हुए रोगी
वर्ष पंजीकरण दाखिल हुए
2013-14 89 63
2014-15 206 163
2015-16 200 165
2016-17 192 163
2017-18 193 155

‘नशा मुक्ति केंद्र में 10 से 12 साल के बच्चे भी आ रहे हैं। इनमें से कुछ बच्चे कूड़ा बीनते हैं और वाहनों के टायर पंक्चर में इस्तेमाल होने वाले सोल्यूशन पऊ्लूड का नशा करते हैं। इसके अलावा कुछ महिलाएं चूरापोस्त, शराब का सेवन करती है। इलाके में स्मैक, अपऊीम, चूरापोस्त, हेराइन, नशीली गोलियां व इंजैक्शन का नशा तो आम हो गया है।’
-शमशेर सिंह, प्रोजेक्ट कोर्डिनेटर, नशामुक्ति केंद्र, कालांवाली।

 

 

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