महिलाओं को क्या बताना चाहते हैं दुनियाभर के गाइनेकोलॉजिस्ट, उनकी जिंदगी के लिए बहुत महत्वपूर्ण

parmodkumar

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2026 में भी सबसे आसानी से रोके जाने वालों में सर्वाइकल कैंसर शामिल है। लेकिन फिर भी बहुत सारी महिलाएं खुद को इस कैंसर से बचाने का मौका गंवा देती हैं। सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग, वैक्सीनेशन और अवेयरनेस के मामले में तकनीक काफी एडवांस हो गई है। लेकिन इसके बावजूद कई सारी गलतफहमियां और कमियां अभी भी बनी हुई हैं। भारत समेत दुनिया भर के गायनेकोलॉजिस्ट चाहते हैं कि महिलाएं कुछ जरूरी बातें समझें और ये बातें सिर्फ कैंसर से बचाव तक सीमित नहीं हैं।

केवल बुजुर्ग महिलाओं को नहीं होता सर्वाइकल कैंसर
गुरुग्राम स्थित सीके बिरला हॉस्पिटल के ऑब्सटेट्रिक्स एंड गाइनेकोलॉजिस्ट की डायरेक्टर डॉक्टर अंजलि कुमार ने बताया कि सबसे बड़ी गलतफहमी यही है कि सर्वाइकल कैंसर की बीमारी केवल बुजुर्ग महिलाओं को होती है। जबकि सच्चाई ये है कि कैंसर बनने से कई साल पहले ही प्री-कैंसर वाले बदलाव शुरू हो जाते हैं। इसी कारण से आपको इस कैंसर से बचने के लिए जरूरी कदम पहले ही उठाने शुरू कर देने चाहिए। डॉक्टरों की सलाह के मुताबिक 21 साल की उम्र से ही आपको सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग शुरू कर देनी चाहिए।

सोच नहीं सकते HPV वैक्सीन का असर
सर्वाइकल कैंसर की सबसे बड़ी वजह ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) है। इस वजह से एचपीवी वैक्सीन इस कैंसर से बचाने में काफी मददगार होती है। लेकिन कई सारी महिलाएं इस वैक्सीन की जरूरत को समझ नहीं पाती हैं या पूरे प्रभाव के बारे में नहीं जानती हैं। डॉक्टर के मुताबिक यौन सक्रिया होने से पहले वैक्सीन लगवाने से सबसे ज्यादा सुरक्षा मिलती है। हालांकि, 20 से 30 की उम्र में भी महिलाओं और पुरुषों को इसका फायदा मिल सकता है। वैक्सीन के बाद भी बॉडी की स्क्रीनिंग जरूरी है, लेकिन खतरनाक एचपीवी टाइप्स का खतरा काफी कम हो जाता है।

लक्षणों का इंतजार ना करें
आपको इससे पहले ही स्क्रीनिंग शुरू करवा देनी चाहिए। ऐसा करने से बीमारी को शुरुआती स्टेज में ही पकड़ा जा सकता है और इलाज आसानी से हो जाता है। सर्वाइकल कैंसर की शुरुआत में दर्द या कोई परेशानी जैसा लक्षण दिखना बहुत दुर्लभ है। इर्रेगुलर ब्लीडिंग या पेल्विक पेन अक्सर बीमारी के खतरनाक स्टेज में पहुंचने पर दिखते हैं। भारत में कम खर्च वाले एचपीवी टेस्ट और सेल्फ सैंपलिंग किट भी उपलबध हैं।

लाइफस्टाइल और यौन स्वास्थ्य का प्रभाव
बेशक सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण एचपीवी हो, लेकिन कुछ लाइफस्टाइल की आदतों और यौन स्वास्थ्य के प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।जैसे

स्मोकिंग से एचपीवी के कैंसर में बदलने का खतरा बढ़ता है
बार बार गर्भधारण और कुछ हॉर्मोनल कॉन्ट्रासेप्टिव का लंबे समय तक इस्तेमाल करने से भी खतरा बढ़ता है
ज्यादा स्ट्रेस, क्रोनिक डिजीज या एचआईवी जैसी कंडीशन से इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है

डिस्क्लेमर: लेख में दिए गए नुस्खे की जानकारी व दावे पूरी तरह से इंस्टाग्राम पर प्रकाशित रील पर आधारित हैं। एनबीटी इसकी सत्यता, सटीकता और असर की जिम्मेदारी नहीं लेता है। किसी भी तरह के नुस्खे को आजमाने से पहले किसी एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।