क्या होता है STT, बजट में जिसके बढ़ाने की घोषणा से शेयर बाजारों में भूचाल आ गया!

parmodkumar

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केंद्रीय बजट 2026-27 संसद में पेश किया जा चुका है। इस बार का बजट शेयर बाजार को पसंद नहीं आया। तभी तो कल बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,546.84 अंक लुढ़ककर 80,722.94 अंक पर पहुंचा था। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 495.20 अंक टूटकर 24,825.45 अंक पर बंद हुआ था। आज भी बीएसई 167.26 अंक डाउन खुल है। बताया जाता है कि इस गिरावट की बड़ी वजह एसटीटी (STT) में बढ़ोतरी का ऐलान है। हम बता रहे हैं कि क्या होता है एसटीटी।
एसटीटी बोले तो!
एसटीटी मतलब सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स होता है। यह शेयर बाजार में फ्यूचर्स एंड ऑप्‍शंस (F&O) की ट्रेडिंग करने वालों पर यह लगता है। F&O की हर खरीद बिक्री या ट्रांजैक्शन पर यह देय होता है। इसके लगने स सीधे-सीधे ब्राोकरेज कॉस्ट बढ़ जाता है।
फ्यूचर्स पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है। वहीं, ऑप्शंस के प्रीमियम पर लगने वाला टैक्स 0.10% से बढ़कर 0.15% हो गया है। इसी तरह, ऑप्शंस के एक्सरसाइज (यानी जब ऑप्शन का इस्तेमाल किया जाता है) पर लगने वाला टैक्स भी 0.125% से बढ़कर 0.15% कर दिया गया है।
क्या कहा निर्मला सीतारमण ने
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने भाषण में कहा: ‘मैं प्रस्ताव करती हूं कि फ्यूचर्स पर STT को मौजूदा 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत किया जाए। ऑप्शंस प्रीमियम और ऑप्शंस के एक्सरसाइज पर लगने वाले STT दोनों को मौजूदा दर 0.1 प्रतिशत और 0.125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।’ उन्होंने कहा कि इस बढ़ोतरी का मकसद ‘पूंजी बाज़ार के F&O सेगमेंट में उचित सुधार लाना और सरकार के लिए अतिरिक्त रेवेन्यू उत्पन्न करना’ है।
किन्हें लगा है झटका
वित्त मंत्री के इस प्रस्ताव से ब्रोकरेज और एक्सचेंज कंपनियों को झटका लगा है। जैसे ही डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग पर टैक्स बढ़ने की खबर पहुंची, रविवार को विशेष वीकेंड ट्रेडिंग सेशन के दौरान BSE, Groww (Billionbrains Garage Ventures) और Angel One जैसी कंपनियों के शेयर 13.5% तक गिर गए।
क्यों गिरे शेयर
Equirus Securities के CEO, विशद तुराखिया का कहना है कि BSE अपनी आय का 60% इक्विटी डेरिवेटिव्स से कमाता है, जबकि Angel One अपनी ब्रोकिंग आय का 75% F&O से प्राप्त करता है। Nuvama Wealth पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है, क्योंकि उनकी एसेट सर्विसेज से होने वाली आय का लगभग 23% हिस्सा F&O एक्टिविटी से जुड़ा हुआ है। उनका यह भी कहना है कि बजट में शेयर बायबैक (कंपनियों द्वारा अपने ही शेयर वापस खरीदना) पर सभी तरह के शेयरधारकों के लिए कैपिटल गेन टैक्स लगाने का प्रस्ताव, जिसमें प्रमोटरों पर 30% और प्रमोटर कंपनियों पर प्रभावी 22% टैक्स लगेगा, बाज़ार की चिंताओं को और बढ़ाएगा।

यह मिली है चेतावनी
शेयर बाजार के जानकारों ने चेतावनी दी है कि STT में कुल बढ़ोतरी से ट्रेडर्स के लिए ट्रांज़ैक्शन कॉस्ट बढ़ जाएगी और डेरिवेटिव्स बाज़ार में लिक्विडिटी (तरलता या आसानी से खरीद-बिक्री की क्षमता) कम हो जाएगी। Kotak Securities के MD और CEO, श्रीपाल शाह ने बताया: ‘फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर STT में यह भारी बढ़ोतरी, पिछले साल की बढ़ोतरी के ऊपर, ट्रेडर्स, हेजर्स (जोखिम कम करने वाले) और आर्बिट्रेजर्स (कीमतों के अंतर से फायदा उठाने वाले) के लिए ट्रांज़ैक्शन कॉस्ट को बढ़ाएगी। इससे डेरिवेटिव्स एक्टिविटी धीमी हो सकती है और वॉल्यूम में कमी आ सकती है। इसका इरादा राजस्व बढ़ाने के बजाय वॉल्यूम को नियंत्रित करना लगता है, क्योंकि राजस्व में कोई भी संभावित वृद्धि डेरिवेटिव्स के कम वॉल्यूम से पूरी हो सकती है।’ इनका कहना है कि ज़्यादा STT लगने से नज़दीकी अवधि में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) के प्रवाह पर भी दबाव पड़ने की उम्मीद है, खासकर डेरिवेटिव-केंद्रित और हाई-फ्रीक्वेंसी (तेज़ गति वाली) रणनीतियों में।

(डिस्क्लेमर: इस विश्लेषण में दिए गए सुझाव व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, एनबीटी के नहीं। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि किसी भी निवेश का निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से परामर्श कर लें। क्योंकि शेयर बाजार की परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं।)