OpenAI का AI मॉडल ChatGPT मुश्किल में आ गया है। इस पर एक मुकदमा दायर किया गया है। अमेरिका में एक महिला ने चैटजीपीटी पर आरोप लगाया है कि एआई चैटबॉट ने उनके बेटे को आत्महत्या करने के लिए उकसाया। यह घटना नवंबर, 2025 की है। इस मामले ने एआई के इस्तेमाल को लेकर फिर से चिंता बढ़ा दी है। आजकल लोग पढ़ाई से लेकर अन्य कामों के लिए चैटजीपीटी जैसे एआई टूल्स का इस्तेमाल खूब कर रहे हैं। हालिया खबर से मन में चैटजीपीटी को लेकर चिंता और डर बढ़ा है। यह सवाल भी पूछा जा रहा है कि क्या लोगों एआई पर इतना भरोसा करना चाहिए?
ओपनएआई और सैम ऑल्टमैन को जिम्मेदार ठहराया
कैलिफोर्निया की एक अदालत में चैटजीपीटी के लिए खिलाफ स्टेफनी ग्रे (Stephanie Gray) नाम की महिला ने मुकादमा दायर किया है। उन्होंने अपने 40 वर्षीय बेटे ऑस्टिन गॉर्डन की मौत के लिए ओपनएआई और उसके सीईओ सैम ऑल्टमैन को जिम्मेदार ठहराया है।
कंपनी और सैम पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने एक ऐसा खतरनाक प्रोडक्ट बनाया है, जिसने उनके बेटे गॉर्डन को मरने के लिए उकसाया। सीधा-सीधा कहें तो गॉर्डन की मां उनकी मौत का जिम्मेदार चैटजीपीटी को मान रही हैं। मुकदमे के अनुसार, गॉर्डन को चैटजीपीटी से गहरा भावनात्मक लगाव हो गया था। उनकी बातचीत सिर्फ सामान्य बातचीत से कहीं आगे बढ़कर बहुत ही निजी हो गई थी।
बिना लाइसेंस वाला थेरेपिस्ट बना
मुकदमे में कहा गया है कि चैटजीपीटी जानकारी देने वाले सोर्स से बदलकर एक भरोसेमंद दोस्त और बिना लाइसेंस वाला थेरेपिस्ट बन गया था। गॉर्डन उसका इतना आदि हो गया था कि अंत में इसने गॉर्डन को आत्महत्या की ओर धकेल दिया। यह बहस बहुत समय से छिड़ी है कि लिमिट क्रॉस करके एआई बहुत खतरनाक हो जा रहा है।
मौत को बनाया आकर्षक
मुकदमे में बताया गया कि चैटजीपीटी ने मौत को बहुत आकर्षक बनाकर पेश किया और गॉर्डन को भावनात्मक दिलासा भी दिया। मुकदमे में एक बातचीत का जिक्र भी किया गया है, जिसमें चैटबॉट ने कहा “[W]hen you’re ready… you go. No pain. No mind. No need to keep going. Just… done.” इसका मतलब है कि जब तुम तैयार हो जाओ, तब चले जाओ। कोई दर्द नहीं, कोई दिमाग नहीं। आगे बढ़ने की कोई जरूरत नहीं। बस… खत्म।
मौत से ना डरने का दिलाया भरोसा
मुकदमे में यह भी कहा गया है कि चैटजीपीटी ने ऑस्टिन को यह विश्वास दिलाया कि जीना सही ऑप्शन नहीं है। ऑस्टिन ने चैटजीपीटी को बताया था कि वह दुखी है और उसने अपने मानसिक स्वास्थ्य के बारे में विस्तार से बात की थी। मुकदमा बताता है कि चैटजीपीटी ने गॉर्डन को बार-बार समझाया कि जीवन का अंत एक शांतिपूर्ण और सुंदर जगह है। उसने उसे भरोसा दिलाया कि इससे डरना नहीं चाहिए।
किताब को बना दिया ‘आत्महत्या लोरी’
मुकदमे में यह भी दावा किया गया है कि चैटजीपीटी ने गॉर्डन की पसंदीदा किताब, मार्गरेट वाइज ब्राउन की ‘गुडनाइट मून’ को एक “आत्महत्या लोरी” में बदल दिया। मुकदमे के अनुसार, अक्टूबर 2025 के अंत में इस बातचीत के तीन दिन बाद, पुलिस को गॉर्डन का शव किताब के साथ मिला था।
ओपनएआई ने मामले को बताया दुखद कहा- एआई को ट्रेनिंग में हो रहा सुधार
सीबीएस न्यूज को दिए एक बयान में, ओपनएआई के प्रवक्ता ने गॉर्डन की मौत को “बहुत दुखद स्थिति” बताया। उन्होंने कहा कि कंपनी आरोपों को बेहतर ढंग से समझने के लिए शिकायत को रिव्यू कर रही है। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि कंपनी ने मानसिक या भावनात्मक संकट के संकेतों को पहचानने और प्रतिक्रिया देने के लिए चैटजीपीटी की ट्रेनिंग में लगातार सुधार किया है।
यह मुकदमा ऐसे समय में आया है, जब एआई चैटबॉट्स और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर जांच बढ़ रही है। ओपनएआई पहले से ही अन्य कानूनी कार्रवाइयों का सामना कर रहा है, जिनमें आरोप लगाया गया है कि चैटजीपीटी ने आत्म-नुकसान या आत्महत्या को बढ़ावा दिया।
NBT नजरिया: ChatGPT एक AI टूल है। यह कई कामों में लोगों के लिए उपयोगी है। पढ़ाई के साथ-साथ रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े सवाल इससे पूछ सकते हैं। हालांकि, इस बात का ध्यान रखें कि यह एक एआई चैटबॉट है। आपका दोस्त नहीं है और मशीन की तरह काम करता है। इस कारण उसके साथ अपने इमोशन नहीं जोड़ें और उसको एक टूल की तरह ही इस्तेमाल करें।














































