रणदीप सुरजेवाला के बेटे आदित्य के विधानसभा क्षेत्र कैथल पर क्यों मेहरबान राजस्थान के तीन सांसद

parmodkumar

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कैथल: राजस्थान के तीन कांग्रेस सांसदों द्वारा सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (एमपीएलएडी) का एक बड़ा हिस्सा हरियाणा के कैथल विधानसभा क्षेत्र में खर्च करने की सिफारिश ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। कैथल वही विधानसभा क्षेत्र है, जहां से वरिष्ठ कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला के बेटे आदित्य सुरजेवाला विधायक हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि राजस्थान की जनता के विकास के लिए मिलने वाली राशि को दूसरे राज्य में क्यों लगाया गया। भाजपा ने इसे राजनीतिक मिलीभगत और परिवारवाद से जोड़ते हुए कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया है।

कैसे सामने आया मामला
बता दें कि बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने इस कथित अनियमितता को उजागर करते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। अमित मालवीय का आरोप है कि राजस्थान से लोकसभा सांसद राहुल कस्वां (चूरू), संजना जाटव (भरतपुर) और बृजेंद्र सिंह ओला (झुंझुनूं) ने अपने एमपीएलएडी फंड से क्रमशः 50 लाख रुपये, 45.5 लाख रुपये और 24.7 लाख रुपये हरियाणा के कैथल विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए अनुशंसा की। आदित्य सुरजेवाला इस विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं।

कौन है आदित्य सुरजेवाला
आदित्य सुरजेवाला कांग्रेस के दिग्गज नेता रणदीप सुरजेवाला के बेटे हैं। आदित्य सुरजेवाला के दादा शमशेर सिंह सुरजेवाला पांच बार विधायक रहे और 2005 में कैथल सीट से जीते थे। इसके बाद, 2009 और 2014 में रणदीप सुरजेवाला ने यह सीट जीती। आदित्य ने कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय से वाणिज्य में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा बेंगलुरु के इंटरनेशनल स्कूल से पूरी की। 2019 के हरियाणा विधानसभा चुनावों में, कैथल में हुए एक करीबी मुकाबले में भाजपा के लीला राम ने रणदीप सुरजेवाला को 1,200 से अधिक वोटों के अंतर से हराया था। आदित्य ने 2024 हरियाणा विधानसभा चुनाव में कैथल सीट से 8,124 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। 25 वर्षीय आदित्य पिछले 25 वर्षों में राज्य के सबसे युवा विधायक बने थे।

बीजेपी ने उठाए सवाल
बीजेपी का कहना है कि राजस्थान की जनता के विकास के लिए मिलने वाले फंड को हरियाणा में खर्च करने की सिफारिश करना गलत है। अमित मालवीय ने इसे राजस्थान की जनता के साथ लूट करार देते हुए कहा कि यह स्पष्ट रूप से कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और परिवारवाद को दर्शाता है। जानकारी के अनुसार, जिन विकास कार्यों के लिए एमपीएलएडी फंड की सिफारिश की गई है, उनमें ढंके हुए बैठने के स्थानों का निर्माण, सार्वजनिक पुस्तकालय, सड़कें, स्कूलों और कॉलेजों में कक्षाओं का निर्माण, सामुदायिक केंद्र, सुरक्षा द्वार तथा ऊर्जा दक्ष श्मशान घाट शामिल हैं। इन कार्यों को स्थानीय जरूरतों से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि राजस्थान के सांसदों ने अपने ही राज्यों में इन निधियों का उपयोग क्यों नहीं किया।

कांग्रेस सांसद का जवाब
इस पूरे विवाद पर चूरू से कांग्रेस सांसद राहुल कस्वां ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने संविधान के तहत मिले अपने अधिकारों का ही प्रयोग किया है। उन्होंने कहा कि एमपीएलएडी योजना के तहत सांसद देश में कहीं भी विकास कार्यों की सिफारिश कर सकते हैं और इसमें कोई नियमों का उल्लंघन नहीं है। वहीं, इस मामले के सामने आने के बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। बीजेपी जहां इसे कांग्रेस की कथित राजनीतिक मिलीभगत बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे नियमों के दायरे में किया गया निर्णय बता रही है।
राहुल महाजन
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