दूसरी प्रेग्नेंसी के बारे में बड़े बच्चे को पहले बताना क्यों जरूरी है? जान‍िए वजह और सही समय!

parmodkumar

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अगर आप दूसरी बार प्रेग्नेंट हैं, तो पहले बच्चे से इस बारे में बात करना बेहद जरूरी है। इससे वह छोटे भाई या बहन के आगमन के लिए मानसिक रूप से तैयार हो सकता है और बदलाव को सहजता से स्वीकार कर सकता है। इसलिए, पेरेंट्स को प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही के बाद बच्चे से मिलकर बात करनी चाहिए।

कई पेरेंट्स शिकायत करते हैं कि सेकेंड प्रेग्नेंसी का पता चलते ही उनका बच्चा उदास हो गया है और कहता है कि मम्मी-पापा का प्यार अब कम हो जाएगा। इस समस्‍या पर मेरा कहना है क‍ि परिवार में छोटे भाई या बहन का आगमन बेहद खुशी का पल होता है, लेकिन बड़े बच्चे के लिए यह बड़ा भावनात्मक बदलाव भी लाता है। इस समय बच्चे असुरक्षा या ईर्ष्या महसूस कर सकते हैं।
ऐसे में खुलकर बातचीत करना और उसे शुरुआत से ही दूसरी प्रेग्‍नेंसी के बारे में बताना और इस जर्नी का हिस्सा बनाना-जैसे बेबी के लिए सामान चुनना या नाम सुझाना, उसे महत्वपूर्ण महसूस कराना मददगार साब‍ित हो सकता है। यह तरीका बच्‍चे को यह समझने में मदद करता कि वह हमेशा ही पेरेंट्स के लिए अनमोल है और रहेगा।
बदलती है बड़े बच्चे की दुनिया
माता-‍प‍िता को यह समझना चाह‍िए क‍ि छोटे भाई या बहन के आने की खबर बड़े बच्चे की दुनिया में एक बड़े बदलाव की शुरुआत करती है। दरअसल, अब तक माता-पिता का सारा ध्यान और दिनचर्या उसी के इर्द-गिर्द रहती थी, और अब उसे यह सब किसी के साथ बांटना पड़ेगा, यह ख्याल उसे असहज कर सकता है। इस कारण उसके मन में असुरक्षा या जलन जैसी भावनाएं आना आ सकती हैं।
इसील‍िए, बच्चे की इन भावनाओं को संभालने में माता-पिता का व्यवहार, उनका दिया गया समय और संवाद करने का तरीका सबसे अहम भूमिका निभाता है। यही बच्चे को भावनात्मक रूप से सुरक्षित महसूस कराता है और आगे चलकर भाई-बहन के रिश्ते की मजबूत नींव तैयार करता है।
पेरेंट्स इस चुनौती से निपटने के लिए बड़े बच्चे को सेकेंड प्रेग्नेंसी के बारे में समय रहते बताएं और उसे इस पूरी जर्नी का हिस्सा बनाएं। उसे छोटे-छोटे फैसलों में शामिल करें-जैसे बच्चे के कपड़े या खिलौने चुनना और नाम सुझाना। जब सही समय हो, तो उसे डॉक्टर के पास ले जाएं या बच्चे की मूवमेंट महसूस करने दें। साथ ही, उसे बेबी से बात करने या उसके लिए गाना गाने के लिए प्रेरित करें। ये छोटी-छोटी एक्टिविटीज सेकेंड बेबी के जन्म से पहले ही दोनों के बीच एक मजबूत और अपनापन भरा रिश्ता बनाने में मदद करती हैं।

मगर सही समय का करें चुनाव
माता-पिता को यह ध्यान रखना चाहिए कि सेकेंड प्रेग्नेंसी के बारे में बताने के लिए सही समय चुनना बहुत अहम होता है। आमतौर पर गर्भावस्था के स्थिर होने के बाद, यानी पहली तिमाही के बाद बच्चे को बताना बेहतर माना जाता है, हालांकि यह बच्चे की उम्र और समझ पर भी निर्भर करता है। छोटे बच्चों को तब जानकारी देना ज्यादा सही रहता है, जब मां के शारीरिक बदलाव दिखने लगते हैं, क्योंकि उनकी समझ सीमित होती है। वहीं, बड़े बच्चों से पहले ही बातचीत शुरू करने पर वे इस बदलाव को धीरे-धीरे समझ और स्वीकार कर पाते हैं।
छोटे भाई/ बहन के बारे में ऐसे करें बात
सेकेंड प्रेग्नेंसी के बारे में बड़े बच्चे से बात करते समय सरल, स्पष्ट और उसकी उम्र के हिसाब से उपयुक्त भाषा का इस्तेमाल करें। आप सहज तरीके से कह सकते हैं, ‘बेटा, मम्मा के टमी में एक बेबी है, जो कुछ महीनों में तुम्हारा छोटा भाई या बहन बनेगा।’ अनावश्यक डिटेल्स देने से बचें, ताकि बच्चा कंफ्यूज न हो। बड़े भाई या बहन बनने से जुड़ी कहानियों की किताबें भी इस कॉन्सेप्ट को समझाने में मददगार हो सकती हैं। बस सबसे जरूरी है कि बातचीत का लहजा सकारात्मक और भरोसा देने वाला हो, ताकि बच्चा इस बदलाव को सहजता से स्वीकार कर सके।
बच्‍चे की फील‍िंग्‍स को स्‍वीकार करें
माता-पिता को इस दौरान बच्चे की फीलिंग्स को स्वीकार करना बेहद जरूरी है, चाहे वे उलझन या ईर्ष्या से भरी क्‍यों न हों। साथ ही, उसे बड़े भाई या बहन के रूप में उसकी खास भूमिका और परिवार में उसकी अहमियत महसूस कराएं। बार-बार यह भरोसा दिलाएं कि मम्मी-पापा का प्यार उसके लिए कभी कम नहीं होगा।

ये गलती करने से बचें
सेकेंड प्रेग्‍नेंसी के बारे में बताने के अलावा पेरेंट्स को कुछ बातें बड़े भाई या बहन कहने से बचना चाहिए, जो उस पर दबाव डालें- जैसे, ‘अब तुम बड़े हो गए हो’ या ‘तुम्हें बच्चे का ध्यान रखना होगा।” इससे बच्चा परेशान या नाराज हो सकता है। बच्चों की तुलना करने से भी बचें और ऐसा न जताएं कि नया बच्चा उससे बेहतर है। साथ ही, बिना तैयारी के उसकी दिनचर्या में अचानक बदलाव न करें- जैसे उसके सोने की जगह बदलना। इससे वह असुरक्षित महसूस कर सकता है।
न‍िगेट‍िव र‍िएक्‍शन को ऐसे करें हैंडल
बड़े भाई या बहन बनने पर बच्चे उदास होना, गुस्सा करना या खुद को अलग कर लेना भी आम बात है। ऐसे में उन्हें डांटने के बजाय उनकी फील‍िंग्‍स को समझें और स्वीकार करें। उनसे प्यार से कहें, ‘मैं समझता हूं कि तुम परेशान हो, ऐसा महसूस करना ठीक है।’ साथ ही, बच्चे के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं और उसे यह एहसास दिलाएं कि वह आज भी उतना ही खास है। इस समय धैर्य, प्यार और समझदारी बहुत जरूरी होती है।

इन तरीकों से करें स्‍ट्रॉन्‍ग करें बॉन्‍ड‍िंग
अंत में लेक‍िन बेहद अहम है क‍ि माता-प‍िता छोटे भाई-बहन के जन्‍म के बाद बड़े बच्चे के बॉन्‍ड‍िंग स्‍ट्रॉन्‍ग करने के ल‍िए कुछ तरीके अपना सकते हैं। सबसे पहले वे उसके लिए अलग से समय न‍िकालें, चाहें रोज सिर्फ 10 से 15 मिनट ही क्यों न हो। उसे छोटे-छोटे कामों में शामिल करें, जैसे डायपर लाने में मदद करना या बेबी के पास रहना, और उसकी कोशिशों की तारीफ करें।

बिना किसी दबाव के उसे बड़े भाई-बहन बनने का महत्व समझाएं और इस भूमिका को खास महसूस कराएं। साथ ही, परिवार के बाकी सदस्यों को भी यह ध्यान रखना चाहिए कि वे पहले बच्चे को नजरअंदाज न करें, बल्कि उससे बात करें और उसे उतना ही महत्व दें।